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Gonda News: जिंदगी की जद्दोजहद में कांप रहा था दिल
Sat, 20 Jul 2024 03:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 20 Jul 2024 03:09 AM IST
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-चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसा, सवार यात्री कभी भूल नहीं सकेंगे वह खौफनाक मंजर
-प्रत्यक्षदर्शियों और रेल यात्रियों की जुबानी, हादसे की कहानी
मनकापुर/गोंडा। चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने का मंजर याद करके यात्री सिहर उठ रहे हैं। हादसे के बाद हर किसी की आंखों के सामने मौत दिख रही थी। जिंदगी की जद्दोजहद में जुटे यात्रियों का दिल कांप रहा था। ट्रेन से बिहार जा रहे अजय शाह ने बताया कि एक तेज आवाज हुई और फिर बोगी पटरी से उतर गई। इसके बाद यात्री एक दूसरे से टकराते गये। सभी जान बचाने की जुगत में जुट गए।
वह कहते हैं कि जिस बोगी में हम थे, पलटकर थम गई। बहुत से लोग पानी में गिर गए। खैर हल्की चोट आई और हम सुरक्षित हैं। वातानुकूलित बोगी में सवार परमजीत सिंह कहते हैं कि हमारी बोगी के आगे के सारे डिब्बे पलट गये थे। हमारी बोगी आधी ही पलटी और फिर रुक गई। उसमें सवार काफी लोगों को चोट आई। बोगी पलटकर जहां गिरी, वहां पानी भरा हुआ था। कुछ लोग पानी में गिरे थे। उनका पता नहीं। हमारे आगे वाली बोगी के एक लड़के का पैर कट गया था। इसके अलावा 10 से ज्यादा लोग गंभीर घायल थे। हादसे के समय कुछ सूझ नहीं रहा था। किसी तरह जान बचाने के लिए सभी प्रयास कर रहे थे। एक-दूसरे की मदद भी कर रहे थे। स्थानीय लोगोें ने भी बोगियों में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की।
चल टिकट परीक्षक आशीष कुमार, बिहार के शैलेंद्र कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर के शिवकुमार पासवान, गोरखपुर की रिंकी भी हादसे को याद कर सिहर उठ जा रही हैं। शहर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती घायल नूर मोहम्मद ने बताया कि 50 हजार की सहायता मिल गई है। उसने बताया कि अंबाला से ट्रेन में सवार हुआ था। रास्ते में ट्रेन धीमे-धीमे जा रही थी। जैसे ही ट्रेन की रफ्तार तेज हुई वैसे ही यह पटरी से नीचे उतर गई। हम लोगों ने किसी तरह से अपनी जान बचाई।
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बिहार के रहने वाले शंभू कुमार ने बताया कि घर जाने के लिए ट्रेन में सवार हुआ था। रास्ते में यह हादसा हो गया। हमारा पैर टूट गया। बिहार के ही रहने वाले सौगात अंसारी ने बताया कि हादसे के बाद हम लोग अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। उसी में हमारा पैर टूट गया है। देवरिया के रहने वाले राम इकबाल ने बताया कि हादसे में हल्की चोट आई है।
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-प्रत्यक्षदर्शियों और रेल यात्रियों की जुबानी, हादसे की कहानी
मनकापुर/गोंडा। चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने का मंजर याद करके यात्री सिहर उठ रहे हैं। हादसे के बाद हर किसी की आंखों के सामने मौत दिख रही थी। जिंदगी की जद्दोजहद में जुटे यात्रियों का दिल कांप रहा था। ट्रेन से बिहार जा रहे अजय शाह ने बताया कि एक तेज आवाज हुई और फिर बोगी पटरी से उतर गई। इसके बाद यात्री एक दूसरे से टकराते गये। सभी जान बचाने की जुगत में जुट गए।
वह कहते हैं कि जिस बोगी में हम थे, पलटकर थम गई। बहुत से लोग पानी में गिर गए। खैर हल्की चोट आई और हम सुरक्षित हैं। वातानुकूलित बोगी में सवार परमजीत सिंह कहते हैं कि हमारी बोगी के आगे के सारे डिब्बे पलट गये थे। हमारी बोगी आधी ही पलटी और फिर रुक गई। उसमें सवार काफी लोगों को चोट आई। बोगी पलटकर जहां गिरी, वहां पानी भरा हुआ था। कुछ लोग पानी में गिरे थे। उनका पता नहीं। हमारे आगे वाली बोगी के एक लड़के का पैर कट गया था। इसके अलावा 10 से ज्यादा लोग गंभीर घायल थे। हादसे के समय कुछ सूझ नहीं रहा था। किसी तरह जान बचाने के लिए सभी प्रयास कर रहे थे। एक-दूसरे की मदद भी कर रहे थे। स्थानीय लोगोें ने भी बोगियों में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की।
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चल टिकट परीक्षक आशीष कुमार, बिहार के शैलेंद्र कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर के शिवकुमार पासवान, गोरखपुर की रिंकी भी हादसे को याद कर सिहर उठ जा रही हैं। शहर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती घायल नूर मोहम्मद ने बताया कि 50 हजार की सहायता मिल गई है। उसने बताया कि अंबाला से ट्रेन में सवार हुआ था। रास्ते में ट्रेन धीमे-धीमे जा रही थी। जैसे ही ट्रेन की रफ्तार तेज हुई वैसे ही यह पटरी से नीचे उतर गई। हम लोगों ने किसी तरह से अपनी जान बचाई।
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बिहार के रहने वाले शंभू कुमार ने बताया कि घर जाने के लिए ट्रेन में सवार हुआ था। रास्ते में यह हादसा हो गया। हमारा पैर टूट गया। बिहार के ही रहने वाले सौगात अंसारी ने बताया कि हादसे के बाद हम लोग अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। उसी में हमारा पैर टूट गया है। देवरिया के रहने वाले राम इकबाल ने बताया कि हादसे में हल्की चोट आई है।