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Hapur News: मोनाड विवि के मालिक और बेटे की जमानत याचिका खारिज
Mon, 09 Jun 2025 09:59 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Mon, 09 Jun 2025 09:59 PM IST
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हापुड़। मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी मार्कशीट व डिग्री के मामले में सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विश्वविद्यालय के मालिक विजेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे संदीप सेहरावत की जमानत याचिका खारिज कर दी। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 में नोएडा में हुए बाइक बोट घोटाले में विजेंद्र हुड्डा के शामिल होने व वर्तमान में जमानत पर होने पर न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज की है।
एसटीएफ ने 17 मई 2025 को मोनाड यूनिवर्सिटी पर छापा मारा था। इस दौरान एसटीएफ ने यहां से 1372 फर्जी डिग्रियां, 262 फर्जी प्रोविजनल व माइग्रेशन सर्टिफिकेट, 14 मोबाइल फोन व सात लैपटॉप बरामद किए थे। एसटीएफ के अनुसार, पिछले दो तीन वर्षों से यह रैकेट सक्रिय था और फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल कर सरकारी व निजी कंपनियों में लोग नौकरियां कर रहे हैं।
इतना ही नहीं गिरोह में शामिल आरोपी बीटेक, एलएलबी, बी.एड व फार्मेसी जैसे कोर्स की फर्जी डिग्रियां 50 हजार रुपये से चार लाख रुपये में लोगों को बेच रहे थे। एसटीएफ उन लोगों की भी जांच कर रही है, जो फर्जी डिग्रियों पर सरकारी व आदि संस्थानों में नौकरी कर रहे हैं।
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बता दें कि यूनिवर्सिटी के मालिक विजेंद्र सिंह हुड्डा, वर्ष 2024 में बिजनौर लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं, इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। फर्जी डिग्री और मार्कशीट के मामले में वह मुख्य आरोपी भी हैं। इस मामले में आरोपी मुकेश ठाकुर, नितिन कुमार सिंह, गौरव शर्मा, सन्नी कश्यप, इमरान, कुलदीप, विपुल व अनिल बत्रा की तरफ से भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां जमानत याचिका डाली गई है। इस पर 11 जून को न्यायालय सुनवाई करेगा। सोमवार को न्यायालय में एसटीएफ के अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। वहीं, न्यायालय ने संबंधित विवेचक से आख्या भी मांगी है। एसटीएफ के अधिवक्ता ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी आर्थिक अपराध के मामलों में पहले से जमानत पर है। इसको भी आधार बनाते हुए अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया।
जमानत के लिए दिल्ली से आए अधिवक्ता
जमानत को लेकर करीब 10 मिनट तक दोनों पक्षों में न्यायालय में बहस हुई। एसटीएफ के अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी पक्ष की ओर से जमानत के लिए दिल्ली से अधिवक्ता बुलाए गए थे, जिन्होंने जमानत याचिका के साथ ही एसटीएफ के कब्जे में मोनाड विवि के सर्वर, इलेक्ट्रानिक उपकरण और दस्तावेजों को मुक्त करने के लिए भी न्यायालय में अपना पक्ष रखा है। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।
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एसटीएफ ने 17 मई 2025 को मोनाड यूनिवर्सिटी पर छापा मारा था। इस दौरान एसटीएफ ने यहां से 1372 फर्जी डिग्रियां, 262 फर्जी प्रोविजनल व माइग्रेशन सर्टिफिकेट, 14 मोबाइल फोन व सात लैपटॉप बरामद किए थे। एसटीएफ के अनुसार, पिछले दो तीन वर्षों से यह रैकेट सक्रिय था और फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल कर सरकारी व निजी कंपनियों में लोग नौकरियां कर रहे हैं।
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इतना ही नहीं गिरोह में शामिल आरोपी बीटेक, एलएलबी, बी.एड व फार्मेसी जैसे कोर्स की फर्जी डिग्रियां 50 हजार रुपये से चार लाख रुपये में लोगों को बेच रहे थे। एसटीएफ उन लोगों की भी जांच कर रही है, जो फर्जी डिग्रियों पर सरकारी व आदि संस्थानों में नौकरी कर रहे हैं।
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बता दें कि यूनिवर्सिटी के मालिक विजेंद्र सिंह हुड्डा, वर्ष 2024 में बिजनौर लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं, इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। फर्जी डिग्री और मार्कशीट के मामले में वह मुख्य आरोपी भी हैं। इस मामले में आरोपी मुकेश ठाकुर, नितिन कुमार सिंह, गौरव शर्मा, सन्नी कश्यप, इमरान, कुलदीप, विपुल व अनिल बत्रा की तरफ से भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां जमानत याचिका डाली गई है। इस पर 11 जून को न्यायालय सुनवाई करेगा। सोमवार को न्यायालय में एसटीएफ के अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। वहीं, न्यायालय ने संबंधित विवेचक से आख्या भी मांगी है। एसटीएफ के अधिवक्ता ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी आर्थिक अपराध के मामलों में पहले से जमानत पर है। इसको भी आधार बनाते हुए अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया।
जमानत के लिए दिल्ली से आए अधिवक्ता
जमानत को लेकर करीब 10 मिनट तक दोनों पक्षों में न्यायालय में बहस हुई। एसटीएफ के अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी पक्ष की ओर से जमानत के लिए दिल्ली से अधिवक्ता बुलाए गए थे, जिन्होंने जमानत याचिका के साथ ही एसटीएफ के कब्जे में मोनाड विवि के सर्वर, इलेक्ट्रानिक उपकरण और दस्तावेजों को मुक्त करने के लिए भी न्यायालय में अपना पक्ष रखा है। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।