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3.36 लाख नौनिहालों के स्वेटर के 6.70 करोड़ में गोलमाल की तैयारी
Updated Mon, 29 Oct 2018 09:48 PM IST
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जिला स्तर पर ही स्वेटर खरीदने की कोशिश्
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय में स्वेटर वितरण को लेकर पैंतरेबाजी शुरू हो गई है। 3140 स्कूलों के 3.36 लाख बच्चों के लिए शासन से स्वीकृत 6.70 करोड़ के बजट पर बड़े-बड़ों की नजर टिक गई है। बजट में गोलमाल के लिए रास्ता निकालने की कोशिश शुरू हो गई है। अभी तक स्कूल के खातों में बजट भी नहीं भेजा गया है और स्वेटर स्कूलों में पहुंचाने के लिए फर्मों के नाम तय हो गए हैं।
जनपद मेें स्वेटर हो या ड्रेस हो। इनके वितरण में खूब गोलमाल होता है। स्वेटर खरीदने का निर्णय स्कूल स्तर पर ह टेंडर और कोटेशन के बाद ही हो सकता है। लेकिन बजट के पौने सात करोड़ को गोलमाल करने के लिए जिले स्तर से फर्मों के लोगों को काम बांटने की तैयारी हो रही है।
हाल ही में फर्मों से स्वेटर के नमूनों को लेकर गुणवत्ता की छानबीन हुई जिसमें 9 फर्मों के नमूनों को वितरण के दायरे में रखे जाने की बात हुई। फिलहाल अभी अंतिम निर्णय नही हो पाया है, लेकिन बिना एसएमसी स्तर से कोई प्रस्ताव के ही जिले पर वितरण के लिए फर्मों को तय किया जाना चौंकाने वाला है।
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छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों में 50 हजार से लेकर दो लाख तक ही जाएगा। लेकिन यहां बड़ा बजट देखकर जहां लोग दूसरे दांव में जुट गए हैं वहीं फर्मों के तय करने के शोर से शिक्षक अपने स्तर से स्वेटर की खोज ही बंद कर दिए हैं।
जिले में एक ही रंग के इतनी बड़ी संख्या में एक स्थान पर ही स्वेटर मिलना मुश्किल भरा है इससे कई लोगों से लोग संपर्क करते थे। अब जनपद स्तर से हो रही कसरत से शिक्षक असमंजस्य की स्थिति में हैं।
फिलहाल स्वेटर वितरण के लिए पहली बार इस तरह की खींचतान देखने को मिल रही है। विभाग के अधिकारी कुछ ज्यादा बोलने के बजाए अंतिम निर्णय पर नजर टिकाएं हैं।
समय से वितरण की उम्मीद नहीं
स्वेटर के फर्मों को चिन्हित करने से वितरण में भी दिक्कत आएगी। जिले से फर्में एक साथ 3.36 लाख स्वेटर दे पाने में सक्षम नही दिख रही हैं। क्योंकि तत्काल भुगतान की संभावना नही है। फर्म के ही लोगों की मानें तो उनके पास चार से पांच हजार तक ही स्वेटर स्टाक में है।
ऐसे में 50 हजार से एक लाख ही स्वेटर मिल सकता है। वह भी तब जब भुगतान लगे हाथ हो जाए। लेकिन भुगतान में स्कूल के प्रधानाध्यापकों के साथ ही एसएमसी अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर होने के बाद ही हो सकता है। जिले स्तर का कोई अधिकारी भुगतान नहीं कर सकता।
शिक्षक चाह रहे जिले से ही हो जाए सीधी सप्लाई
दो सौ रुपए में गुणवत्तापूर्ण स्वेटर देने के फैसले के पक्ष में शिक्षक नहीं है। वे चाहते हैं कि किताब, जूता मोजा की तरह ही स्वेटर भी सीधे मिल जाए। इससे गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी कम होगी।
लेकिन शासन की ओर से शासनादेश में कोई बदलाव न होने से क्रय, वितरण और गुणवत्ता की जिम्मेदारी शिक्षकों पर ही है। प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष आनंद त्रिपाठी भी कहते हैं कि शिक्षकों को इस योजना से मुक्त कर दिया जाए।
अभी बजट नहीं आया है जैसे ही बजट आएगा सीधे स्कूलों के खातों में भेज दिया जाएगा। स्वेटर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फर्मोँ को चिन्हित किया गया है। अभी अंतिम निर्णय जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को लेनी है।
