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ऑपरेशन थिएटर में ताला, मरीज हो रहे परेशान
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गोंडा के जिला अस्पताल के ओटी में लगा ताला।
- फोटो : GONDA
गोंडा। जिला अस्पताल में के ऑपरेशन थिएटर में अव्यवस्था का ताला लगा है। मरीजों का ऑपरेशन आठ दिनों से बंद है। जिला अस्पताल के ओटी में ऑक्सीजन की पाइप लगाने का काम चल रहा है। ओटी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न कराये जाने से सस्ता इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आने वाले गरीब व मध्यम वर्ग के मरीज मजबूरन लौट कर निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम में लुटने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब 5,000 मरीज आते हैं जिसमें से करीब 10 से 15 मरीज ऐसे होते हैं जिनका ऑपरेशन होना होता है।
जिले के बाबू ईश्वर शरण जिला अस्पताल में सभी तरह के ऑपरेशन की सुविधा मुहैया है। यहां पर ऑपरेशन के लएि राजकीय शुल्क 300 रुपये से लेकर 800 रुपये निर्धारित किया गया है। मौजूदा समय में ऑपरेशन के लिए अलग-अलग बीमारी के करीब एक दर्जन चिकित्सक तैनात हैं। इसके बावजूद जिले के गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को शासकीय चिकित्सा व्यवस्था का फायदा आसानी से नहीं मिल पा रहा है। इस समय पाइप लाइन लगाने के नाम पर कई दिनों से ओटी को बंद कर आने वाले मरीजों को टरकाया जा रहा है।
काम के नाम पर कई दिन से ओटी को बंद कर कुछ डॉक्टर व निजी अस्पताल और दलालों के सिंडिकेट के साथ मिलकर खेल किया जा रहा है। काम के नाम अव्यवस्था कर मरीजों को बाहर निजी अस्पतालों का रास्ता दिखाकर उन्हें मोटी फीस के नाम पर लूटा जा रहा है। मरीजों व जानकारों ने बताया कि बाहर के अस्पतालों में एक मरीज से 20 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपये तक की वसूली पैकेज के नाम पर की जाती है।
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देखने वाली बात तो यह है कि जिला अस्पताल के ओटी में काम शुरू होने पर ऑपरेशन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। अस्पताल में इलाज कराने ऑपरेशन कराने के लिए आने वाले लोगों को चिकित्सकों व दलालों की ओर से निर्धारित ठिकानों पर भेजा जा रहा है। जिला अस्पताल के ही लोगों की माने यदि प्रशासन गोपनीय प्रशासनिक टीम गठित कर अस्पताल में व आसपास छापा मारने का अभियान चलाया जाए तो मरीजों के लूट के खेल का बड़ा खुलासा हो सकता है।
केस एक-
गंभीरावस्था में महिला को जाना पड़ा निजी अस्पताल
गोंडा। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम गौरवा जानीपुर निवासिनी राकेश कुमारी पत्नी स्व. बड़कऊ के पेट में पथरी होने के दर्द व पित्ताशय से पस निकलने का इलाज चल रहा था। उन्हें मंगलवार की रात में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सक को दिखाने पर पता चला कि महिला के गालब्लेडर का जल्द ऑपरेशन होना जरूरी है। लेकिन जिला अस्पताल के ऑपरेशन कक्ष में ताला लगा होने की वजह से ऑपरेशन नहीं हो सका। जिला अस्पताल में ऑपरेशन करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी न होने से चिकित्सक ने हाथ खड़े कर दिये। चिकित्सक ने यह भी सलाह दी कि पित्ताशय में इन्फेक्शन हो जाने की वजह से तत्काल ऑपरेशन न किया गया तो खतरा हो सकता है। जिला अस्पताल में सस्ता इलाज हो जाने की उम्मीद लेकर आये गरीब किसान को मजबूरन निजी चिकित्सालय मंहगा इलाज कराने को जाना पड़ा।
केस दो-
बेटे का ऑपरेशन न होने से वापस लौटा परिवार
