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डकैती को चोरी बताने में नहीं थक रहे थे, इंस्पेक्टर बाबूगढ़
Updated Sun, 09 Sep 2018 11:27 PM IST
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डकैती को चोरी बताने में नहीं
थक रहे थे, इंस्पेक्टर बाबूगढ़
ट्वीटर से डीजीपी को जानकारी देने और उनके कड़े निर्देश पर भी डकैती सिर्फ लूट में दर्ज
-अनिल त्यागी-
हापुड़। बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव नली हुसैनपुर के एक मकान में शनिवार की रात्रि महिलाओं को बंधक बनाकर जेवर नगदी समेत 26 लाख की डकैती पडने को इंस्पेक्टर बाबूगढ़ ने गंभीरता से नहीं लिया बल्कि वह इस वारदात को चोरी बताते नहीं थक रहे थे। डीजीपी के संज्ञान लेने पर भी डकैती सिर्फ लूट की धारा में मामला दर्ज की गई है।
इस डकैती की सूचना पर जब पत्रकार वहां पहुंचे तो इंस्पेक्टर रवीन्द्र राठी ने उन्हें घटनास्थल के फोटो नहीं करने दिये बल्कि कहा कि पहले पुलिस मामले की जांच कर ले, तब फोटो खींचना।
दरअसल वह घटनास्थल पर पहुंचने के बाद से ही इस बात पर दबाव देने लगे कि यह डकैती नहीं है बल्कि चोरी है क्योंकि परिवार के किसी सदस्य को चोट नहीं लगी। पुुरुषों को भनक तक नहीं लगी।
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उनका तो यहां तक कहना था कि महिलाओं को भी घटना का सुबह सोकर उठने पर ही पता लगा। वह इस परिवार के एक सदस्य पर कुछ ज्यादा ही गर्म हो रहे थे जो मुजफ्फरनगर में दरोगा के पद पर तैनात है।
उनका कहना था कि उक्त दरोगा ने ही चोरी को डकैती दर्शाने की कहानी फ्रेम कर पुलिस को सूचना दी है। लेकिन शायद वह यह भूल गये कि जिस सेफ संदूकों से जेवर लूटे गये हैं, उनके ताले नहीं तोड़े गये बल्कि चाबियों से खोले गये हैं। अगर वह चोर थे, तो उन्हें क्या पता कि चाबियां कहां रखी है। जबकि महिलाओं का लगातार यही कहना है कि बदमाशों की संख्या करीब एक दर्जन थी जिन्होंने सभी महिलाओं को तमंचों की नोक पर एकत्रित कर चाबियां लीं और फिर आराम से ताले खोलकर सामान खंगालकर लूटपाट की। उल्लेखनीय है कि चोरी तब मानी जाती, जब बिना जाग हुए माल साफ हो जाता।
हालांकि पुलिस अफसरों के घटनास्थल का निरीक्षण करते ही यह साफ हो गया कि चोरी नहीं बल्कि डकैती है। इसके बावजूद डकैती की धारा 395 में मुकदमा कायम नहीं किया गया बल्कि सिर्फ लूट की धारा 392 में मुकदमा किया गया है जो काफी गंभीर मामला है।
उल्लेखनीय है कि डकैती की धारा तभी लगती है, जब बदमाशों की संख्या पांच या उससे अधिक हो जबकि लूट की धारा तब लगती है, जब बदमाशों की संख्या पांच से कम हो। लगता है कि इंस्पेक्टर ने तहरीर में बदमाशों की संख्या नहीं खुलवायी बल्कि गोलमाल कर लूट की रिपोर्ट दर्ज कर ली। ऐसे में यह साफ है कि बदमाश पकड़े जाये या नहीं लेकिन थाने के रिकार्ड में एक डकैती का आंकड़ा बढने से बचाने में इंस्पेक्टर सफल रहे हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक राम मोहन सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। इस संबंध में उनका कहना था कि पीड़ित परिवार की महिलाओं को कहना था कि बदमाशों की संख्या 7 या 8 थी। लेकिन तहरीर में बदमाशों की संख्या कितनी लिखी गयी है, यह उन्हें नहीं मालूम। इतना जरूर है जो वादी ने लिखकर दिया होगा, उसी के अनुसार धारा लगी होगी।
आश्चर्य की बात यह है कि इस भीषण डकैती का विवरण कुछ लोगों ने ट्वीटर पर डालकर डीजीपी को भेज दिया था। उन्होंने सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये। शायद इसी का असर रहा कि कम से कम लूट लिख ली गयी अन्यथा इंस्पेक्टर चोरी ही दर्ज करने की फिराक में लगे थे।