-विनोद जयसवाल, प्रभारी स्वेटर वितरण/ जिला समन्वयक
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गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय में स्वेटर वितरण को लेकर पैंतरेबाजी शुरू हो गई है। 3140 स्कूलों के 3.36 लाख बच्चों के लिए शासन से स्वीकृत 6.70 करोड़ के बजट पर बड़े-बड़ों की नजर टिक गई है। बजट में गोलमाल के लिए रास्ता निकालने की कोशिश शुरू हो गई है। अभी तक स्कूल के खातों में बजट भी नहीं भेजा गया है और स्वेटर स्कूलों में पहुंचाने के लिए फर्मों के नाम तय हो गए हैं।
जनपद मेें स्वेटर हो या ड्रेस हो। इनके वितरण में खूब गोलमाल होता है। स्वेटर खरीदने का निर्णय स्कूल स्तर पर ह टेंडर और कोटेशन के बाद ही हो सकता है। लेकिन बजट के पौने सात करोड़ को गोलमाल करने के लिए जिले स्तर से फर्मों के लोगों को काम बांटने की तैयारी हो रही है।
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हाल ही में फर्मों से स्वेटर के नमूनों को लेकर गुणवत्ता की छानबीन हुई जिसमें 9 फर्मों के नमूनों को वितरण के दायरे में रखे जाने की बात हुई। फिलहाल अभी अंतिम निर्णय नही हो पाया है, लेकिन बिना एसएमसी स्तर से कोई प्रस्ताव के ही जिले पर वितरण के लिए फर्मों को तय किया जाना चौंकाने वाला है।
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छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों में 50 हजार से लेकर दो लाख तक ही जाएगा। लेकिन यहां बड़ा बजट देखकर जहां लोग दूसरे दांव में जुट गए हैं वहीं फर्मों के तय करने के शोर से शिक्षक अपने स्तर से स्वेटर की खोज ही बंद कर दिए हैं।
जिले में एक ही रंग के इतनी बड़ी संख्या में एक स्थान पर ही स्वेटर मिलना मुश्किल भरा है इससे कई लोगों से लोग संपर्क करते थे। अब जनपद स्तर से हो रही कसरत से शिक्षक असमंजस्य की स्थिति में हैं।
फिलहाल स्वेटर वितरण के लिए पहली बार इस तरह की खींचतान देखने को मिल रही है। विभाग के अधिकारी कुछ ज्यादा बोलने के बजाए अंतिम निर्णय पर नजर टिकाएं हैं।
समय से वितरण की उम्मीद नहीं
स्वेटर के फर्मों को चिन्हित करने से वितरण में भी दिक्कत आएगी। जिले से फर्में एक साथ 3.36 लाख स्वेटर दे पाने में सक्षम नही दिख रही हैं। क्योंकि तत्काल भुगतान की संभावना नही है। फर्म के ही लोगों की मानें तो उनके पास चार से पांच हजार तक ही स्वेटर स्टाक में है।
ऐसे में 50 हजार से एक लाख ही स्वेटर मिल सकता है। वह भी तब जब भुगतान लगे हाथ हो जाए। लेकिन भुगतान में स्कूल के प्रधानाध्यापकों के साथ ही एसएमसी अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर होने के बाद ही हो सकता है। जिले स्तर का कोई अधिकारी भुगतान नहीं कर सकता।
शिक्षक चाह रहे जिले से ही हो जाए सीधी सप्लाई
दो सौ रुपए में गुणवत्तापूर्ण स्वेटर देने के फैसले के पक्ष में शिक्षक नहीं है। वे चाहते हैं कि किताब, जूता मोजा की तरह ही स्वेटर भी सीधे मिल जाए। इससे गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी कम होगी।
लेकिन शासन की ओर से शासनादेश में कोई बदलाव न होने से क्रय, वितरण और गुणवत्ता की जिम्मेदारी शिक्षकों पर ही है। प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष आनंद त्रिपाठी भी कहते हैं कि शिक्षकों को इस योजना से मुक्त कर दिया जाए।
अभी बजट नहीं आया है जैसे ही बजट आएगा सीधे स्कूलों के खातों में भेज दिया जाएगा। स्वेटर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फर्मोँ को चिन्हित किया गया है। अभी अंतिम निर्णय जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को लेनी है।
-विनोद जयसवाल, प्रभारी स्वेटर वितरण/ जिला समन्वयक