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Gonda News: अब आसान नहीं होगी इंटर कॉलेज की मान्यता
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गोंडा। यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालय खोलना अब आसान नहीं होगा। इसके लिए लोगों को अब संसाधनों का और इंतजाम करना होगा। शहरी क्षेत्र में विद्यालय खोलने के लिए तीन हजार वर्ग मीटर जमीन जरूरी होगी, जो कि पहले 650 वर्ग मीटर ही थी। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में छह हजार वर्ग मीटर जमीन जरूरी होगी, जो पहले दो हजार वर्ग मीटर थी।
इसके अलावा धरोहर राशि में भी कई गुना बढ़ोतरी की गई है। साथ ही स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर क्लास व विभिन्न संसाधन होना भी जरूरी किया गया है। हाईस्कूल की नवीन मान्यता के लिए जमानत कोष के रूप में पांच लाख रुपये केवल विद्यालय के नाम जमा के साथ अधिकारी के पदनाम में बंधक होंगे। पहले यह धनराशि 15 हजार रुपये ही थी। इसके अलावा स्कूल के सुरक्षित कोष के रूप में डेढ़ लाख रुपये जमा होंगे, जबकि पहले मात्र तीन हजार रुपये निर्धारित था। स्कूल में ऑडियो वीडियो प्रोजेक्टर, बड़ी स्क्रीन की एलईडी टीवी की व्यवस्था स्मार्ट क्लास में व कंप्यूटर कक्ष में 25 कंप्यूटर का इंतजाम करना होगा।
शहरी क्षेत्र की कुल 3000 वर्ग मीटर विद्यालय भूमि में 1000 वर्ग मीटर और ग्रामीण क्षेत्र की 6000 वर्ग मीटर भूमि में 2000 वर्ग मीटर भूमि का क्रीड़ास्थल होगा। क्रीड़ा स्थल में एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, लॉन टेनिस, ओपेन जिम्नेजियम व अन्य आउटडोर गेम्स के साथ इनडोर गेम्स व शारीरिक सौष्ठव की पर्याप्त व्यवस्था होगी। पहले ऐसी मान्यता की शर्त नहीं थी।
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छात्र संख्या के अनुरूप एक वर्ग मीटर की दर से प्रत्येक छात्र-छात्राओं के लिए कुर्सी, मेज, डेस्क-बेंच की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही प्रयोगशाला के लिए भी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। पहले की शर्त में जूनियर कक्षाओं के साथ 200 सेट सज्जा होना अनिवार्य था। शिक्षकों, कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक मशीन, वायस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरा, डीवीआर, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन, वाई-फाई के साथ ही विद्यालय की वेबसाइट जरूरी होगी।
इंटरमीडिएट के लिए अन्य शर्त भी शामिल
वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता के लिए हाईस्कूल की अनिवार्य शर्तें पूरी करने के बाद इंटरमीडिएट के संचालन के लिए कुछ अन्य शर्तें भी पूरी करनी होंगी। इसके तहत दो लाख रुपये सुरक्षित कोष में जमा करने होंगे। साथ ही विद्यालय में कक्षाओं के आधार पर भवनों को बढ़ाना होगा। नए बदलावों से स्कूल खोलने की तैयारी कर रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। कई ने पुराने मानक से तैयारी की थी। अब नए मानक से अधिक भूमि के साथ ही संसाधन करने होंगे।
निर्देशों का पालन करवाया जाएगा
राकेश कुुमार, डीआईओएस
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इसके अलावा धरोहर राशि में भी कई गुना बढ़ोतरी की गई है। साथ ही स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर क्लास व विभिन्न संसाधन होना भी जरूरी किया गया है। हाईस्कूल की नवीन मान्यता के लिए जमानत कोष के रूप में पांच लाख रुपये केवल विद्यालय के नाम जमा के साथ अधिकारी के पदनाम में बंधक होंगे। पहले यह धनराशि 15 हजार रुपये ही थी। इसके अलावा स्कूल के सुरक्षित कोष के रूप में डेढ़ लाख रुपये जमा होंगे, जबकि पहले मात्र तीन हजार रुपये निर्धारित था। स्कूल में ऑडियो वीडियो प्रोजेक्टर, बड़ी स्क्रीन की एलईडी टीवी की व्यवस्था स्मार्ट क्लास में व कंप्यूटर कक्ष में 25 कंप्यूटर का इंतजाम करना होगा।
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शहरी क्षेत्र की कुल 3000 वर्ग मीटर विद्यालय भूमि में 1000 वर्ग मीटर और ग्रामीण क्षेत्र की 6000 वर्ग मीटर भूमि में 2000 वर्ग मीटर भूमि का क्रीड़ास्थल होगा। क्रीड़ा स्थल में एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, लॉन टेनिस, ओपेन जिम्नेजियम व अन्य आउटडोर गेम्स के साथ इनडोर गेम्स व शारीरिक सौष्ठव की पर्याप्त व्यवस्था होगी। पहले ऐसी मान्यता की शर्त नहीं थी।
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छात्र संख्या के अनुरूप एक वर्ग मीटर की दर से प्रत्येक छात्र-छात्राओं के लिए कुर्सी, मेज, डेस्क-बेंच की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही प्रयोगशाला के लिए भी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। पहले की शर्त में जूनियर कक्षाओं के साथ 200 सेट सज्जा होना अनिवार्य था। शिक्षकों, कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक मशीन, वायस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरा, डीवीआर, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन, वाई-फाई के साथ ही विद्यालय की वेबसाइट जरूरी होगी।
इंटरमीडिएट के लिए अन्य शर्त भी शामिल
वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता के लिए हाईस्कूल की अनिवार्य शर्तें पूरी करने के बाद इंटरमीडिएट के संचालन के लिए कुछ अन्य शर्तें भी पूरी करनी होंगी। इसके तहत दो लाख रुपये सुरक्षित कोष में जमा करने होंगे। साथ ही विद्यालय में कक्षाओं के आधार पर भवनों को बढ़ाना होगा। नए बदलावों से स्कूल खोलने की तैयारी कर रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। कई ने पुराने मानक से तैयारी की थी। अब नए मानक से अधिक भूमि के साथ ही संसाधन करने होंगे।
निर्देशों का पालन करवाया जाएगा
राकेश कुुमार, डीआईओएस