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चीन ने बदल दिया तेल का पूरा खेल: बड़ा स्टॉक जमा कर बदली रणनीति, अब निर्यातक देशों पर निर्भर नहीं रहा बाजार

Sat, 19 Sep 2026 05:40 AM IST
राकेश कुमार रेबेका एफ. इलियट और कीथ ब्रैडशर, न्यूयॉर्क।
रेबेका एफ. इलियट और कीथ ब्रैडशर, न्यूयॉर्क। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 19 Sep 2026 05:40 AM IST
सार

ईरान युद्ध के बीच चीन ने बड़े तेल भंडार, विशाल रिफाइनिंग क्षमता और वैकल्पिक ऊर्जा में निवेश के दम पर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की है। दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीदार चीन ने संकट के दौरान कच्चे तेल का आयात घटाया और पुराने भंडार का इस्तेमाल किया। इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और हाईस्पीड रेल के विस्तार से तेल पर उसकी निर्भरता भी कम हुई है।
 

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China Changes Global Oil Market With Huge Stockpile And Lower Dependence On Imports
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान युद्ध ने तेल क्षेत्र में ऐसा बदलाव ला दिया है, जिसकी शायद किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी। अब तक यही नियम चलता था कि जिनके पास तेल कुएं हैं, यानी सऊदी अरब या अमेरिका जैसे निर्यातक देश ही आपूर्ति और कीमतों की चाल तय करते थे। आयातक देशों को हमेशा उनके इशारों पर नाचना पड़ता था। लेकिन चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदार होते हुए भी पूरा पासा पलट दिया है।
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चीन ने काफी मात्रा में कच्चा तेल जमा करके, शोधन क्षमता बढ़ाकर और कोयले तथा अन्य विकल्पों में निवेश करके अपनी सबसे बड़ी कमजोरी (तेल के लिए दूसरों पर निर्भर होना) को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है। अब आयातक देश अपनी मनमर्जी से तेल का बाजार नहीं चला सकते। चीन ने दिखा दिया है कि वह जब चाहे तेल खरीदकर कीमतें बढ़ा सकता है और जब चाहे खरीदारी रोककर कीमतें गिरा सकता है। इसके अलावा, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में आगे होने के कारण व अब कच्चे तेल का मोहताज भी नहीं रहा है।
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रणनीतिक ताकत का कराया अहसास
ईरान जंग के शुरुआती महीनों में चीन ने पड़ोसियों को ईंधन आपूर्ति रोक अपनी ताकत का अहसास कराया। वहीं, पश्चिम एशिया पर निर्भर अन्य देशों के पास दूसरे विकल्प नहीं थे। उन्हें या तो ऊर्जा इस्तेमाल घटाना पड़ा या भारी कीमत चुकानी पड़ी।
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तीन तरीकों से खुद को बनाया आत्मनिर्भर
  • विशाल रिजर्व : जब तेल सस्ता था, तब चीन ने चुपचाप भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदकर अपने गोदामों में भर लिया। आज दुनिया के कुल ज्ञात आपातकालीन तेल भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेला चीन के पास है।
  • मौके का फायदा : दुनियाभर में तेल की किल्लत हुई तो चीन ने अपने पुराने स्टॉक का इस्तेमाल शुरू किया और आयात 23% घटा दिया। तेल कीमतें काबू में रहीं। चीन ने साबित कर दिया कि अगर वो खरीदना बंद कर दें, तो तेल बेचने वाले संकट में आ जाएंगे।

ईंधन बना कूटनीतिक हथियार 
चीन के पास उसे पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन में बदलने की सबसे बड़ी फैक्ट्रियां भी हैं। युद्ध के समय उसने अपने पड़ोसी देशों को डीजल-पेट्रोल की सप्लाई रोक दी। वियतनाम जैसे करीबी दोस्तों को ईंधन दिया लेकिन फिलीपींस और ऑस्ट्रेलिया को आपूर्ति रोक दी।


मांग घटाकर भी खुद को कर रहा मजबूत
चीन ने अपनी खपत भी घटा दी है। दूसरी तिमाही में चीन ने हर रोज 15 लाख बैरल कम तेल का इस्तेमाल किया, जो वैश्विक मांग में 1% से अधिक की गिरावट के बराबर है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, चीन में यात्री कारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अब 14 प्रतिशत है। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है और कोयले से रसायन बनाने की तकनीक भी है, जो हर देश के पास नहीं है।
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