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तीन तलाक पर कहीं खुशी तो कहीं गम
Updated Tue, 22 Aug 2017 11:28 PM IST
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तीन तलाक पर कहीं खुशी तो कहीं गम
-मुस्लिम समाज के लोगों की इस मुद्दे पर मिली जुली प्रतिक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम समाज ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। महिला वर्ग इस फैसले को नजीर बता रही है है तो पुरुष और उलेमा इसे शरियत में दखलनंदाजी करार दिया है।
राजीव विहार निवासी शहाना परवीण का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट की ओर ेस तीन तलाक पर फिलहाल रोक लगाए जाने वाले फैसले का स्वागत करती है। कोर्ट ने अपने इस फैसले से मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को राहत दी है। इससे हलाला के नाम पर हो रहा महिलाओं का उत्पीड़न बंद होने की उम्मीद है।
फोटो फाइल संख्या-19
समाजसेवी फसीह चौधरी का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। कोर्ट ने कुरान व इस्लाम को ध्यान में रखते हुए यह एतिहासिक फैसला दिया है। गलती पुरुषों की होती थी खामियाजा महिलाएं भुगतती थी। हलाला का फायदा भी पुरुष को मिलता था।
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-फोटो फाइल संख्या-20
गढ़ गेट निवासी जावेद कुरैशी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है। मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी अब बराबरी का हक मिलेगा। इस फैसले के बाद कानून बनने से उन महिलाओं को राहत मिल सकेगी जो बिना सोचे समझे लिए गए फैसले का शिकार होती थी।
-फोटो फाइल संख्या-21
उलेमाओं ने फैसले पर जताया विरोध
ऑल इंडिया इमाम काउंसिल के जिला सदर मौलाना मुफ्ती खालिद कासमी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला शरियत में मदाखिलत (टांग अड़ाना) है। यह फैसला मुसलमानों के हक में नहीं है, बल्कि कोर्ट ने हुकूमत के पाले में गेंद डाल दी है।
--फोटो फाइल संख्या-22
जामा मस्जिद के इमाम कारी आसिम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला शरियत के खिलाफ है। कोर्ट की शरियत के अंदर दखलअंदाजी सही नहीं है। हिंदुस्तान में सभी धर्मों के लोगों को अपने मजहब का अमल करने का हक दिया गया है। तीन तलाक का मुद्दा भी शरियत के मुताबिक ही होना चाहिए।
-फोटो फाइल संख्या-23
जमीयत उलेमा ए हिंद के पूर्व सदस्य यासीन मलिक का कहना है कि मुस्लिम समुदाय की इस फजीहत के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जिम्मेदार है। बोर्ड को पहले ही इस मामले को कुरान और हदीस की रोशनी में हल कर लेना चाहिए था।
-फोटो फाइल संख्या-24
पूर्व पालिका सदस्य डॉ.शमशाद की पत्नी नाहिद का कहना है कि तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह महिलाओं के हित में है। क्योंकि इससे गुस्सा, नशा, लालच और दबाव में होने वाली तीन तलाक पर पूरी तरह रोक लग जाएगी, लेकिन केंद्र सरकार को चाहिए कि वह शरियत से जुड़े दूसरे कानूनों में कोई भी दखल अंदाजी न करे।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले सबने सराहा
फोटो 5
अमर उजाला ब्यूरो
गढ़मुक्तेश्वर। इलाके में तीन तलाक के शरई कानून को सुप्रीम कोर्ट की ओर से अवैध करार दिए जाने पर मुस्लिम महिला समेत मजहबी उलेमाओं ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है।
पूर्व पालिका सदस्य डॉ.शमशाद की पत्नी नाहिद का कहना है कि तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। इससे उन महिलाओं को राहत मिलेगी जो तीन तलाक शिकार हैं। हालांकि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह शरियत से जुड़े दूसरे कानूनों में कोई दखलअंदाजी न करे।
