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कोरोना संक्रमण से एक की मौत, 13 संक्रमित
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गोंडा के पंतनगर में टीका लगवाता युवा।
- फोटो : GONDA
गोंडा। कोरोना संक्रमण से शनिवार को एक व्यक्ति की मौत हो गई है तथा 13 लोग कोराना संक्रमित पाए गए। जिसके साथ ही कोराना से मरने वालों की संख्या 237 हो गई है। फिलहाल बीते दिनों से कोरोना संक्रमण में कमी आई है।
वहीं कोरोना संक्रमण से रिकवरी दर में भी सुधार हुआ है। अब रिकवरी दर बढ़कर 96.69 फीसदी हो गई है। शनिवार को 17 लोगों ने कोरोना से जंग जीत लिया है। इसके अलावा नए संक्रमितों में अधिकतर को होम आइसोलेशन में ही रखा गया है।
अब अस्पतालों में कोरोना के 20 मरीज ही भर्ती हैं। जिनका इलाज हो रहा है। जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या भी घटकर 162 लोग ही बचे हैं। जिसमें 142 होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. देवराज ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आई है, लोगों की सर्तकता के कारण ऐसा संभव हुआ है। लोग यदि कोविड प्रोटोकाल का पालन करें और टीकाकरण कराएं तो संभव है जिला कोरोना मुक्त जल्द ही हो जाएगा।
फिलहाल उन्होने बताया कि अब तक जिले में 18 से 44 आयु वर्ग के 60135 लोगों को टीका लगाया गया है, वहीं 45 से अधिक आयु वालों के 2 लाख 18 हजार 513 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। टीकाकरण अभियान चल रहा है और जल्द ही अधिक से अधिक लोगों को टीका लगा दिया जाएगा। टीकाकरण कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने में कारगर सिद्व होगा।
कोविड-19 के दौरान अनाथ हुए बच्चों के नाम बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड होने के बाद उसे मीडिया के जरिए सार्वजनिक किये जाने पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है।
इस स्थिति पर तत्काल रोक लगाने के साथ ही संबंधित परिवारों की काउंसलिंग करने व इससे संबंधित रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर बाल आयोग को प्रेषित करने के लिए कहा है। यह जानकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने दी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने आयोग द्वारा भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के संज्ञान में आया है कि बाल स्वराज पोर्टल पर डाटा अपलोड होने के पश्चात कोविड-19 के दौरान प्रभावित, अनाथ हुए बच्चों की पहचान एकत्र कर अपने-अपने पोर्टल पर अपलोड व व्हाट्सएप ग्रुप में सार्वजनिक किया जा रहा है।
इस प्रकार से पहचान सार्वजनिक होने से अनाथ हुए बच्चों को उपेक्षित करने के साथ-साथ जेजे एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा है। असामाजिक लोगों, बाल तस्करी करने वाले समूहों, भिक्षावृत्ति समूहों व अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के द्वारा कभी भी ऐसे बच्चों का उपयोग समाज में गलत तरीके से किया जा सकता है।
जनपदों में गठित जिला टास्क फोर्स, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति, ग्राम बाल संरक्षण समिति, निगरानी समिति के द्वारा अनाथ व एकल बच्चों की सूचना को वायरल होने से रोकने को कहा है।
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वहीं कोरोना संक्रमण से रिकवरी दर में भी सुधार हुआ है। अब रिकवरी दर बढ़कर 96.69 फीसदी हो गई है। शनिवार को 17 लोगों ने कोरोना से जंग जीत लिया है। इसके अलावा नए संक्रमितों में अधिकतर को होम आइसोलेशन में ही रखा गया है।
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अब अस्पतालों में कोरोना के 20 मरीज ही भर्ती हैं। जिनका इलाज हो रहा है। जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या भी घटकर 162 लोग ही बचे हैं। जिसमें 142 होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. देवराज ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आई है, लोगों की सर्तकता के कारण ऐसा संभव हुआ है। लोग यदि कोविड प्रोटोकाल का पालन करें और टीकाकरण कराएं तो संभव है जिला कोरोना मुक्त जल्द ही हो जाएगा।
फिलहाल उन्होने बताया कि अब तक जिले में 18 से 44 आयु वर्ग के 60135 लोगों को टीका लगाया गया है, वहीं 45 से अधिक आयु वालों के 2 लाख 18 हजार 513 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। टीकाकरण अभियान चल रहा है और जल्द ही अधिक से अधिक लोगों को टीका लगा दिया जाएगा। टीकाकरण कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने में कारगर सिद्व होगा।
कोविड-19 के दौरान अनाथ हुए बच्चों के नाम बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड होने के बाद उसे मीडिया के जरिए सार्वजनिक किये जाने पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है।
इस स्थिति पर तत्काल रोक लगाने के साथ ही संबंधित परिवारों की काउंसलिंग करने व इससे संबंधित रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर बाल आयोग को प्रेषित करने के लिए कहा है। यह जानकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने दी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने आयोग द्वारा भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के संज्ञान में आया है कि बाल स्वराज पोर्टल पर डाटा अपलोड होने के पश्चात कोविड-19 के दौरान प्रभावित, अनाथ हुए बच्चों की पहचान एकत्र कर अपने-अपने पोर्टल पर अपलोड व व्हाट्सएप ग्रुप में सार्वजनिक किया जा रहा है।
इस प्रकार से पहचान सार्वजनिक होने से अनाथ हुए बच्चों को उपेक्षित करने के साथ-साथ जेजे एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा है। असामाजिक लोगों, बाल तस्करी करने वाले समूहों, भिक्षावृत्ति समूहों व अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के द्वारा कभी भी ऐसे बच्चों का उपयोग समाज में गलत तरीके से किया जा सकता है।
जनपदों में गठित जिला टास्क फोर्स, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति, ग्राम बाल संरक्षण समिति, निगरानी समिति के द्वारा अनाथ व एकल बच्चों की सूचना को वायरल होने से रोकने को कहा है।