{"_id":"5f5920158ebc3e2b88611fb3","slug":"hapur-news-hapur-news-gbd2051568180","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरदार सुच्चा सिंह ने हापुड़ के विकास को पंख लगाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरदार सुच्चा सिंह ने हापुड़ के विकास को पंख लगाए
विज्ञापन
सरदार सुच्चा सिंह
- फोटो : HAPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरदार सुच्चा सिंह ने हापुड़ के विकास में निभाई अहम भूमिका
अनिल त्यागी
हापुड़। नगर के तहसील चौपला के पास खेतों की सिंचाई के लिए रहट बनाने से लेकर सिलाई मशीन बनाने की फैक्टरी लगाकर सैकड़ों लोगों को रोजगार देने वाले स्वर्गीय सरदार सच्चा सिंह ने शहर के विकास में अहम भूमिका निभाई । बृहस्पतिवार को धूमधाम से उनकी जन्म शताब्दी मनाई जाएगी।
वर्ष 1943 में लुधियाना से आकर रामगढिया (विश्वकर्मा) समाज के सरदार कन्हैया सिंह अपने परिवार के साथ आकर हापुड़ में बसे थे। उस समय हापुड़ शहर का क्षेत्रफल काफी कम था तथा यहां कोई उद्योग नहीं था बल्कि अनाज मंडी के रूप में पहचान थी। कन्हैया सिंह के तीन बेटियां तथा चार पुत्रों में स्व. दलीप सिंह, स्व. सुच्चा सिंह, स्व. मलकियत सिंह व स्व. गुरुदेव सिंह थे।
सरदार सुच्चा सिंह काफी मेहनती थे। उन्होंने 1943 से 1952 तक अपने भाइयों के साथ मिलकर सिंचाई के लिए रहट और चारा काटने की मशीन बनाने का कार्य तहसील चौपला के पास किया। इस धंधे ने उन्हें समूचे उत्तर प्रदेश में काफी विख्यात कर दिया।
विज्ञापन
1952 में सरदार सुच्चा सिंह ने अपने भाई गुरुदेव आदि के सहयोग से सिलाई मशीन और उसके पुर्जे बनाने के लिए सरदार इंडस्ट्रीज की स्थापना की। इनका ब्रांड देशभर में प्रसिद्ध हो गया तथा सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलने लगा।
उनके बेटे सरदार गुरमेल सिंह सहारा बताते हैं कि उन्हीं के प्रयास से सरदार इंडस्ट्रीज परिसर में शिरोमणि संत बाबा ईश्वर सिंह जी महाराज राड़ा साहिब वालों के आश्रम का निर्माण गुरुद्वारा भौंरा नाम से व परिवार के सहयोग से किया। सरदार सुच्चा सिंह अपने जीवन काल में चैंबर ऑफ कॉमर्स मेरठ के अध्यक्ष, रोटरी क्लब हापुड़ के चेयरमैन, नगर पालिका के सदस्य, गुरुद्वारा सिंह सभा हापुड़ के प्रधान, रामगढिया और विश्वकर्मा फे डरेशन के भी अध्यक्ष रहे।
सुच्चा सिंह एक अच्छे कवि भी थे। वह देश भक्ति की कविताओं से युवाओं में जोश भर देते थे। वह समाज और देश सेवा के लिए आर्थिक सहयोग में अग्रणी रहते थे। उनके आमंत्रण पर देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरो, स्वर्गीय राष्ट्रपति सरदार ज्ञानी जैल सिंह, सरदार बूटा सिंह समेत अनेक केन्द्रीय मंत्री यहां पधारे। उन्हें ऑनरेरी मजिस्ट्रेट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया।
ट्रेड यूनियन से विवाद में तालाबंदी
हापुड़। सरदार इंडस्ट्रीज में करीब 450 श्रमिक कार्य करते थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू 1962 में जब एफसीआई का उद्घाटन करने आए तो सरदार इंडस्ट्रीज को देखने भी पहुंचे थे और एक मशीन को चलाकर इस इंडस्ट्रीज की सराहना की थी।
लेकिन इसे शहर का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वर्ष 1987 में ट्रेड यूनियन नेताओं ने इस इंडस्ट्रीज के सामने अपना लाल झंडा गाड़ दिया। इंडस्ट्रीज का प्रबंधन यूनियन नेताओं के सामने नहीं झुका परिणामस्वरूप वर्ष 1988 में यह इंडस्ट्रीज बंद हो गई। इसके बाद वर्ष 1990 में मालिकों ने तालाबंदी की घोषणा कर दी। इससे तमाम श्रमिक बेरोजगार हो गए तथा इस उद्योग से जुड़े हजारों लोग भी प्रभावित हुए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवरत्न त्यागी का कहना है कि सरदार इंडस्ट्रीज से बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार मिलता था। लेकिन कुछ श्रमिक नेताओं की जिद के कारण बेरोजगार हुए। उन्होंने सरदार सुच्चा सिंह के कार्यों की सराहना करते हुए उनकी 100वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।