गोंडा। कटरा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम रामापुर निवासी बांके अपने नौ वर्षीय बेटे के पेट में पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए लेकर आये थे। कई माह से वह जिला अस्पताल में इलाज करा रहे थे। डॉक्टर ने ऑपरेशन कराये जाने की सलाह दी थी। वह बुधवार को अस्पताल ऑपरेशन कराने आये थे। ओटी में ताला लटक रहा था। बांके ने कई लोगों से पूछा कोई जानकारी नही मिली। उनका कहना था कि डॉक्टर ने कहा था कि ऑपरेशन करना है। उन्होंने बताया कि पता चला है कि कई दिन से ऑपरेशन थिएटर बंद है। बच्चे के पेट में दर्द बढ़ता देख वह यह कह कर लौटने को मजबूर हुए कि वह अब किसी निजी अस्पताल में जाकर दिखाएंगे।
निजी अस्पतालों को मरीज हैंडओवर करने का चल रहा खेल
जिला अस्पताल में काम के बहाने करीब एक सप्ताह से ओटी बंद बतायी जा रही है। ऑक्सीजन पाइप लाइन लगाये जाने के काम के बहाने से अब जिला अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आने वाले मरीजों को कुछ चिकित्सकों व दलालों की मिली भगत से निजी हॉस्पिटल व नर्सिंगहोम को भेजे जाने का गोपनीय खेल चल रहा है। कई चिकित्सक शहर के कई निजी चिकित्सालयों में भी ऑपरेशन करने जाते हैं। जबकि जिला अस्पताल के एक सर्जन का तो बाकायदा जिला अस्पताल के ही सामने निजी नर्सिंग होम संचालित है।
जिला अस्पताल में कभी दवाओं की कमी तो कभी ऑपरेशन के लिए जरूरी संसाधन न होने के बहाना बना कर मरीजों को डरा कर उन्हें अपने निजी अस्पताल में आने के लिए मजबूर कर देते हैं। जिला अस्पताल के आपात कालीन कक्ष के बाहर नर्सिंग होम व निजी अस्पतालों के दलाल लगे रहते हैं। इसमें कई जिला अस्पताल के चिकित्सकों के भी होते हैं जो बेहतर व पक्का इलाज कराने का झांसा देकर मरीज व तीमारदारों को निजी चिकित्सालय का रास्ता दिखा रहे हैं।
ऑक्सीजन पाइप के काम की वजह से बंद है ओटी
जिला अस्पताल को ऑक्सीजन प्लांट से जोड़ने के लिए सभी वार्ड व ओटी कक्ष में पाइप लाइन लगाने का काम हो रहा है। ओटी रूम में काम शुरू होने से दो दिन पूर्व ओटी को बंद कर दिया गया है। कल के बाद ओटी खुल जाएगी। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों के ऑपरेशन में चिकित्सकों की ओर से लापरवाही बरतने की शिकायत पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अरूण लाल, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल गोंडा।
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जिले के बाबू ईश्वर शरण जिला अस्पताल में सभी तरह के ऑपरेशन की सुविधा मुहैया है। यहां पर ऑपरेशन के लएि राजकीय शुल्क 300 रुपये से लेकर 800 रुपये निर्धारित किया गया है। मौजूदा समय में ऑपरेशन के लिए अलग-अलग बीमारी के करीब एक दर्जन चिकित्सक तैनात हैं। इसके बावजूद जिले के गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को शासकीय चिकित्सा व्यवस्था का फायदा आसानी से नहीं मिल पा रहा है। इस समय पाइप लाइन लगाने के नाम पर कई दिनों से ओटी को बंद कर आने वाले मरीजों को टरकाया जा रहा है।
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काम के नाम पर कई दिन से ओटी को बंद कर कुछ डॉक्टर व निजी अस्पताल और दलालों के सिंडिकेट के साथ मिलकर खेल किया जा रहा है। काम के नाम अव्यवस्था कर मरीजों को बाहर निजी अस्पतालों का रास्ता दिखाकर उन्हें मोटी फीस के नाम पर लूटा जा रहा है। मरीजों व जानकारों ने बताया कि बाहर के अस्पतालों में एक मरीज से 20 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपये तक की वसूली पैकेज के नाम पर की जाती है।
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देखने वाली बात तो यह है कि जिला अस्पताल के ओटी में काम शुरू होने पर ऑपरेशन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। अस्पताल में इलाज कराने ऑपरेशन कराने के लिए आने वाले लोगों को चिकित्सकों व दलालों की ओर से निर्धारित ठिकानों पर भेजा जा रहा है। जिला अस्पताल के ही लोगों की माने यदि प्रशासन गोपनीय प्रशासनिक टीम गठित कर अस्पताल में व आसपास छापा मारने का अभियान चलाया जाए तो मरीजों के लूट के खेल का बड़ा खुलासा हो सकता है।
