{"_id":"58b9a5514f1c1b214e831848","slug":"49-investigation-targets-of-the-illegal-leasing-of-murng","type":"story","status":"publish","title_hn":" मौरंग के 49 अवैध पट्टे जांच के निशाने पर ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मौरंग के 49 अवैध पट्टे जांच के निशाने पर
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Fri, 03 Mar 2017 10:48 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
अवैध मौरंग खनन पर सीबीआई किसी भी समय शिकंजा कस सकती है। माना जा रहा कि यह कार्रवाई होली त्योहार के बाद तेज हो सकती है। सीबीआई जांच टीम के आने की खबर से जिले में मौरंग माफियाओं में हड़कंप मचा है। शासन के दबाव में वर्ष 2012 में किए गए 49 खनन पट्टों को उच्च न्यायालय ने
निरस्त किया गया है। साथ ही इन्हें अवैधानिक मानते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी। ऐसे में पट्टा धारकों द्वारा निकाली गई मौरंग पर शुरुआती जांच हो सकती है। जिले में मौरंग का खनन बेतवा, केन व धसान नदियों में किया गया। मनमानी तरीके से जिले में बीते 31 मई 2012 के बाद 49 खनन
पट्टों की स्वीकृति दी गई। इस मामले में हमीरपुर के विवेक नगर निवासी विजय द्विवेदी ने उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर की। जिसमें कहा कि पट्टों को अवैधानिक रूप से स्वीकृत किया गया है। जनहित याचिकाकर्ता ने खनन पट्टों पर भ्रष्टाचार का बोलबाला बताया। ओवर लोड से ट्रकों से जिले की सड़कें
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पूरी तरह ध्वस्त होने की बात कही। पुलों के क्षतिग्रस्त होने के साथ नदियों की जलधारा को रोकना बताया गया। नदियों में लिफ्टर व पोकलैंड से खनन किया जाता रहा है। नदियों में बाढ़ तो आई लेकिन जलधारा से मशीनों के जरिए निकाली गई मौरंग से भारी भरकम गड्ढे हो गए हैं। जो अवैध खनन की तरफ इशारा कर रहे हैं। फिलहाल जिले में सीबीआई कभी भी आ सकती है। इसे लेकर मौरंग व्यवसाय से जुड़े माफियाओं में हड़कंप मचा है।
उच्च न्यायालय इन पट्टों को माना अवैध
हरिहर मिनरल्स व सुरेश कुमार मिश्रा के पांच-पांच, दिनेश कुमार व मालती मिश्रा के तीन-तीन, जितेंद्र मोहन धावन, राकेश कुमार दीक्षित, देवनारायण
दीक्षित, हरिशचंद्र, रमेश कुमार, मदनपाल सिंह, राजेश कुमार साहू के दो-दो पट्टे व प्रमोद कुमार, विनोद कुमार, अशोक कुमार, प्रेमनाथ शर्मा, रबियाबेगम, घनश्याम अनुरागी, हर्षबर्धन शुक्ला, माया दीक्षित कौशल्या चौबे, राकेश अग्रवाल, मुन्नीलाल अग्रवाल, बृजमोहन सिंह, शिवराम, गोपीकृष्ण ओमर, मोतीबाई, सुनील कुमार, नीरजा सिंह एक-एक पट्टे अवैध माने गए।
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निरस्त किया गया है। साथ ही इन्हें अवैधानिक मानते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी। ऐसे में पट्टा धारकों द्वारा निकाली गई मौरंग पर शुरुआती जांच हो सकती है। जिले में मौरंग का खनन बेतवा, केन व धसान नदियों में किया गया। मनमानी तरीके से जिले में बीते 31 मई 2012 के बाद 49 खनन
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पट्टों की स्वीकृति दी गई। इस मामले में हमीरपुर के विवेक नगर निवासी विजय द्विवेदी ने उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर की। जिसमें कहा कि पट्टों को अवैधानिक रूप से स्वीकृत किया गया है। जनहित याचिकाकर्ता ने खनन पट्टों पर भ्रष्टाचार का बोलबाला बताया। ओवर लोड से ट्रकों से जिले की सड़कें
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पूरी तरह ध्वस्त होने की बात कही। पुलों के क्षतिग्रस्त होने के साथ नदियों की जलधारा को रोकना बताया गया। नदियों में लिफ्टर व पोकलैंड से खनन किया जाता रहा है। नदियों में बाढ़ तो आई लेकिन जलधारा से मशीनों के जरिए निकाली गई मौरंग से भारी भरकम गड्ढे हो गए हैं। जो अवैध खनन की तरफ इशारा कर रहे हैं। फिलहाल जिले में सीबीआई कभी भी आ सकती है। इसे लेकर मौरंग व्यवसाय से जुड़े माफियाओं में हड़कंप मचा है।
उच्च न्यायालय इन पट्टों को माना अवैध
हरिहर मिनरल्स व सुरेश कुमार मिश्रा के पांच-पांच, दिनेश कुमार व मालती मिश्रा के तीन-तीन, जितेंद्र मोहन धावन, राकेश कुमार दीक्षित, देवनारायण
दीक्षित, हरिशचंद्र, रमेश कुमार, मदनपाल सिंह, राजेश कुमार साहू के दो-दो पट्टे व प्रमोद कुमार, विनोद कुमार, अशोक कुमार, प्रेमनाथ शर्मा, रबियाबेगम, घनश्याम अनुरागी, हर्षबर्धन शुक्ला, माया दीक्षित कौशल्या चौबे, राकेश अग्रवाल, मुन्नीलाल अग्रवाल, बृजमोहन सिंह, शिवराम, गोपीकृष्ण ओमर, मोतीबाई, सुनील कुमार, नीरजा सिंह एक-एक पट्टे अवैध माने गए।