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24 स्कूल ऐसे जहां जूता मोजा व पैंट उतार कर जाना पड़ता है स्कूल
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गोंडा में रुपईडीह के प्राथमिक विद्यालय गुदगुदियापुर में भरा पानी।
- फोटो : GONDA
गोंडा। कोरोना के कारण बंद परिषदीय विद्यालय एक सितंबर से फिर गुलजार होने लगेंगे। स्कूल खुलने के बावजूद इलाके के दो दर्जन से अधिक विद्यालयों में व्याप्त जलभराव बच्चों के साथ ही शिक्षकों व अभिभावकों की मुसीबत भी बढ़ाएगा। पूरे परिसर में फैले बरसाती पानी व कीचड़ के कारण बच्चों को जूता मोजा व पैट हाथ में लेकर स्कूल में प्रवेश की परेशानी उठानी पड़ेगी।
शिक्षा क्षेत्र रुपईडीह में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक के लगभग 300 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें से दो दर्जन से अधिक विद्यालय अभी भी कायाकल्प योजना से कोसों दूर हैं। इन विद्यालयों में बरसात शुरू होते ही बच्चों व शिक्षकों का कक्षा तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
कायाकल्प योजना के तहत कई स्कूलों को सजाया व संवारा गया लेकिन स्कूल तक पहुंचने का मार्ग बहुत की खराब है। इस पर न तो ग्राम प्रधानों व न ही विभागीय अफसरों ने कभी कोई ध्यान दिया। इन स्कूलों तक जाने का रास्ता तभी ठीक कराया जाता है जब यह चुनाव के दौरान मतदान केंद्र बनते हैं।
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प्राथमिक विद्यालय गुदगुदियापुर जो वर्ष 1984 में स्थापित हुआ था। यहां पर 97 बच्चे पंजीकृत हैं और पढ़ाने को चार शिक्षक। बरसाती पानी के भराव के कारण इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों को जूता मोजा पैंट निकालकर जाना पड़ता है।
विद्यालय के चारों तरफ आवागमन का कोई रास्ता नहीं है और लगभग दो फुट पानी भरा हुआ है। ग्राम प्रधान राम नाथ मौर्या ने बताया कि पूर्व ग्राम प्रधान ने इस विद्यालय को कायाकल्प से दूर रखा और न ही विद्यालय पहुंचने तक किसी सड़क का निर्माण करवाया।
जिससे विद्यालय के चारों तरफ कीचड़ युक्त पानी आज भी भरा हुआ है। इसी तरह से कम कम्पोजिट विद्यालय बभनीसराय में पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। अध्यापक/अध्यापिकाएं आज भी विद्यालय से लगभग 100 मीटर दूर बाग में बैठते हैं।
इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी फ़िजा मिर्जा ने बताया कि जिन विद्यालय में पहुंचने का रास्ता नहीं है। वहां के ग्राम प्रधान से संपर्क किया जा रहा है। ताकि जल्द ही रास्ता बन सके। खंड विकास अधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा कि ग्राम प्रधानों से विद्यालयों के कायाकल्प के साथ रास्ता भी बनाने के लिए कहा गया है।
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शिक्षा क्षेत्र रुपईडीह में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक के लगभग 300 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें से दो दर्जन से अधिक विद्यालय अभी भी कायाकल्प योजना से कोसों दूर हैं। इन विद्यालयों में बरसात शुरू होते ही बच्चों व शिक्षकों का कक्षा तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
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कायाकल्प योजना के तहत कई स्कूलों को सजाया व संवारा गया लेकिन स्कूल तक पहुंचने का मार्ग बहुत की खराब है। इस पर न तो ग्राम प्रधानों व न ही विभागीय अफसरों ने कभी कोई ध्यान दिया। इन स्कूलों तक जाने का रास्ता तभी ठीक कराया जाता है जब यह चुनाव के दौरान मतदान केंद्र बनते हैं।
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प्राथमिक विद्यालय गुदगुदियापुर जो वर्ष 1984 में स्थापित हुआ था। यहां पर 97 बच्चे पंजीकृत हैं और पढ़ाने को चार शिक्षक। बरसाती पानी के भराव के कारण इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों को जूता मोजा पैंट निकालकर जाना पड़ता है।
विद्यालय के चारों तरफ आवागमन का कोई रास्ता नहीं है और लगभग दो फुट पानी भरा हुआ है। ग्राम प्रधान राम नाथ मौर्या ने बताया कि पूर्व ग्राम प्रधान ने इस विद्यालय को कायाकल्प से दूर रखा और न ही विद्यालय पहुंचने तक किसी सड़क का निर्माण करवाया।
जिससे विद्यालय के चारों तरफ कीचड़ युक्त पानी आज भी भरा हुआ है। इसी तरह से कम कम्पोजिट विद्यालय बभनीसराय में पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। अध्यापक/अध्यापिकाएं आज भी विद्यालय से लगभग 100 मीटर दूर बाग में बैठते हैं।
इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी फ़िजा मिर्जा ने बताया कि जिन विद्यालय में पहुंचने का रास्ता नहीं है। वहां के ग्राम प्रधान से संपर्क किया जा रहा है। ताकि जल्द ही रास्ता बन सके। खंड विकास अधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा कि ग्राम प्रधानों से विद्यालयों के कायाकल्प के साथ रास्ता भी बनाने के लिए कहा गया है।