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Gonda News: 17 माह से बॉक्स में बंद पड़ी 63 लाख की एफेरेसिस मशीन

Sun, 03 Aug 2025 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 03 Aug 2025 11:31 PM IST
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Apheresis machine worth 63 lakhs lying in the box for 17 months
गोंडा। बिना रक्त निकाले ही प्लाज्मा व प्लेटलेट्स अलग करने के लिए स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के ब्लड बैंक को मिली 63 लाख रुपये की एफेरेसिस मशीन 17 माह से बॉक्स में ही बंद पड़ी है। ब्लड बैंक के लाइसेंस का नवीनीकरण न होने के कारण इस मशीन को संचालित करने का लाइसेंस अटका है।
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जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद शासन ने सुविधाएं बढ़ाने की कवायद शुरू की है। मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक को हाईटेक बनाने की कवायद शुरू होनी थी। मेडिकल सप्लाइज काॅर्पोरेशन की ओर से फरवरी 2024 में आधुनिक एफेरेसिस मशीन भेजी गई, लेकिन इसे इंस्टॉल नहीं किया जा सका। 14 जनवरी को मशीन प्रयागराज भेज दी गई। उसके बाद 21 जनवरी को दूसरी मशीन मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक को मिली, लेकिन वह भी अभी तक बॉक्स में पैक रखी है।
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खून से सीधे निकाल सकते हैं प्लेटलेट्स व प्लाज्मा
ब्लड बैंक में अभी प्लेटलेट्स व प्लाज्मा निकालने के लिए पहले रक्तदाता के शरीर से खून निकाला जाता है। इसके बाद ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन से प्लेटलेट्स व प्लाज्मा अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता है, लेकिन एफेरेसिस से बिना खून निकाले ही शरीर से जरूरी मात्रा में प्लेटलेट्स व प्लाज्मा निकाला जा सकता है। इसमें डोनर को ड्रिप लगाने के साथ मशीन के सेंट्रीफ्यूज से जोड़ा जाता है, जो शरीर से रक्त को खींचकर आवश्यक तत्वों को शरीर में फिर डाल देती है।
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31 दिसंबर 2022 तक ही वैध था लाइसेंस

ब्लड बैंक का लाइसेंस 31 दिसंबर 2022 तक ही वैध था। नवीनीकरण के लिए आवेदन करने के बाद तत्कालीन औषधि निरीक्षक रजिया बानो व गाजियाबाद के औषधि निरीक्षक कुसुम सिंह ने निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन अभी तक लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। जिससे एफेरेसिस मशीन का संचालन नहीं हो सका।


प्रमुख सचिव को भेजा पत्र


ब्लड बैंक के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया है। औषधि निरीक्षकों की ओर से भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट प्रेषित करने के बावजूद अभी तक नवीनीकरण अटका है। इस कारण मशीन संचालन में भी समस्या आ रही है। इसके लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा गया है। जल्द ही नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।

--डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज
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