दरगाह शरीफ मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुहम्मद अनस का कहना है कि शरियत में भी एक दम तीन तलाक देने की मनाही है। समझौते की कोशिश कामयाब न हो पाए तो भी एक साथ तीन तलाक देने की बजाए एक माह में एक तलाक देने का हुक्म है, ताकि समझौता होने की गुंजाइश बनी रहे।
पूर्व वाइस चेयरमैन गफ्फार खां का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। लेकिन अगर पति-पत्नी का मनमुटाव दूर नहीं हो पाता है तो शरियत में दी गई व्यवस्था के मुताबिक अब भी तलाक दी जा सकेगी।
शहर काजी हाजी सैयद कसीमुद्दीन कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह शरियत के कानून पर आधारित है। शरियत में भी साफ तौर पर तीन तलाक से बचने का जिक्र है। शरियत में एक-एक माह के अंतर से तलाक दिए जाने पर जोर दिया गया है, ताकि बीवी के गलती मानने पर दूसरी अथवा तीसरी तलाक की बारी ही न आ पाए। लेकिन एक दम तीन तलाक दिए जाने के बाद दोबारा रिश्ता कायम करने को हलाला ही एक रास्ता बाकी बचता है। जिसमें तलाकशुदा महिला को पहले दूसरे मर्द से निकाह करना जरूरी होता है, जिसके बाद अगर वह अपनी मर्जी से तलाक दे तो फिर इद्दत पूरी करने के बाद पहले पति से निकाह किया जा सकता है।
गंगा विचार मंच ने फैसले को ऐतिहासिक बताया
फोटो 6
गढ़मुक्तेश्वर। तीन तलाक को पूरी तरह अवैध करार दिए जाने पर गंगा विचार मंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एतिहासिक बताकर मिठाई बांटीं।
ब्रजघाट गंगानगरी में गंगा विचार मंच के वैस्टर्न यूपी सह संयोजक अशोक शर्मा के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एतिहासिक बताया। अशोक शर्मा ने कहा कि तीन तलाक एक ऐसी कुप्रथा है, जो सदियों से मुस्लिम वर्ग की महिलाओं का शोषण करती आ रही थी। गंगा आरती पुजारी योगेंद्र पंडित, मनोज तिवारी, सिद्धार्थ शर्मा, अश्वनी पंडित, शरद शर्मा, नवीन शर्मा, रविकांत कौशिक, नवनीत समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।
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-मुस्लिम समाज के लोगों की इस मुद्दे पर मिली जुली प्रतिक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम समाज ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। महिला वर्ग इस फैसले को नजीर बता रही है है तो पुरुष और उलेमा इसे शरियत में दखलनंदाजी करार दिया है।
राजीव विहार निवासी शहाना परवीण का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट की ओर ेस तीन तलाक पर फिलहाल रोक लगाए जाने वाले फैसले का स्वागत करती है। कोर्ट ने अपने इस फैसले से मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को राहत दी है। इससे हलाला के नाम पर हो रहा महिलाओं का उत्पीड़न बंद होने की उम्मीद है।
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समाजसेवी फसीह चौधरी का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। कोर्ट ने कुरान व इस्लाम को ध्यान में रखते हुए यह एतिहासिक फैसला दिया है। गलती पुरुषों की होती थी खामियाजा महिलाएं भुगतती थी। हलाला का फायदा भी पुरुष को मिलता था।
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गढ़ गेट निवासी जावेद कुरैशी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है। मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी अब बराबरी का हक मिलेगा। इस फैसले के बाद कानून बनने से उन महिलाओं को राहत मिल सकेगी जो बिना सोचे समझे लिए गए फैसले का शिकार होती थी।
-फोटो फाइल संख्या-21
उलेमाओं ने फैसले पर जताया विरोध
ऑल इंडिया इमाम काउंसिल के जिला सदर मौलाना मुफ्ती खालिद कासमी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला शरियत में मदाखिलत (टांग अड़ाना) है। यह फैसला मुसलमानों के हक में नहीं है, बल्कि कोर्ट ने हुकूमत के पाले में गेंद डाल दी है।
