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जांच साक्ष्य जुटाने को या महज औपचारिकता!
Thu, 03 Jan 2019 12:16 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Thu, 03 Jan 2019 12:16 AM IST
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गोरखपुर। कैंपियरगंज में महिला की हत्या के बाद भी पुलिस की सुस्त चाल पर सभी हैरान हैं। पुलिस पर गंभीरता से जांच करने की जगह लीपापोती के आरोप लग रहे हैं। आमतौर पर छोटी घटना होने पर भी पुलिस फोरेंसिक टीम और डाग स्क्वॉयड के साथ पहुंचती हैं। मगर इस मामले में हत्या की पुष्टि होने के साथ ही दुष्कर्म की बात सामने आने के बावजूद ऐसा नहीं हुआ। 40 घंटे बाद बुधवार की शाम पांच बजे एक्सपर्ट मौके पर साक्ष्य जुटाने पहुंचे। वह भी तब जबकि घटनास्थल पर 100 से ज्यादा लोगों की आवाजाही हो चुकी थी। एक्सपर्ट खुद मानते हैं कि टीम तभी सटीक साक्ष्य जुटा पाती है जब घटनास्थल से छेड़छाड़ ना हुआ हो, ऐसे में 36 घंटे बाद लिए गए नमूनों से कितनी सही जांच हो पाएगी यह सवालों के घेरे में है।
सोमवार की रात हत्या की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच करने की जगह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले को शांत कराने को प्राथमिकता दी। मंगलवार को पूरे दिन पुलिस सिर्फ इस बात को साबित करने में लगी रही कि दुष्कर्म नहीं हुआ है जबकि मौके पर ना तो घटनास्थल को घेरा गया और ना ही कमरे को सील किया गया ताकि सही जांच हो सके। उधर, हत्या की खबर पर मंगलवार को आश्रम से जुड़े सौ से ज्यादा सेवादार वहां पर पहुंचे थे। बुधवार को आईजी जय नारायण सिंह के हस्तक्षेप के बाद जांच में तेजी आई।
घटनास्थल पर जितनी जल्दी फोरेंसिक और डॉग स्क्वॉयड जांच के लिए जाती है, साक्ष्य जुटाने में उतनी ही आसानी होती है। खोजी कुत्ते संदिग्ध के चिन्ह को ही सूंघकर आगे बढ़ते हैं लेकिन यदि घटनास्थल से कई लोग गुजर चुके हो तो फिर इस तरह की जांच से मदद नहीं मिल पाएगी।
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शिवपूजन यादव, रिटायर्ड सीओ
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सोमवार की रात हत्या की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच करने की जगह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले को शांत कराने को प्राथमिकता दी। मंगलवार को पूरे दिन पुलिस सिर्फ इस बात को साबित करने में लगी रही कि दुष्कर्म नहीं हुआ है जबकि मौके पर ना तो घटनास्थल को घेरा गया और ना ही कमरे को सील किया गया ताकि सही जांच हो सके। उधर, हत्या की खबर पर मंगलवार को आश्रम से जुड़े सौ से ज्यादा सेवादार वहां पर पहुंचे थे। बुधवार को आईजी जय नारायण सिंह के हस्तक्षेप के बाद जांच में तेजी आई।
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घटनास्थल पर जितनी जल्दी फोरेंसिक और डॉग स्क्वॉयड जांच के लिए जाती है, साक्ष्य जुटाने में उतनी ही आसानी होती है। खोजी कुत्ते संदिग्ध के चिन्ह को ही सूंघकर आगे बढ़ते हैं लेकिन यदि घटनास्थल से कई लोग गुजर चुके हो तो फिर इस तरह की जांच से मदद नहीं मिल पाएगी।
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