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11 हजार शस्त्र लाइसेंसों की पड़ताल में जुटी 17 थानों की पुलिस

Mon, 01 Mar 2021 10:35 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 10:35 PM IST
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Police engaged in investigation of 11 thousand arms licenses
गोंडा। अब शस्त्र लाइसेंसों की पड़ताल एक बार फिर होगी और तीन लाइसेंसधारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी। एक शस्त्र लाइसेंस उन्हें वापस करना होगा। इसके साथ ही आपराधिक व्यक्तियों के लाइसेंस निलंबित होंगे। इसके लिए 17 थानों की पुलिस पूरी कुंडली तैयार कर रही है।
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करीब 11 हजार शस्त्र लाइसेंसों की छानबीन हो रही है। चुनाव में शस्त्रों के दुरुपयोग को रोकने के लिए पुलिस की तरफ से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हर थाने में लेखाजोखा तैयार हो रहा है।
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चुनाव हों या त्यौहार, शस्त्र लाइसेंसधारियों को सूचीबद्ध करके उन्हें नियमों की जानकारी देने की कवायद होती है। चुनाव में बूथों पर कोई विपरीत स्थिति न बनने पाए, इसके लिए पुलिस ने भी कमर कस ली है।
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अब पुलिस की निगाहें विवाद करने वालों के साथ ही चुनाव में ताल ठोंकने या फिर समर्थकों पर भी है। उनमें कितने लोगों के पास कितने और किस प्रकार के लाइसेंस हैं, इसकी खोज खबर ली जा रही है।
17 थानों के करीब 100 उपनिरीक्षकों के साथ ही 200 पुलिस कर्मियों को इस काम में लगाया गया है। अपने हल्के के लोगों को नियमों की जानकारी देने और उनसे ब्यौरा एकत्र करने का काम पुलिस ने शुरू कर दिया है।
कई थानों में तो बैठक करके भी लोगों को समय से शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण कराने और जमा कराने के बारे में बताया जा रहा है। जिन लोगों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके तीन- तीन शस्त्र लाइसेंस हासिल किए हैं उनके बारे में पता किया जा रहा है। उनके एक लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।
चुनाव में शस्त्र के दुरुपयोग की सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं। दो सौ से अधिक शस्त्र लाइसेंस निरस्त भी किए जा सकते हैं। चुनावी रंजिश में बीते पंचायत चुनाव 2015 में शामिल लोगों के साथ ही ऐसे लोगों के शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित हो सकते हैं जो विवाद में शामिल रहे हैं।
इसके अलावा बीते पांच सालों में पंचायतों में विवाद करने वालों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। इनके पास अगर शस्त्र हैं तो उसे निलंबित किए जाने की संस्तुति थाने से होगी। इसके बाद जिलाधिकारी के स्तर से निर्णय होगा।

गांवों में माहौल बेहतर बनाए रखने के लिए सिपाही व चौकीदारों को जानकारी दी गई है। गांवों में आरक्षण तय होने या फिर चुनावी माहौल में हर तरह की गतिविधि के बारे में थाने को सीधे जानकारी होगी। इसकी मॉनीटरिंग चारो सर्किल के पुलिस उपाधीक्षक करेंगे और पुलिस अधीक्षक को जानकारी देते रहेंगे। किसी भी गड़बड़ी पर कार्रवाई होगी और गांवों के माहौल को ठीक रखने की कवायद होगी।
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