--फोटो फाइल संख्या-22
जामा मस्जिद के इमाम कारी आसिम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला शरियत के खिलाफ है। कोर्ट की शरियत के अंदर दखलअंदाजी सही नहीं है। हिंदुस्तान में सभी धर्मों के लोगों को अपने मजहब का अमल करने का हक दिया गया है। तीन तलाक का मुद्दा भी शरियत के मुताबिक ही होना चाहिए।
-फोटो फाइल संख्या-23
जमीयत उलेमा ए हिंद के पूर्व सदस्य यासीन मलिक का कहना है कि मुस्लिम समुदाय की इस फजीहत के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जिम्मेदार है। बोर्ड को पहले ही इस मामले को कुरान और हदीस की रोशनी में हल कर लेना चाहिए था।
-फोटो फाइल संख्या-24
पूर्व पालिका सदस्य डॉ.शमशाद की पत्नी नाहिद का कहना है कि तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह महिलाओं के हित में है। क्योंकि इससे गुस्सा, नशा, लालच और दबाव में होने वाली तीन तलाक पर पूरी तरह रोक लग जाएगी, लेकिन केंद्र सरकार को चाहिए कि वह शरियत से जुड़े दूसरे कानूनों में कोई भी दखल अंदाजी न करे।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले सबने सराहा
फोटो 5
अमर उजाला ब्यूरो
गढ़मुक्तेश्वर। इलाके में तीन तलाक के शरई कानून को सुप्रीम कोर्ट की ओर से अवैध करार दिए जाने पर मुस्लिम महिला समेत मजहबी उलेमाओं ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है।
पूर्व पालिका सदस्य डॉ.शमशाद की पत्नी नाहिद का कहना है कि तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। इससे उन महिलाओं को राहत मिलेगी जो तीन तलाक शिकार हैं। हालांकि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह शरियत से जुड़े दूसरे कानूनों में कोई दखलअंदाजी न करे।
दरगाह शरीफ मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुहम्मद अनस का कहना है कि शरियत में भी एक दम तीन तलाक देने की मनाही है। समझौते की कोशिश कामयाब न हो पाए तो भी एक साथ तीन तलाक देने की बजाए एक माह में एक तलाक देने का हुक्म है, ताकि समझौता होने की गुंजाइश बनी रहे।
पूर्व वाइस चेयरमैन गफ्फार खां का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। लेकिन अगर पति-पत्नी का मनमुटाव दूर नहीं हो पाता है तो शरियत में दी गई व्यवस्था के मुताबिक अब भी तलाक दी जा सकेगी।
शहर काजी हाजी सैयद कसीमुद्दीन कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह शरियत के कानून पर आधारित है। शरियत में भी साफ तौर पर तीन तलाक से बचने का जिक्र है। शरियत में एक-एक माह के अंतर से तलाक दिए जाने पर जोर दिया गया है, ताकि बीवी के गलती मानने पर दूसरी अथवा तीसरी तलाक की बारी ही न आ पाए। लेकिन एक दम तीन तलाक दिए जाने के बाद दोबारा रिश्ता कायम करने को हलाला ही एक रास्ता बाकी बचता है। जिसमें तलाकशुदा महिला को पहले दूसरे मर्द से निकाह करना जरूरी होता है, जिसके बाद अगर वह अपनी मर्जी से तलाक दे तो फिर इद्दत पूरी करने के बाद पहले पति से निकाह किया जा सकता है।
गंगा विचार मंच ने फैसले को ऐतिहासिक बताया
फोटो 6
गढ़मुक्तेश्वर। तीन तलाक को पूरी तरह अवैध करार दिए जाने पर गंगा विचार मंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एतिहासिक बताकर मिठाई बांटीं।
ब्रजघाट गंगानगरी में गंगा विचार मंच के वैस्टर्न यूपी सह संयोजक अशोक शर्मा के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एतिहासिक बताया। अशोक शर्मा ने कहा कि तीन तलाक एक ऐसी कुप्रथा है, जो सदियों से मुस्लिम वर्ग की महिलाओं का शोषण करती आ रही थी। गंगा आरती पुजारी योगेंद्र पंडित, मनोज तिवारी, सिद्धार्थ शर्मा, अश्वनी पंडित, शरद शर्मा, नवीन शर्मा, रविकांत कौशिक, नवनीत समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।