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नारी सशक्तीकरण तभी होगा, जब समाज अपना नजरिया बदले

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 11 Feb 2021 12:26 AM IST
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Hapur News
कन्या इंटर कॉलेज में कार्यक्रम में मौजूद अतिथि एवं छात्राएं। - फोटो : GARH
नारी सशक्तीकरण तभी होगा, जब समाज अपना नजरिया बदले
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गढ़मुक्तेश्वर। नारी सशक्तीकरण का सबसे प्रमुख माध्यम शिक्षा है। महिला को अगर आगे बढ़ना है तो शिक्षा ग्रहण करना बेहद जरूरी है। शिक्षित महिला किसी भी क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर सकती है। ये बातें अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आदर्श कन्या इंटर कॉलेज में नारी सशक्तीकरण विषय पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने कहीं।
बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव डहराकुटी में स्थित आदर्श कन्या इंटर कॉलेज में बुधवार को हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य सुधा चौहान ने की। उन्होंने छात्राओं को सशक्तीकरण का पाठ पढ़ाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीईओ पंकज अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि एसआई सुरेंद्र सिंह ने छात्राओं को बताया कि जो किसी से न डरे वह अपराजिता है। महिला को अगर आगे बढ़ना है तो शिक्षा ग्रहण करना बेहद जरूरी है। शिक्षा के माध्यम से ही महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है। शिक्षित महिला किसी भी क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर सकती है। भारत देश को आगे बढ़ने में महिलाओं का भी उतना सहयोग है, जितना पुरुषों का है। उन्होंने बताया कि जिस जगह पर महिलाओं का सम्मान नही होता, वहां कभी भी देवताओं का भी निवास नही होता।
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बीईओ पंकज अग्रवाल ने कहा कि कभी भी किसी समस्या को लेकर झिझकना नहीं चाहिए। अगर भविष्य में आगे बढ़ना है तो कठिनाईयों का डटकर सामना करना होगा। जिस घर में महिलाओं के सम्मान में कमी नहीं होगी, उस घर में हमेशा खुशहाली बनी रहेगी।
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बहादुरगढ़ थाने के एसआई सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कभी कोई समस्या सामने आती है तो सरकार द्वारा चलाए जा रहे महिला हेल्पलाइन, 1090, 181 और यूपी 112 पर फोन कर अवगत कराएं। जिससे महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्रता करने वालो से सख्ती से निपटा जा सके।
प्रधानाचार्य सुधा चौहान ने कहा कि कभी भी अभिभावक बेटे और बेटी में अंतर न समझें। बेटियां भी परिश्रम कर हर क्षेत्र में बेटों की बराबरी कर रही हैं।
शिक्षिका आभा शर्मा ने कहा कि जिस घर में बेटी का सम्मान नहीं होता, उस घर में खुशी नहीं आती। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रथम शिक्षिका भी मां ही होती है। इसलिए हमें सदैव महिलाओं का सम्मान करना चाहिए।
शिक्षिका कामनी शर्मा ने कहा कि आज के दौर में महिलाओं को आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है। क्योंकि जो किसी के भरोसे नहीं होता, वह भविष्य में कुछ अच्छा कर सकता है।
कक्षा 12 की छात्रा निधि ने कहा कि जितने अधिकार घर में बेटे को मिलते हैं, अगर उतने ही अधिकार बेटी को भी मिलने लगें तो वह समाज के लिए एक मिसाल बन सकती है। इसलिए बेटी और बेटे के बीच अंतर करने वालों को अपनी सोच बदलनी चाहिए।
कक्षा 11 की छात्रा तृप्ती ने कहा कि समाज में नारी के प्रति गलत सोच रखने वाले लोगों को अपनी सोच बदलनी जरूरी है, तभी नारी का सम्मान हो पाएगा। उन्होंने कहा कि लड़कियों को उच्च शिक्षित करने से समाज का भी भला होगा।

कक्षा 12 की छात्रा नेहा ने कहा कि हर महिला अपना सम्मान चाहती है। इसलिए जितना सम्मान पुरुष को मिलता है, उतना ही सम्मान महिलाओं को भी मिलना चाहिए। यही समानता देश को आगे बढ़ाने का कार्य करेगी।
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