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फर्जी डिग्री के आधार पर ली नौकरी
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Mon, 30 May 2016 09:41 PM IST
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- फोटो : getty
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उच्च न्यायालय ने कानपुर के जिस शैक्षिक संस्थान की बीटीसी डिग्री को अवैध करार दिया था, उसी डिग्री के दम पर गालंद निवासी एक व्यक्ति ने पिलखुवा के जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक के पद पर नियुक्ति पा ली।
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शिक्षक वर्ष 1997 से वेतन भी पा रहा है। शिकायत मिलने के एक वर्ष बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने कोई जांच करना मुनासिब नहीं समझा है। यह खुलासा गालंद निवासी मनोज कुमार ने साक्ष्यों के आधार पर किया है।
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मनोज कुमार ने बताया कि उनके गांव के ही एक व्यक्ति ने 1994-96 में कानपुर के राष्ट्रीय पत्राचार संस्थान से बीटीसी की थी।
इसी दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस संस्थान की बीटीसी डिग्री को अवैध करार देकर इस डिग्री के आधार पर लगे शिक्षकों को बर्खाश्त कर वेतन का भुगतान न करने के आदेश दिए थे।
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1997 में व्यक्ति ने अवैध डिग्री के दम पर पिलखुवा के सरदार पटेल जूनियर हाईस्कूल में तैनाती पा ली। आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से सांठगांठ कर उसे नियुक्ति दी गई है।
मनोज ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने एक वर्ष पूर्व बीएसए को भी लिखित में शिकायत की थी। शिकायत के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षक पर कार्रवाई तो दूर जांच करना भी मुनासिब नहीं समझा। इस संबंध में मनोज कुमार ने प्रशासनिक अफसरों से शिकायत कर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
वहीं शिक्षक का कहना है कि उन्होंने कानपुर के संस्थान से बीटीसी की है यह बात सच है। उसके सभी दस्तावेज वैध हैं। उस पर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं।
नगर शिक्षा अधिकारी पंकज अग्रवाल का कहना है कि इस तरह की सूचना उन्हें मिली है। लेकिन लिखित में कोई शिकायत उनके पास नहीं आई है। फिर भी वह मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। डिग्री फर्जी मिलने पर शिक्षक को नौकरी से हटाया जा सकता है।