केस एक-
गंभीरावस्था में महिला को जाना पड़ा निजी अस्पताल
गोंडा। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम गौरवा जानीपुर निवासिनी राकेश कुमारी पत्नी स्व. बड़कऊ के पेट में पथरी होने के दर्द व पित्ताशय से पस निकलने का इलाज चल रहा था। उन्हें मंगलवार की रात में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सक को दिखाने पर पता चला कि महिला के गालब्लेडर का जल्द ऑपरेशन होना जरूरी है। लेकिन जिला अस्पताल के ऑपरेशन कक्ष में ताला लगा होने की वजह से ऑपरेशन नहीं हो सका। जिला अस्पताल में ऑपरेशन करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी न होने से चिकित्सक ने हाथ खड़े कर दिये। चिकित्सक ने यह भी सलाह दी कि पित्ताशय में इन्फेक्शन हो जाने की वजह से तत्काल ऑपरेशन न किया गया तो खतरा हो सकता है। जिला अस्पताल में सस्ता इलाज हो जाने की उम्मीद लेकर आये गरीब किसान को मजबूरन निजी चिकित्सालय मंहगा इलाज कराने को जाना पड़ा।
केस दो-
बेटे का ऑपरेशन न होने से वापस लौटा परिवार
गोंडा। कटरा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम रामापुर निवासी बांके अपने नौ वर्षीय बेटे के पेट में पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए लेकर आये थे। कई माह से वह जिला अस्पताल में इलाज करा रहे थे। डॉक्टर ने ऑपरेशन कराये जाने की सलाह दी थी। वह बुधवार को अस्पताल ऑपरेशन कराने आये थे। ओटी में ताला लटक रहा था। बांके ने कई लोगों से पूछा कोई जानकारी नही मिली। उनका कहना था कि डॉक्टर ने कहा था कि ऑपरेशन करना है। उन्होंने बताया कि पता चला है कि कई दिन से ऑपरेशन थिएटर बंद है। बच्चे के पेट में दर्द बढ़ता देख वह यह कह कर लौटने को मजबूर हुए कि वह अब किसी निजी अस्पताल में जाकर दिखाएंगे।
निजी अस्पतालों को मरीज हैंडओवर करने का चल रहा खेल
जिला अस्पताल में काम के बहाने करीब एक सप्ताह से ओटी बंद बतायी जा रही है। ऑक्सीजन पाइप लाइन लगाये जाने के काम के बहाने से अब जिला अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आने वाले मरीजों को कुछ चिकित्सकों व दलालों की मिली भगत से निजी हॉस्पिटल व नर्सिंगहोम को भेजे जाने का गोपनीय खेल चल रहा है। कई चिकित्सक शहर के कई निजी चिकित्सालयों में भी ऑपरेशन करने जाते हैं। जबकि जिला अस्पताल के एक सर्जन का तो बाकायदा जिला अस्पताल के ही सामने निजी नर्सिंग होम संचालित है।
जिला अस्पताल में कभी दवाओं की कमी तो कभी ऑपरेशन के लिए जरूरी संसाधन न होने के बहाना बना कर मरीजों को डरा कर उन्हें अपने निजी अस्पताल में आने के लिए मजबूर कर देते हैं। जिला अस्पताल के आपात कालीन कक्ष के बाहर नर्सिंग होम व निजी अस्पतालों के दलाल लगे रहते हैं। इसमें कई जिला अस्पताल के चिकित्सकों के भी होते हैं जो बेहतर व पक्का इलाज कराने का झांसा देकर मरीज व तीमारदारों को निजी चिकित्सालय का रास्ता दिखा रहे हैं।
ऑक्सीजन पाइप के काम की वजह से बंद है ओटी
जिला अस्पताल को ऑक्सीजन प्लांट से जोड़ने के लिए सभी वार्ड व ओटी कक्ष में पाइप लाइन लगाने का काम हो रहा है। ओटी रूम में काम शुरू होने से दो दिन पूर्व ओटी को बंद कर दिया गया है। कल के बाद ओटी खुल जाएगी। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों के ऑपरेशन में चिकित्सकों की ओर से लापरवाही बरतने की शिकायत पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अरूण लाल, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल गोंडा।