{"_id":"5e8b4a848ebc3e6f9507bf8c","slug":"high-risk-gonda-news-lko51670698","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाई रिस्क एरिया के चिन्हांकन में बरती जा रही है लापरवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाई रिस्क एरिया के चिन्हांकन में बरती जा रही है लापरवाही
विज्ञापन
गोंडा। कोरोना वायरस (कोविड-19) के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश के सभी जिलों द्वारा हाई रिस्क जनसंख्या को चिह्नित कर उनके सैंपल मेडिकल कॉलेज स्थित कोविड-19 प्रयोगशालाओं को भेजने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन गोंडा में इस मामले में लापरवाही बरती जा रही है। अभी तक भेजी गई सभी रिपोर्ट के निगेटिव आने से यहां का स्वास्थ्य विभाग रिलेक्स जोन में है। हाई रिस्क एरिया को अभी तक चिह्नित नहीं किया जा सका है।
इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा गया है कि कोविड-19 पीड़ित रोगियों और हाई रिस्क जनसंख्या को चिह्नित कर समय से जांच के लिए सैंपल भेजा जाए। जांच कर रहते उपचार करने से इस वायरस के प्रसार को रोका जा सकता है। एसीएमओ व जनपदीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. देवराज चौधरी ने बताया कि हाई रिस्क एरिया को चुनने के लिए डाटा जुटाया जा रहा है। दिल्ली के तब्लीगी जमात से निकलकर देश अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे लोगों में से कई के कोरोना पाजीटिव आने पर पूरे देश में हड़कंप मच गया। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसके बाद अचानक कोरोना के मामले बढ़ गये जिससे शासन की ओर से जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ये लापरवाही कहीं जिले के लोगों पर भारी न पड़ जाए।
बताया जा रहा है कि लाकडाउन के ठीक पहले जिले में बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेश और विदेशों से लोग आये थे। लेकिन सूचना में लापरवाही के चलते अभी भी कुछ लोगों तक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग नहीं पहुंच पाया है। जिले के कई ग्रामीण इलाकों में लोग अभी मौजूद हैं और उन्हें क्वारंटीन नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
शासन के निर्देश के बाद उस पर अमल किया जा रहा है। अभी तक कोई भी रिपोर्ट पाजीटिव नहीं आई है। लेकिन शासन के निर्देश के अनुरूप सेंपल भेजने का प्रयास किया जा रहा है। बाहर से आये लोगों का डाटा जुटाया जा रहा है। इसी से हाई रिस्क एरिया का पता लगाया जा सकेगा।
- डॉ. मधु गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा गया है कि कोविड-19 पीड़ित रोगियों और हाई रिस्क जनसंख्या को चिह्नित कर समय से जांच के लिए सैंपल भेजा जाए। जांच कर रहते उपचार करने से इस वायरस के प्रसार को रोका जा सकता है। एसीएमओ व जनपदीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. देवराज चौधरी ने बताया कि हाई रिस्क एरिया को चुनने के लिए डाटा जुटाया जा रहा है। दिल्ली के तब्लीगी जमात से निकलकर देश अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे लोगों में से कई के कोरोना पाजीटिव आने पर पूरे देश में हड़कंप मच गया। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसके बाद अचानक कोरोना के मामले बढ़ गये जिससे शासन की ओर से जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ये लापरवाही कहीं जिले के लोगों पर भारी न पड़ जाए।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि लाकडाउन के ठीक पहले जिले में बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेश और विदेशों से लोग आये थे। लेकिन सूचना में लापरवाही के चलते अभी भी कुछ लोगों तक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग नहीं पहुंच पाया है। जिले के कई ग्रामीण इलाकों में लोग अभी मौजूद हैं और उन्हें क्वारंटीन नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
शासन के निर्देश के बाद उस पर अमल किया जा रहा है। अभी तक कोई भी रिपोर्ट पाजीटिव नहीं आई है। लेकिन शासन के निर्देश के अनुरूप सेंपल भेजने का प्रयास किया जा रहा है। बाहर से आये लोगों का डाटा जुटाया जा रहा है। इसी से हाई रिस्क एरिया का पता लगाया जा सकेगा।
- डॉ. मधु गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी