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Gonda News: पानी घटा, मगर मुश्किलें बरकरार
Fri, 21 Aug 2026 11:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 21 Aug 2026 11:18 PM IST
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गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद
उमरी बेगमगंज/विश्नोहरपुर/नवाबगंज। सरयू नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित माझा क्षेत्र में जिंदगी अभी पटरी पर नहीं लौट सकी है। कहीं गांवों के रास्ते पानी में डूबे हैं तो कहीं कटान का डर है। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और पशुओं के सामने चारे का संकट है। जिन रास्तों से पानी उतर गया है, वहां कीचड़ ने ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ा दी है।
टेपरहन पुरवा की धनराजी और गोडियाना के इंदल निषाद ने बताया कि पानी कम होने के बाद भी गांव के संपर्क मार्गों पर जलभराव है। कीचड़ और पानी के बीच ही लोगों को जरूरी काम से निकलना पड़ रहा है। दुल्लापुर के मल्लहन पुरवा जाने वाले रास्ते पर करीब एक सप्ताह से पानी भरा है। छोटे बच्चे इसी पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
दुल्लापुर की संगीता देवी कहती हैं कि रास्ते में पानी और किनारे गहरे गड्ढे के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। कई अभिभावक बच्चों को विद्यालय भेजने से भी कतरा रहे हैं। मल्लहन पुरवा के रामचरन निषाद ने बताया कि उनकी सब्जी की फसल पानी में डूबकर सड़ गई। तेल महन पुरवा के अमरेश यादव ने बताया कि पशुओं के लिए रखा चारा पानी में डूबकर नष्ट हो गया। हरा चारा मिलना मुश्किल है। पशुओं को खिलाने के लिए भूसे की तलाश करनी पड़ रही है।
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ब्योंदा माझा के सभी मजरे पानी से घिरे
ब्योंदा माझा के सभी मजरे पानी से घिरे हैं। ग्राम प्रशासक केशवराम यादव ने बताया कि यहां प्रशासन की ओर से नाव उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन भूसा, पन्नी और अन्य जरूरी सामान की जरूरत है। दत्तनगर में बाड़ी, टाड़ी और बैसिया में जलभराव से आवागमन प्रभावित है। ग्राम प्रशासक राजाराम यादव के मुताबिक, यहां पर्याप्त नाव नहीं मिल सकी हैं। कटान के कारण करीब आधा दर्जन परिवार पलायन कर चुके हैं, लेकिन उनके लिए प्रशासन से कोई व्यवस्था नहीं की गई। दुल्लापुर के ग्राम प्रशासक धनराज निषाद ने बताया कि टेढ़ी नदी के किनारे बसे मजरों के आवागमन के लिए दो सरकारी नावें लगाई गई हैं।
सड़कें टूट रहीं, कटान का भी खतरा
दत्तनगर से ब्योंदा माझा जाने वाला मुख्य मार्ग रिंग रोड के पास तेज बहाव से कटने लगा है। यहां के गंगाराम ने बताया कि लोगों को पानी से होकर ही गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने सड़क को ऊंचा कराने और बाढ़ व कटान से गांव को बचाने के लिए बंधा बनवाने की मांग की। साकीपुर के अट्ठइसा और चहलावा मजरे भी पानी से घिरे हैं। यहां ग्रामीणों के पास आने-जाने के लिए नाव ही सहारा है। महेशपुर और वजीराबाद जाने वाले रास्ते पर भी पानी भरा होने से लोग परेशान हैं।
पानी अब भी खतरे के निशान से ऊपर
गोंडा। सरयू नदी के जलस्तर में शुक्रवार सुबह गिरावट दर्ज की गई। एल्गिन ब्रिज पर नदी 106.400 मीटर दर्ज की गई, जो खतरे के निशान 106.070 मीटर से 33 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर घटने का क्रम जारी है। अयोध्या में सरयू का जलस्तर 93.010 मीटर दर्ज हुआ। यहां खतरे का निशान 92.730 मीटर है। यानी नदी 28 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार यहां भी जलस्तर घट रहा है। नदियों में कुल 2,89,165 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
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टेपरहन पुरवा की धनराजी और गोडियाना के इंदल निषाद ने बताया कि पानी कम होने के बाद भी गांव के संपर्क मार्गों पर जलभराव है। कीचड़ और पानी के बीच ही लोगों को जरूरी काम से निकलना पड़ रहा है। दुल्लापुर के मल्लहन पुरवा जाने वाले रास्ते पर करीब एक सप्ताह से पानी भरा है। छोटे बच्चे इसी पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
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दुल्लापुर की संगीता देवी कहती हैं कि रास्ते में पानी और किनारे गहरे गड्ढे के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। कई अभिभावक बच्चों को विद्यालय भेजने से भी कतरा रहे हैं। मल्लहन पुरवा के रामचरन निषाद ने बताया कि उनकी सब्जी की फसल पानी में डूबकर सड़ गई। तेल महन पुरवा के अमरेश यादव ने बताया कि पशुओं के लिए रखा चारा पानी में डूबकर नष्ट हो गया। हरा चारा मिलना मुश्किल है। पशुओं को खिलाने के लिए भूसे की तलाश करनी पड़ रही है।
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ब्योंदा माझा के सभी मजरे पानी से घिरे
ब्योंदा माझा के सभी मजरे पानी से घिरे हैं। ग्राम प्रशासक केशवराम यादव ने बताया कि यहां प्रशासन की ओर से नाव उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन भूसा, पन्नी और अन्य जरूरी सामान की जरूरत है। दत्तनगर में बाड़ी, टाड़ी और बैसिया में जलभराव से आवागमन प्रभावित है। ग्राम प्रशासक राजाराम यादव के मुताबिक, यहां पर्याप्त नाव नहीं मिल सकी हैं। कटान के कारण करीब आधा दर्जन परिवार पलायन कर चुके हैं, लेकिन उनके लिए प्रशासन से कोई व्यवस्था नहीं की गई। दुल्लापुर के ग्राम प्रशासक धनराज निषाद ने बताया कि टेढ़ी नदी के किनारे बसे मजरों के आवागमन के लिए दो सरकारी नावें लगाई गई हैं।
सड़कें टूट रहीं, कटान का भी खतरा
दत्तनगर से ब्योंदा माझा जाने वाला मुख्य मार्ग रिंग रोड के पास तेज बहाव से कटने लगा है। यहां के गंगाराम ने बताया कि लोगों को पानी से होकर ही गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने सड़क को ऊंचा कराने और बाढ़ व कटान से गांव को बचाने के लिए बंधा बनवाने की मांग की। साकीपुर के अट्ठइसा और चहलावा मजरे भी पानी से घिरे हैं। यहां ग्रामीणों के पास आने-जाने के लिए नाव ही सहारा है। महेशपुर और वजीराबाद जाने वाले रास्ते पर भी पानी भरा होने से लोग परेशान हैं।
पानी अब भी खतरे के निशान से ऊपर
गोंडा। सरयू नदी के जलस्तर में शुक्रवार सुबह गिरावट दर्ज की गई। एल्गिन ब्रिज पर नदी 106.400 मीटर दर्ज की गई, जो खतरे के निशान 106.070 मीटर से 33 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर घटने का क्रम जारी है। अयोध्या में सरयू का जलस्तर 93.010 मीटर दर्ज हुआ। यहां खतरे का निशान 92.730 मीटर है। यानी नदी 28 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार यहां भी जलस्तर घट रहा है। नदियों में कुल 2,89,165 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद

गोंडा में बाढ़ के हालात बयां करतीं तस्वीरें। संवाद