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अयोध्या की सांस्कृतिक व शास्त्रीय सीमा का होगा विकास

Tue, 05 Nov 2019 11:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2019 11:24 PM IST
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The cultural and classical boundary of Ayodhya will be developed
गोंडा। अयोध्या की 84 कोसी सांस्कृतिक सीमा में गोंडा भी है। राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ, श्रवण कुमार को दशरथ का बाण लगने के स्थान से लेकर अयोध्या व भगवान राम की मर्यादा व सांस्कृतिक विरासत को संजोने वाले अमर रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म स्थली, गुरु नरहर दास का आश्रम सहित कई ऐसे स्थल हैं जो उपेक्षित हैं। हर साल 84 कोसी परिक्रमा करने वाले संतों की पुकार होती रही।
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एक साल पहले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 84 कोसी परिक्रमा परिधि के अंतर्गत आने वाले सभी दर्शनीय स्थल के विकास के लिए करीब 6 हजार करोड़ रुपये से परियोजनाओं का शिलान्यास अयोध्या में किया था। इसमें जिले के कई दर्शनीय व सांस्कृतिक स्थल भी आते हैं।
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अयोध्या विकास के लिए शासन ने जिले की सीमा पर अभी 800 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने को कहा है। इसके लिए कसरत चल रही है। लेकिन एक साल पहले 84 कोसी सांस्कृतिक सीमा में आने वाले स्थलों के विकास व परिक्रमा मार्ग के निर्माण के लिए कार्रवाई तेज हो गई है। अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का निर्माण कराने के लिए आधारशिला रखी जा चुकी है और सर्वेक्षण का कार्य भी पूरा हो गया है।
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बस्ती के मखौड़ा धाम से अयोध्या, अंबेडकर नगर, बाराबंकी से होते हुए यह परिक्रमा मार्ग गोंडा में मुर्तिहन घाट से प्रवेश करती है। हर साल परिक्रमार्थी मुर्तिहन घाट से नाव के जरिए घाघरा पार करते हैं और गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मस्थली राजापुर सूकर खेत का दर्शन करते हैं। राजापुर से बाबा सुमिरन दास कुट्टी, नरहरदास आश्रम, पकड़ीबाद, गौहानी, रामनगर चौराहा, तुलसीपुर माझा व कल्याणपुर होते हुए यह मार्ग बस्ती के मखौड़ा फिर अयोध्या को जोड़ती है।

करीब 275 किलोमीटर मार्ग के फोर लेन निर्माण को पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। सर्वेक्षण भी पूरा हो गया है और अब निर्माण बाकी है। खास बात यह है कि इस मार्ग में आने वाले गोस्वमी तुलसीदास जी की जन्म स्थली, तुलसी मंदिर, सूकर खेत (भगवान बाराह मंदिर), पसका संगम स्थल, नरहर दास आश्रम, बाराही देवी मंदिर, बाबा सुमिरनदास कुटी, कपिलमुनि आश्रम के विकास का भी खाका खींचा जा रहा है। हालांकि बीते वर्ष हुए शिलान्यास में 151 आध्यात्मिक व सांस्कृतिक स्थलों के विकास की भी बात कही गई है।
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