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Gonda News: सरयू निगल गई 1200 बीघे खेत
Mon, 04 Sep 2023 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 04 Sep 2023 11:20 PM IST
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करनैलगंज में जमीन की कटान करती सरयू नदी। - संवाद
गोंडा। सरयू का जलस्तर भले ही खतरे के निशान से सवा मीटर नीचे चल गया हो मगर नदी की कटान में कमी नहीं हो रही है। खेत में लगी फसल तो बाढ़ ने तबाह कर दी। अब खेत भी कटकर नदी में समा रहे हैं।
बीते तीन दिन में 1200 बीघे से अधिक भूमि आठ किलोमीटर की परिधि में कटकर नदी में समाहित हो चुकी है। गनीमत है कि यह कटान बांध से काफी दूरी हो रही है अन्यथा बांध के लिए खतरा हो जाता। एल्गिन-चरसड़ी बांध से काफी दूरी पर जिन किसानों की जमीन नदी और बांध के बीच में थी अब वह जमीन कटकर नदी की धारा में प्रवाहित हो चुकी है। उस पर धान, गन्ना, मक्का एवं सब्जी की फैसलें लगी थीं। जो करीब एक सप्ताह पहले सरयू के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने से तबाह हो चुकी हैं।
वहीं जैसे-जैसे नदी का जलस्तर घट रहा है वैसे-वैसे किसानों की जमीन भी कटती जा रही है। ग्राम बांसगांव, चंदापुर किटौली, माझा रायपुर, नैपुरा, पारा, बेहटा गांव की जमीन में लगातार कटान हो रही है। सोमवार को सरयू में पानी का डिस्चार्ज एक लाख पांच हजार 869 क्यूसेक रहा। जलस्तर घटने से किसान परेशान हैं। बाढ़ खंड के अवर अभियंता रवि वर्मा ने बताया कि नदी और बांध के बीच काफी दूरी है। ऐसे में बांध के लिए कोई खतरा नहीं है।
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नवाबगंज क्षेत्र के माझाराठ गांव के कुछ लोगों द्वारा बाढ़ राहत सामग्री वितरण में की गई धांधली की शिकायत फर्जी पाई गई है। मामले में तरबगंज उपजिलाधिकारी भारत भार्गव ने जांच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपी है। शुक्रवार को नगर पालिका के मैरिज हाॅल में बाढ़ प्रभावित गांव माझाराठ के लोगों को राहत सामग्री किट बांटी गई थी। कुछ लोगों ने किट न मिलने पर धांधली का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी। रविवार को उपजिलाधिकारी भारत भार्गव ने टीम के साथ गांव जाकर मामले की जांच की। उन्होंने बताया कि चुनावी रंजिश के चलते माहौल खराब करने की नियत से कुछ लोगों द्वारा जान-बूझकर झूठी शिकायत की गई थी। भगदड़ के चलते राहत किट वितरण रोक दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश शिकायतकर्ता एक ही परिवार के सदस्य थे। कुछ लोग भगदड़ के चलते किट नहीं प्राप्त कर सके थे उन्हें जल्द किट दी जाएगी।
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बीते तीन दिन में 1200 बीघे से अधिक भूमि आठ किलोमीटर की परिधि में कटकर नदी में समाहित हो चुकी है। गनीमत है कि यह कटान बांध से काफी दूरी हो रही है अन्यथा बांध के लिए खतरा हो जाता। एल्गिन-चरसड़ी बांध से काफी दूरी पर जिन किसानों की जमीन नदी और बांध के बीच में थी अब वह जमीन कटकर नदी की धारा में प्रवाहित हो चुकी है। उस पर धान, गन्ना, मक्का एवं सब्जी की फैसलें लगी थीं। जो करीब एक सप्ताह पहले सरयू के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने से तबाह हो चुकी हैं।
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वहीं जैसे-जैसे नदी का जलस्तर घट रहा है वैसे-वैसे किसानों की जमीन भी कटती जा रही है। ग्राम बांसगांव, चंदापुर किटौली, माझा रायपुर, नैपुरा, पारा, बेहटा गांव की जमीन में लगातार कटान हो रही है। सोमवार को सरयू में पानी का डिस्चार्ज एक लाख पांच हजार 869 क्यूसेक रहा। जलस्तर घटने से किसान परेशान हैं। बाढ़ खंड के अवर अभियंता रवि वर्मा ने बताया कि नदी और बांध के बीच काफी दूरी है। ऐसे में बांध के लिए कोई खतरा नहीं है।
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नवाबगंज क्षेत्र के माझाराठ गांव के कुछ लोगों द्वारा बाढ़ राहत सामग्री वितरण में की गई धांधली की शिकायत फर्जी पाई गई है। मामले में तरबगंज उपजिलाधिकारी भारत भार्गव ने जांच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपी है। शुक्रवार को नगर पालिका के मैरिज हाॅल में बाढ़ प्रभावित गांव माझाराठ के लोगों को राहत सामग्री किट बांटी गई थी। कुछ लोगों ने किट न मिलने पर धांधली का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी। रविवार को उपजिलाधिकारी भारत भार्गव ने टीम के साथ गांव जाकर मामले की जांच की। उन्होंने बताया कि चुनावी रंजिश के चलते माहौल खराब करने की नियत से कुछ लोगों द्वारा जान-बूझकर झूठी शिकायत की गई थी। भगदड़ के चलते राहत किट वितरण रोक दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश शिकायतकर्ता एक ही परिवार के सदस्य थे। कुछ लोग भगदड़ के चलते किट नहीं प्राप्त कर सके थे उन्हें जल्द किट दी जाएगी।