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Gonda News: मरीज के लिए माता-पिता की भूमिका निभा रहीं ‘सिस्टर’
Thu, 11 May 2023 11:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 11 May 2023 11:43 PM IST
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गोंडा। डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है, लेकिन अस्पताल को घर और मरीजों को परिवार मानने वाली स्टाफ नर्सों का योगदान भी कम नहीं है। ‘सिस्टर’ कही जाने वाली नर्स मरीजों के लिए माता-पिता की भूमिका निभाती हैं। दर्द से कराहते मरीज को दवाओं के साथ अपनेपन का डोज देकर उनके चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं। जिला महिला अस्पताल में 44 स्टॉफ नर्सें अपनी सेवाएं दे रही हैं।
प्रसूताओं को मुस्कुराता देख मिट जाती थकान
हिला अस्पताल के प्रसव कक्ष में तैनात स्टॉफ नर्स अंशू दुबे ने बताया कि मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करने में उन्हें बहुत खुशी मिलती है। कभी-कभार मरीज दवा नहीं खाते तो उनकी भलाई के लिए उन्हें अभिभावक की तरह समझाना और डांटना पड़ता है। दर्द से कराहते हुए आने वाली गर्भवतियों का प्रसव के बाद मुस्कुराता हुए चेहरा देखकर सारी थकान दूर हो जाती है। वर्ष 2015 से काम कर रही हूं, सेवा का आनंद ही अलग है।
कोरोना काल में छह महीने नहीं ली छुट्टी, हो गईं संक्रमित
जिला महिला अस्पताल में सात साल से सेवारत पूनम सिंह के सेवाभाव की मिसाल दी जाती है। कोरोना संक्रमण के दौरान उन्होंने बिना छुट्टी लिए छह महीने तक मरीजों की सेवा की। पूनम ने बताया कि कोरोना संक्रमित गर्भवतियों से उनके परिवार वाले भी दूरी बनाते थे, उस वक्त वह अपनी जान की परवाह किए बिना उनका प्रसव कराने में मदद करती थीं। डॉक्टरों को पीपीई किट मिल जाती थी, लेकिन उन्होंने कई बार बिना किट पहने ही मरीज का उपचार किया है। संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने से उन्हें कोरोना हो गया।
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प्रसूताओं को मुस्कुराता देख मिट जाती थकान
हिला अस्पताल के प्रसव कक्ष में तैनात स्टॉफ नर्स अंशू दुबे ने बताया कि मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करने में उन्हें बहुत खुशी मिलती है। कभी-कभार मरीज दवा नहीं खाते तो उनकी भलाई के लिए उन्हें अभिभावक की तरह समझाना और डांटना पड़ता है। दर्द से कराहते हुए आने वाली गर्भवतियों का प्रसव के बाद मुस्कुराता हुए चेहरा देखकर सारी थकान दूर हो जाती है। वर्ष 2015 से काम कर रही हूं, सेवा का आनंद ही अलग है।
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कोरोना काल में छह महीने नहीं ली छुट्टी, हो गईं संक्रमित
जिला महिला अस्पताल में सात साल से सेवारत पूनम सिंह के सेवाभाव की मिसाल दी जाती है। कोरोना संक्रमण के दौरान उन्होंने बिना छुट्टी लिए छह महीने तक मरीजों की सेवा की। पूनम ने बताया कि कोरोना संक्रमित गर्भवतियों से उनके परिवार वाले भी दूरी बनाते थे, उस वक्त वह अपनी जान की परवाह किए बिना उनका प्रसव कराने में मदद करती थीं। डॉक्टरों को पीपीई किट मिल जाती थी, लेकिन उन्होंने कई बार बिना किट पहने ही मरीज का उपचार किया है। संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने से उन्हें कोरोना हो गया।
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