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आरटीओ दफ्तर में पासवर्ड चोरी कर बनाए गए 39 डीएल, मामला खुलने पर सभी आवेदन निरस्त किए गए

Fri, 05 Jan 2018 01:46 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Fri, 05 Jan 2018 01:46 AM IST
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39 driving license has been made after hacking password of rto office
मामला खुलने के बाद आरटीओ दफ्तर पर जुटी भीड़। - फोटो : Amar Ujala
नए साल के पहले दिन आरटीओ दफ्तर में आरआई (संभागीय निरीक्षक) का पासवर्ड चोरी कर फेल हो चुके 39 अभ्यर्थियों को पास कर लर्निंग डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) देने का मामला सामने आया है। सभी अभ्यर्थियों के आवेदन को निरस्त कर जांच शुरू करा दी गई है। इस जालसाजी में विभागीय कर्मचारियों के साथ ही प्राइवेट तौर पर रखे गए कर्मियों का हाथ होने का संदेह है। मामला पकड़ में आने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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मामला आरआई जय सिंह के ड्यूटी पर आने के बाद खुला। उन्होंने पाया कि अवकाश के दिन भी उनके पासवर्ड से लाइसेंस जारी किया गया है। आरआई का कहना है कि वह एक और दो जनवरी को अवकाश पर थे और इसी दौरान 39 डीएल उनके पासवर्ड का इस्तेमाल कर जारी किए गए। इन दो दिनों में एआरटीओ प्रशासन की ओर से कराए गए टेस्ट में कुल 128 अभ्यर्थियों शामिल हुए थे। इनमें 48 उत्तीर्ण थे, जिनका लाइसेंस एआरटीओ के पासवर्ड का इस्तेमाल कर जारी हुआ। जिन अभ्यर्थियों का डीएल बना है वे सभी पहले ही टेस्ट में फेल हो चुके थे। आरआई ने इसकी जानकारी आरटीओ को दी। 
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कुछ अहम सवाल
- दोबारा टेस्ट कराने के लिए अभ्यर्थियों ने 50 रुपये शुल्क जमा किया था, शुल्क किसने जमा किया? 
- आरआई का पासवर्ड उनके साथ काम करने वाले कर्मचारी और आईटी सेल के प्रभारी जानते थे, तो पासवर्ड किसने बताया। 
- सीसीटीवी फुटेज हकीकत सामने आ जाएगी तो जांच में देरी क्यों की जा रही है? 

पहले से चल रहा है पास करने का खेल
आरटीओ दफ्तर में फेल अभ्यर्थियों को पास करने का खेल पहले से चल रहा है। इसके पहले भी कई बार मामले सामने आए लेकिन संख्या अधिक न होने से अधिकारियों ने नजरअंदाज कर दिया। इस बार आरआई ने मामला उजागर कर दिया वरना कुछ अधिकारी इसे भी दबाने की फिराक में थे। सूत्रों की माने तो प्रति डीएल 1500 से 2000 रुपये लिए गए थे।
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लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया
लर्निंग लाइसेंस के लिए अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के 24 घंटे बाद आवेदक को ऑनलाइन टेस्ट देना होता है। टेस्ट से पहले बायोमैट्रिक हाजिरी होती है। ऑनलाइन परीक्षा में 15 सवाल पूछे जाते हैं, जिसमें 9 का सही जवाब देने पर अभ्यर्थी को उत्तीर्ण माना जाता है। फेल होने पर अभ्यर्थी सप्ताह भर बाद दोबारा परीक्षा दे सकते हैं लेकिन उन्हें दूसरी बार परीक्षा में शामिल होने के लिए बायोमैट्रिक हाजिरी से छूट दी गई है। जालसाज इसी छूट का लाभ उठाकर खेल करते हैं।


लाइसेंस अनुभाग के प्रभारी एआरटीओ प्रशासन ने संबंधित लिपिक को नोटिस देकर पूरे प्रकरण में स्पष्टीकरण मांगा गया। सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जाएगा। एआरटीओ के रिपोर्ट को मुख्यालय भेजा जाएगा और मुख्यालय से जैसा निर्देश होगा, कार्रवाई की जाएगी।
- एम अंसारी, आरटीओ

सीसीटीवी फुटेज में तीन प्राइवेट कर्मी देखे गए
 जांच में तीन प्राइवेट कर्मचारी एआरटीओ के जाने के बाद काम करते देखे गए हैं। सूत्रों की माने तो ये लोग काफी देर तक कंप्यूटर के सामने बैठे दिखे हैं। अधिकारियों को शक है कि इन्हीं कर्मचारियों ने कारनामा किया है। तीनों कर्मचारियों को पहले संविदा के तहत रखा गया था बाद में इन्हें हटा दिया गया और लिपिकों ने अपने हेल्पर के तौर पर रख लिया। अधिकारियों की मुश्किल यह है कि अगर नाम उजागर करेंगे तो हेल्पर रखने पर सवाल उठने लगेंगे। 


वीआईपी नंबर आवंटन में हुई थी टैक्सी चोरी
आरटीओ अधिकारियों का पासवर्ड चोरी कर पहले भी हेराफेरी की जा चुकी है। वर्ष 2012 में वीआईपी नंबरों के आवंटन में गोलमाल किया गया था। 64 वाहनों का रजिस्ट्रेशन कर टैक्स चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में 11 लिपिक और एक आरआई (संभागीय निरीक्षक) को सस्पेंड किया गया था। बाद में विभागीय जांच में लीपापोती कर सभी क्लीन चिट दे दिया गया था।
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