विज्ञापन
अनिल त्यागी
हापुड़। नगर के तहसील चौपला के पास खेतों की सिंचाई के लिए रहट बनाने से लेकर सिलाई मशीन बनाने की फैक्टरी लगाकर सैकड़ों लोगों को रोजगार देने वाले स्वर्गीय सरदार सच्चा सिंह ने शहर के विकास में अहम भूमिका निभाई । बृहस्पतिवार को धूमधाम से उनकी जन्म शताब्दी मनाई जाएगी।
वर्ष 1943 में लुधियाना से आकर रामगढिया (विश्वकर्मा) समाज के सरदार कन्हैया सिंह अपने परिवार के साथ आकर हापुड़ में बसे थे। उस समय हापुड़ शहर का क्षेत्रफल काफी कम था तथा यहां कोई उद्योग नहीं था बल्कि अनाज मंडी के रूप में पहचान थी। कन्हैया सिंह के तीन बेटियां तथा चार पुत्रों में स्व. दलीप सिंह, स्व. सुच्चा सिंह, स्व. मलकियत सिंह व स्व. गुरुदेव सिंह थे।
विज्ञापन
सरदार सुच्चा सिंह काफी मेहनती थे। उन्होंने 1943 से 1952 तक अपने भाइयों के साथ मिलकर सिंचाई के लिए रहट और चारा काटने की मशीन बनाने का कार्य तहसील चौपला के पास किया। इस धंधे ने उन्हें समूचे उत्तर प्रदेश में काफी विख्यात कर दिया।
विज्ञापन
1952 में सरदार सुच्चा सिंह ने अपने भाई गुरुदेव आदि के सहयोग से सिलाई मशीन और उसके पुर्जे बनाने के लिए सरदार इंडस्ट्रीज की स्थापना की। इनका ब्रांड देशभर में प्रसिद्ध हो गया तथा सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलने लगा।
उनके बेटे सरदार गुरमेल सिंह सहारा बताते हैं कि उन्हीं के प्रयास से सरदार इंडस्ट्रीज परिसर में शिरोमणि संत बाबा ईश्वर सिंह जी महाराज राड़ा साहिब वालों के आश्रम का निर्माण गुरुद्वारा भौंरा नाम से व परिवार के सहयोग से किया। सरदार सुच्चा सिंह अपने जीवन काल में चैंबर ऑफ कॉमर्स मेरठ के अध्यक्ष, रोटरी क्लब हापुड़ के चेयरमैन, नगर पालिका के सदस्य, गुरुद्वारा सिंह सभा हापुड़ के प्रधान, रामगढिया और विश्वकर्मा फे डरेशन के भी अध्यक्ष रहे।
सुच्चा सिंह एक अच्छे कवि भी थे। वह देश भक्ति की कविताओं से युवाओं में जोश भर देते थे। वह समाज और देश सेवा के लिए आर्थिक सहयोग में अग्रणी रहते थे। उनके आमंत्रण पर देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरो, स्वर्गीय राष्ट्रपति सरदार ज्ञानी जैल सिंह, सरदार बूटा सिंह समेत अनेक केन्द्रीय मंत्री यहां पधारे। उन्हें ऑनरेरी मजिस्ट्रेट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया।
ट्रेड यूनियन से विवाद में तालाबंदी
हापुड़। सरदार इंडस्ट्रीज में करीब 450 श्रमिक कार्य करते थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू 1962 में जब एफसीआई का उद्घाटन करने आए तो सरदार इंडस्ट्रीज को देखने भी पहुंचे थे और एक मशीन को चलाकर इस इंडस्ट्रीज की सराहना की थी।
लेकिन इसे शहर का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वर्ष 1987 में ट्रेड यूनियन नेताओं ने इस इंडस्ट्रीज के सामने अपना लाल झंडा गाड़ दिया। इंडस्ट्रीज का प्रबंधन यूनियन नेताओं के सामने नहीं झुका परिणामस्वरूप वर्ष 1988 में यह इंडस्ट्रीज बंद हो गई। इसके बाद वर्ष 1990 में मालिकों ने तालाबंदी की घोषणा कर दी। इससे तमाम श्रमिक बेरोजगार हो गए तथा इस उद्योग से जुड़े हजारों लोग भी प्रभावित हुए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवरत्न त्यागी का कहना है कि सरदार इंडस्ट्रीज से बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार मिलता था। लेकिन कुछ श्रमिक नेताओं की जिद के कारण बेरोजगार हुए। उन्होंने सरदार सुच्चा सिंह के कार्यों की सराहना करते हुए उनकी 100वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।