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सड़क पर लोडिंग-अनलोडिंग, बिल्टी पर लाखों का कारोबार
Hapur
Updated Tue, 22 Oct 2013 05:42 AM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ की धान मंडी में कारोबार बढ़िया चल रहा है लेकिन उससे कहीं ज्यादा मुनाफे का कारोबार उसके बाहर से चलाया जा रहा है। सड़क पर धान की लोडिंग-अनलोडिंग होती है और बिल्टी के जरिए लाखों का माल बिना टैक्स अदा दिए जिले ही नहीं सूबे से बाहर भी आ-जा रहा है। नतीजतन सरकार को सेल्स टैक्स और मंडी टैक्स के रूप में भारी क्षति हो रही है।
यह तो सभी जानते हैं कि एक 12 टायरा ट्रक में दो सौ से लेकर ढाई सौ कुंतल तक धान लोड किया जाता है। धान के औसत मूल्य 24 सौ रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से एक ट्रक में तकरीबन पांच लाख का माल होता है। इस पर साढे़ 6 प्रतिशत के हिसाब से सेल्स टैक्स और मंडी समिति टैक्स करीब 31 हजार से अधिक बैठता है। लेकिन इस टैक्स से बचने के लिए व्यापारी अपने माल को किसान का दर्शाकर बिल्टी का सहारा लेता है और यह बिल्टी बाजार में आसानी से एक हजार से डेढ़ हजार रुपए में उपलब्ध हो जाती है, जिसे एजेंट कमीशन लेकर आगे दे देते हैं।
एब अंदर की बात जानिए, ट्रांसपोर्ट कंपनियों से जुड़े लोग सैल्स टैक्स और मंडी समिति विभाग में सांठ-गांठ कर उनसे गोपनीय कोड नंबर हासिल कर लेते हैं, जिसे ट्रांसपोर्ट कंपनी की बिल्टी पर अंकित कर उसे लिफाफे में बंद कर दिया जाता है। बिल्टी की आड़ में व्यापारियों का माल किसानों की जींस बन जाता है और रास्ते में चेकिंग होने पर अधिकारी अपने विभाग से जारी कोड नंबर देखने के बाद उसे आगे रवाना कर देते हैं। इस दरम्यान सैल्स टैक्स, मंडी समिति के अधिकारी और ट्रांसपोर्टर के बीच सहूलियत का लेनदेन भी हो जाता है। इस समय गढ़ मंडी से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान के चावल मिलों को जाने वाले धान की गाड़ियों पर संभल व अमरोहा से जारी बिल्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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यह तो सभी जानते हैं कि एक 12 टायरा ट्रक में दो सौ से लेकर ढाई सौ कुंतल तक धान लोड किया जाता है। धान के औसत मूल्य 24 सौ रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से एक ट्रक में तकरीबन पांच लाख का माल होता है। इस पर साढे़ 6 प्रतिशत के हिसाब से सेल्स टैक्स और मंडी समिति टैक्स करीब 31 हजार से अधिक बैठता है। लेकिन इस टैक्स से बचने के लिए व्यापारी अपने माल को किसान का दर्शाकर बिल्टी का सहारा लेता है और यह बिल्टी बाजार में आसानी से एक हजार से डेढ़ हजार रुपए में उपलब्ध हो जाती है, जिसे एजेंट कमीशन लेकर आगे दे देते हैं।
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एब अंदर की बात जानिए, ट्रांसपोर्ट कंपनियों से जुड़े लोग सैल्स टैक्स और मंडी समिति विभाग में सांठ-गांठ कर उनसे गोपनीय कोड नंबर हासिल कर लेते हैं, जिसे ट्रांसपोर्ट कंपनी की बिल्टी पर अंकित कर उसे लिफाफे में बंद कर दिया जाता है। बिल्टी की आड़ में व्यापारियों का माल किसानों की जींस बन जाता है और रास्ते में चेकिंग होने पर अधिकारी अपने विभाग से जारी कोड नंबर देखने के बाद उसे आगे रवाना कर देते हैं। इस दरम्यान सैल्स टैक्स, मंडी समिति के अधिकारी और ट्रांसपोर्टर के बीच सहूलियत का लेनदेन भी हो जाता है। इस समय गढ़ मंडी से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान के चावल मिलों को जाने वाले धान की गाड़ियों पर संभल व अमरोहा से जारी बिल्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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