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थक रहे थे, इंस्पेक्टर बाबूगढ़
ट्वीटर से डीजीपी को जानकारी देने और उनके कड़े निर्देश पर भी डकैती सिर्फ लूट में दर्ज
-अनिल त्यागी-
हापुड़। बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव नली हुसैनपुर के एक मकान में शनिवार की रात्रि महिलाओं को बंधक बनाकर जेवर नगदी समेत 26 लाख की डकैती पडने को इंस्पेक्टर बाबूगढ़ ने गंभीरता से नहीं लिया बल्कि वह इस वारदात को चोरी बताते नहीं थक रहे थे। डीजीपी के संज्ञान लेने पर भी डकैती सिर्फ लूट की धारा में मामला दर्ज की गई है।
इस डकैती की सूचना पर जब पत्रकार वहां पहुंचे तो इंस्पेक्टर रवीन्द्र राठी ने उन्हें घटनास्थल के फोटो नहीं करने दिये बल्कि कहा कि पहले पुलिस मामले की जांच कर ले, तब फोटो खींचना।
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दरअसल वह घटनास्थल पर पहुंचने के बाद से ही इस बात पर दबाव देने लगे कि यह डकैती नहीं है बल्कि चोरी है क्योंकि परिवार के किसी सदस्य को चोट नहीं लगी। पुुरुषों को भनक तक नहीं लगी।
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उनका तो यहां तक कहना था कि महिलाओं को भी घटना का सुबह सोकर उठने पर ही पता लगा। वह इस परिवार के एक सदस्य पर कुछ ज्यादा ही गर्म हो रहे थे जो मुजफ्फरनगर में दरोगा के पद पर तैनात है।
उनका कहना था कि उक्त दरोगा ने ही चोरी को डकैती दर्शाने की कहानी फ्रेम कर पुलिस को सूचना दी है। लेकिन शायद वह यह भूल गये कि जिस सेफ संदूकों से जेवर लूटे गये हैं, उनके ताले नहीं तोड़े गये बल्कि चाबियों से खोले गये हैं। अगर वह चोर थे, तो उन्हें क्या पता कि चाबियां कहां रखी है। जबकि महिलाओं का लगातार यही कहना है कि बदमाशों की संख्या करीब एक दर्जन थी जिन्होंने सभी महिलाओं को तमंचों की नोक पर एकत्रित कर चाबियां लीं और फिर आराम से ताले खोलकर सामान खंगालकर लूटपाट की। उल्लेखनीय है कि चोरी तब मानी जाती, जब बिना जाग हुए माल साफ हो जाता।
हालांकि पुलिस अफसरों के घटनास्थल का निरीक्षण करते ही यह साफ हो गया कि चोरी नहीं बल्कि डकैती है। इसके बावजूद डकैती की धारा 395 में मुकदमा कायम नहीं किया गया बल्कि सिर्फ लूट की धारा 392 में मुकदमा किया गया है जो काफी गंभीर मामला है।
उल्लेखनीय है कि डकैती की धारा तभी लगती है, जब बदमाशों की संख्या पांच या उससे अधिक हो जबकि लूट की धारा तब लगती है, जब बदमाशों की संख्या पांच से कम हो। लगता है कि इंस्पेक्टर ने तहरीर में बदमाशों की संख्या नहीं खुलवायी बल्कि गोलमाल कर लूट की रिपोर्ट दर्ज कर ली। ऐसे में यह साफ है कि बदमाश पकड़े जाये या नहीं लेकिन थाने के रिकार्ड में एक डकैती का आंकड़ा बढने से बचाने में इंस्पेक्टर सफल रहे हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक राम मोहन सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। इस संबंध में उनका कहना था कि पीड़ित परिवार की महिलाओं को कहना था कि बदमाशों की संख्या 7 या 8 थी। लेकिन तहरीर में बदमाशों की संख्या कितनी लिखी गयी है, यह उन्हें नहीं मालूम। इतना जरूर है जो वादी ने लिखकर दिया होगा, उसी के अनुसार धारा लगी होगी।
आश्चर्य की बात यह है कि इस भीषण डकैती का विवरण कुछ लोगों ने ट्वीटर पर डालकर डीजीपी को भेज दिया था। उन्होंने सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये। शायद इसी का असर रहा कि कम से कम लूट लिख ली गयी अन्यथा इंस्पेक्टर चोरी ही दर्ज करने की फिराक में लगे थे।
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