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सोशल मीडिया पर 10 व 14 अप्रैल को भारत बंद के मैसेज वायरल
Updated Fri, 06 Apr 2018 12:05 AM IST
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सोशल मीडिया पर 10 व 14 को भारत बंद का मैसेज वायरल
हापुड़। भारत बंद के दौरान कई शहरों में बवाल के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर बंद के आह्वान का मैसेज वायरल होने से हड़कंप है। सामान्य वर्ग की ओर से 10 अप्रैल को आरक्षण के विरोध में मैसेज भेजे जा रहे हैं तो वहीं दलित वर्ग की ओर से एक बार फिर 14 अप्रैल को बंद संबंधी मैसेज वायरल करने शुरू कर दिए गए हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन इस प्रकार के मैसेजों को कोरी अफवाह बताकर कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
सोशल मीडिया जहां एक से दूसरे लोगों को ज्ञान वर्धक और जागरूकता संबंधी जानकारी देने में सहायक होता था। वहीं कुछ लोग इसे भ्रामक और असामाजिक जानकारियों के लिए भी प्रयोग कर रहे हैं। सोमवार को बंद के दौरान हिंसा से लोग अभी उबर भी नहीं पाये थे कि अब 10 और 14 अप्रैल को बंद के आह्वान के मैसेज धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं।
सामान्य वर्ग के लोगों की ओर से जारी मैसेजों में आरक्षण के विरोध में 10 अप्रैल को बंद घोषित किया गया है। दूसरी ओर इसके उल्टा दलित समाज की ओर से भी इस मैसेज का जवाब दिया जा रहा है। इस समाज के लोगों का मैसेज है कि 10 को बंद रखा गया तो दलित वर्ग 14 अप्रैल को बड़े स्तर पर बंद रखेगा। इस प्रकार के मैसेज सोशल ग्रुप पर धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं।
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हालांकि इस प्रकार के किसी मैसेज में कोई सच्चाई नहीं है, लेकिन लोगों में भय का माहौल है। उधर पुलिस इस प्रकार के मैसेज वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक राम मोहन सिंह का कहना है कि पुलिस प्रशासन के अधिकारी इस तरह के मैसेजों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। अगर किसी मैसेज से यह लगेगा कि उसमें जनता की भावनाओं को उकसाने का प्रयास किया गया है तो सख्त कार्रवाई होगी।
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हापुड़। भारत बंद के दौरान कई शहरों में बवाल के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर बंद के आह्वान का मैसेज वायरल होने से हड़कंप है। सामान्य वर्ग की ओर से 10 अप्रैल को आरक्षण के विरोध में मैसेज भेजे जा रहे हैं तो वहीं दलित वर्ग की ओर से एक बार फिर 14 अप्रैल को बंद संबंधी मैसेज वायरल करने शुरू कर दिए गए हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन इस प्रकार के मैसेजों को कोरी अफवाह बताकर कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
सोशल मीडिया जहां एक से दूसरे लोगों को ज्ञान वर्धक और जागरूकता संबंधी जानकारी देने में सहायक होता था। वहीं कुछ लोग इसे भ्रामक और असामाजिक जानकारियों के लिए भी प्रयोग कर रहे हैं। सोमवार को बंद के दौरान हिंसा से लोग अभी उबर भी नहीं पाये थे कि अब 10 और 14 अप्रैल को बंद के आह्वान के मैसेज धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं।
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सामान्य वर्ग के लोगों की ओर से जारी मैसेजों में आरक्षण के विरोध में 10 अप्रैल को बंद घोषित किया गया है। दूसरी ओर इसके उल्टा दलित समाज की ओर से भी इस मैसेज का जवाब दिया जा रहा है। इस समाज के लोगों का मैसेज है कि 10 को बंद रखा गया तो दलित वर्ग 14 अप्रैल को बड़े स्तर पर बंद रखेगा। इस प्रकार के मैसेज सोशल ग्रुप पर धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं।
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हालांकि इस प्रकार के किसी मैसेज में कोई सच्चाई नहीं है, लेकिन लोगों में भय का माहौल है। उधर पुलिस इस प्रकार के मैसेज वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक राम मोहन सिंह का कहना है कि पुलिस प्रशासन के अधिकारी इस तरह के मैसेजों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। अगर किसी मैसेज से यह लगेगा कि उसमें जनता की भावनाओं को उकसाने का प्रयास किया गया है तो सख्त कार्रवाई होगी।