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पल्लेदारों की हड़ताल खत्म, गेहूं लेकर पहुंचे किसान
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Wed, 15 Apr 2015 12:51 AM IST
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पल्लेदारों की हड़ताल समाप्त होते ही मंगलवार को कृषि उत्पादन मंडी समिति
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में रौनक लौर्ट आई। लगातार 8 दिन तक चली हड़ताल से मंडी के राजस्व को लाखों
रुपये की क्षति उठानी पड़ी। वहीं किसान और गल्ला व्यापारी भी परेशान रहे।
गेहूं के भाव सिर्फ 1250 रुपये रेट घोषित होने पर किसानों को झटका लगा।
बीती शाम पल्लेदार संघ के अध्यक्ष रसूल खां सहित पल्लेदारों के साथ बात करने के लिए व्यापारी रामबाबू को जिम्मेदारी सौंपी गई। पल्लेदारों की कुछ मांगे मानते हुए हड़ताल की समाप्ति की घोषणा कर दी गई। पल्लेदारों ने मंगलवार से काम शुरू कर दिया। यह सूचना पूरे क्षेत्र में पहुंचते ही मंडी में अनाज बेचने वाले किसानों का तांता लग गया।
चहल पहल के साथ गल्ला व्यवसाय रोजमर्रा की तरह सामान्य हो गया। इस हड़ताल के समाप्त होने के साथ ही अब व्यापारियों ने प्रतिदिन की तरह गल्ले के दामों की घोषणा की गई। आज गेहूं के दामों की हालत सबसे खराब रही। वैसे ही गेहूूं की फसल की बर्बादी से किसान परेशान है। सरकारी केंद्रों में खरीद ठप है।
वहीं गेहूं के दाम 1250 रुपये क्विंटल होने से किसानों को झटका लगा। लाही का दाम 3350 रुपये, चने का 3800 रुपये व मटर का 2300 रुपये रहा। व्यापारियों का कहना है कि गेहूं की क्वालिटी बेहद घटिया है और बेहद पतला होने के चलते इसकी बाहर की मांग नहीं हो पा रही है।
बीती शाम पल्लेदार संघ के अध्यक्ष रसूल खां सहित पल्लेदारों के साथ बात करने के लिए व्यापारी रामबाबू को जिम्मेदारी सौंपी गई। पल्लेदारों की कुछ मांगे मानते हुए हड़ताल की समाप्ति की घोषणा कर दी गई। पल्लेदारों ने मंगलवार से काम शुरू कर दिया। यह सूचना पूरे क्षेत्र में पहुंचते ही मंडी में अनाज बेचने वाले किसानों का तांता लग गया।
चहल पहल के साथ गल्ला व्यवसाय रोजमर्रा की तरह सामान्य हो गया। इस हड़ताल के समाप्त होने के साथ ही अब व्यापारियों ने प्रतिदिन की तरह गल्ले के दामों की घोषणा की गई। आज गेहूं के दामों की हालत सबसे खराब रही। वैसे ही गेहूूं की फसल की बर्बादी से किसान परेशान है। सरकारी केंद्रों में खरीद ठप है।
वहीं गेहूं के दाम 1250 रुपये क्विंटल होने से किसानों को झटका लगा। लाही का दाम 3350 रुपये, चने का 3800 रुपये व मटर का 2300 रुपये रहा। व्यापारियों का कहना है कि गेहूं की क्वालिटी बेहद घटिया है और बेहद पतला होने के चलते इसकी बाहर की मांग नहीं हो पा रही है।