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Gonda News: रिटायरमेंट के 25 दिन पहले लगा जेल जाने का दाग
Thu, 06 Jul 2023 11:25 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 06 Jul 2023 11:25 PM IST
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गोंडा के बड़गांव डाकघर में घूस लेते पकड़े गए पोस्टमास्टर को हिरासत में लेकर वाहन में बैठाने जात
गोंडा। सीबीआई की एंटी करप्शन विंग की गिरफ्त में आए रिश्वतखोरी के आरोपी बड़गांव डाकघर के पोस्टमास्टर राजाराम यादव पर रिटायरमेंट से 25 दिन पहले ही जेल जाने का दाग लग गया। एक साल पहले ही बड़गांव डाकघर शाखा में तैनाती हुई थी। 31 जुलाई को उनकी सेवानिवृत्ति होनी थी। सेवानिवृत्ति से पहले रिश्वतखोरी ने उन्हें दागदार बना दिया।
शहर के रानी बाजार के रहने वाले वीरेंद्र गुप्ता के पिता शंकरलाल गुप्ता और माता तारा देवी गुप्ता ने ज्वाइंट खाते से 50 हजार रुपये का किसान विकास पत्र लिया था। जिसकी मेच्योरिटी एक लाख की हो गई थी। माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी थी। किसान विकास पत्र में वीरेंद्र कुमार गुप्ता की पत्नी गुड़िया देवी और उसके भाई राजेंद्र गुप्ता की पत्नी पप्पी देवी उत्तराधिकारी थीं। नाॅमिनी गुड़िया देवी का आधार कार्ड में नाम पूनम देवी था। नाम का मिलान न होने से भुगतान लटका था। पोस्टमास्टर को मालूम था कि नाम सुधार के बिना भुगतान नहीं हो सकता है। इसलिए वीरेंद्र ने जब पोस्टमास्टर से संपर्क किया तो उसने नाम सुधार कराने के नाम पर एक लाख की मेच्योरिटी कराने के लिए उनसे 12500 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
मेच्योरिटी से संबंधित सारे अभिलेख देने के बाद भी पोस्टमास्टर भुगतान नहीं करा रहा था। वीरेंद्र कुमार गुप्ता पिछले दो साल से डाकघर का चक्कर लगा रहे थे। मगर किसी ने किसी बहाने से पोस्टमास्टर भुगतान करने पर रोक लगा देता था। आखिकार तंग आकर वीरेंद्र ने सीबीआई का सहारा लिया।
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शहर के रानी बाजार के रहने वाले वीरेंद्र गुप्ता के पिता शंकरलाल गुप्ता और माता तारा देवी गुप्ता ने ज्वाइंट खाते से 50 हजार रुपये का किसान विकास पत्र लिया था। जिसकी मेच्योरिटी एक लाख की हो गई थी। माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी थी। किसान विकास पत्र में वीरेंद्र कुमार गुप्ता की पत्नी गुड़िया देवी और उसके भाई राजेंद्र गुप्ता की पत्नी पप्पी देवी उत्तराधिकारी थीं। नाॅमिनी गुड़िया देवी का आधार कार्ड में नाम पूनम देवी था। नाम का मिलान न होने से भुगतान लटका था। पोस्टमास्टर को मालूम था कि नाम सुधार के बिना भुगतान नहीं हो सकता है। इसलिए वीरेंद्र ने जब पोस्टमास्टर से संपर्क किया तो उसने नाम सुधार कराने के नाम पर एक लाख की मेच्योरिटी कराने के लिए उनसे 12500 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
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मेच्योरिटी से संबंधित सारे अभिलेख देने के बाद भी पोस्टमास्टर भुगतान नहीं करा रहा था। वीरेंद्र कुमार गुप्ता पिछले दो साल से डाकघर का चक्कर लगा रहे थे। मगर किसी ने किसी बहाने से पोस्टमास्टर भुगतान करने पर रोक लगा देता था। आखिकार तंग आकर वीरेंद्र ने सीबीआई का सहारा लिया।
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