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कर्ज अदायगी के बाद भी बैंक ने नीलाम किया ट्रैक्टर
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Wed, 15 Apr 2015 12:33 AM IST
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18 किसानों को कर्जदार बताकर बैंक की ओर से उनके ट्रैक्टरों की कराई गई
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नीलामी में एक किसान ऐसा भी है जिसने ट्रैक्टर का पूरा कर्ज अदा करने का
दावा किया है। बावजूद इसके उसका ट्रैक्टर इस वजह से नीलाम कर दिया गया
क्योंकि जब्त किए गए ट्रैक्टर के रखरखाव का खर्च नहीं दे सका था। बिना
सूचना के ट्रैक्टर नीलाम करने पर किसान ने रोष जताया है। अमर उजाला के
सक्षम उसने ऋण भुगतान की पासबुक पेश की है। ट्रैक्टर नीलाम होने से आहत
किसान ने आत्महत्या की धमकी दी है।
वर्ष 1995 में हमीरपुर से अलग होकर महोबा नया जनपद बना। मौदहा तहसील क्षेत्र के 21 गांव कई सालों तक जिला हमीरपुर से संबद्ध रहे। इसी दौरान चिचारा गांव निवासी विजय सिंह ने स्टेट बैंक आफ इंडिया मौदहा शाखा से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा था। बताया कि ट्रैक्टर का ऋण फसल खराब होने के चलते लगातार नहीं जमा कर सका।
लेकिन सरकार की एक मुश्त समाधान योजना लागू होने पर उसे नोटिस भेजा गया। इस पर उसने 14 मार्च 2015 को 15 हजार रुपये जमाकर इस योजना का लाभ लेने को बैंक में पंजीकरण कराया। 31 मार्च 2015 को उसे योजना का लाभ देते हुए 3.85 लाख के मूलधन में 40 प्रतिशत छूट देकर 2,15,765 रुपये जमा करने के लिए कहा गया।
इस पर उसने 6 बीघा पैतृक खेती बेचकर सारा बकाया अदा कर दिया। इसके बाद जब किसान ने ट्रैक्टर मांगा तो बैंक अधिकारियों ने उससे 16 माह तक ट्रैक्टर का रखरखाव करने का चार्ज 48 हजार रुपये और मांगे। यह बात योजना का लाभ लेने के दौरान नहीं बताई गई थी।
इस वजह से वह पैसे का इंतजाम नहीं कर सका। बावजूद इसके वह पैसों का इंतजाम कर था किंतु बिना नोटिस के ही उसका ट्रैक्टर महज 13 दिन में नीलाम कर दिया गया। विजय सिंह ने कहाकि वह बैंक अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट जाएगा।
वर्ष 1995 में हमीरपुर से अलग होकर महोबा नया जनपद बना। मौदहा तहसील क्षेत्र के 21 गांव कई सालों तक जिला हमीरपुर से संबद्ध रहे। इसी दौरान चिचारा गांव निवासी विजय सिंह ने स्टेट बैंक आफ इंडिया मौदहा शाखा से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा था। बताया कि ट्रैक्टर का ऋण फसल खराब होने के चलते लगातार नहीं जमा कर सका।
लेकिन सरकार की एक मुश्त समाधान योजना लागू होने पर उसे नोटिस भेजा गया। इस पर उसने 14 मार्च 2015 को 15 हजार रुपये जमाकर इस योजना का लाभ लेने को बैंक में पंजीकरण कराया। 31 मार्च 2015 को उसे योजना का लाभ देते हुए 3.85 लाख के मूलधन में 40 प्रतिशत छूट देकर 2,15,765 रुपये जमा करने के लिए कहा गया।
इस पर उसने 6 बीघा पैतृक खेती बेचकर सारा बकाया अदा कर दिया। इसके बाद जब किसान ने ट्रैक्टर मांगा तो बैंक अधिकारियों ने उससे 16 माह तक ट्रैक्टर का रखरखाव करने का चार्ज 48 हजार रुपये और मांगे। यह बात योजना का लाभ लेने के दौरान नहीं बताई गई थी।
इस वजह से वह पैसे का इंतजाम नहीं कर सका। बावजूद इसके वह पैसों का इंतजाम कर था किंतु बिना नोटिस के ही उसका ट्रैक्टर महज 13 दिन में नीलाम कर दिया गया। विजय सिंह ने कहाकि वह बैंक अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट जाएगा।