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मेडिकल कॉलेज में भिड़े डॉक्टर और तीमारदार 

Wed, 09 Mar 2016 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Wed, 09 Mar 2016 01:36 AM IST
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ruckus between doctor and labourer in gorakhpur medical college
इलाज को लेकर मे‌डिकल कॉलेज में जू‌नियर डॉक्टरों और तीमारदारों में मारपीट हुई। - फोटो : file photo
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और तीमारदारों की बीच होने वाली मारपीट की फेहरिस्त में मंगलवार को एक और कड़ी जुड़ गई। कॉलेज के ऑर्थोपेडिक विभाग की ओपीडी में एक बार फिर जूनियर डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच भिड़ंत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस को देखकर मरीज के साथी मजदूर तीमारदारों में भगदड़ मच गई। इस दौरान दो मजदूरों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
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कॉलेज परिसर में 500 बेड के बाल संस्थान का निर्माण हो रहा है। मंगलवार को निर्माण कार्य के दौरान वेहिकल लिफ्ट पर सवार जाहिद नाम का लिफ्टमैन नीचे गिर पड़ा। उसके सिर और पैर में चोट लगने पर वहां मौजूद मजदूर और सुपरवाइजर उसे ट्रॉमा सेंटर ले गए। वहां डॉक्टरों ने उन्हें ऑर्थोपेडिक ओपीडी में जाने की सलाह दी। आनन-फानन में तीमारदार जाहिद को ट्रॉमा सेंटर में ही छोड़कर ऑर्थोपेडिक ओपीडी में चले गए और घायल को पहले दिखाने को लेकर हंगामा करने लगे।
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इस बीच किसी जूनियर डॉक्टर से उनकी कहासुनी शुरू हो गई। बात हाथापाई तक पहुंच गई। डॉक्टरों और मजदूरों के बीच विवाद की सूचना मिलते ही बाल संस्थान में काम कर रहे दर्जनों मजदूर भी वहां आ गए और हंगामा करने लगे। शोर सुनकर विभागाध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान भी अपने कक्ष से बाहर आ गए और माहौल बिगड़ता देखकर 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दे दी।
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सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची तो मजदूरों में भगदड़ मच गई और देखते ही देखते सभी मजदूर वहां से फरार हो गए। इस बीच दो मजदूर पुलिस के हाथ लग गए। उधर, घायल जाहिद को कुछ जिम्मेदारों ने कॉलेज के बाहर एक प्राइवेट संस्थान की राह दिखा दी।

ऑर्थोपेडिक ओपीडी में विवाद की सूचना तो मिली है, लेकिन इसे लेकर किसी तरह की लिखित शिकायत नहीं हुई है। लिखित शिकायत मिलने पर जांच कराकर दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की जाएगी। यदि दोष मजदूरों का सिद्ध हुआ तो उनके खिलाफ थाने में तहरीर दी जाएगी। 
- मेजर डॉ. एमक्यू बेग, एसआईसी, मेडिकल कॉलेज

तीन महीने में तीसरा विवाद 
यूं तो डॉक्टर-तीमारदार विवाद का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन इन दिनों इसकी संख्या बढ़ गई है। अगर 2016 के परिपेक्ष्य में देखें तो अभी तीन महीने भी नहीं बीते हैं और मंगलवार को तीसरा विवाद सामने गया। 

10 जनवरी : विवाद तब हुआ जब महिला के इलाज के दौरान मौत हो जाने पर पर उसकी बेटी ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया। 
04 मार्च : मरीज ध्रुव कुमार सिंह के इलाज से संतुष्ट न होते हुए बेटी किरन ने एक जूनियर डॉक्टर को चप्पल दे मारी और तीमारदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। 
08 मार्च : बाल संस्थान के निर्माण के दौरान घायल लिफ्टमैन के इलाज को लेकर आर्थोपेडिक विभाग की ओपीडी में हंगामा। 
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