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अस्तित्व को खतरा : सिमटता जा रहा उदंती नदी का दायरा
Updated Thu, 24 May 2018 11:52 PM IST
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शादियाबाद/सादात (गाजीपुर)। 50 किमी की दूरी तय कर जनपद के पश्चिमी छोर से प्रवेश करने वाली उदंती नदी का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। इन क्षेत्रों से होकर प्रवाहित होने वाली दो मौसमी नदियां किसानों के लिए हमेशा से वरदान साबित होती हैं। बरसात के दिनों में इनका प्रलयंकारी रूप कभी-कभी अभिशाप बन जाता है।
जौनपुर जिले से निकली उदंती और आजमगढ़ जिले से निकली बेसो नदी 50 किमी की दूरी तय कर जनपद के पश्चिमी छोर से सीमा में प्रवेश करती हैं। नदी अपने जल से किसानों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधे तथा वनस्पतियों की प्यास बुझाती हैं। यह पर्यावरण की दृष्टि से भी काफी उपयोगी हैं। वर्तमान में नदियों का दायरा काफी सिमट गया है और जल दोहन की वजह से इनके अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।
जनपद में 25 किमी का सफर तय करने के बाद उदंती नदी शादियाबाद बाजार से एक किमी पहले पश्चिम तरफ सराय सदकर गांव के पास बेसो नदी में मिलती है। इस स्थान को नदियों का संगम स्थल कहा जाता है। यहां हर वर्ष विशाल मेला लगता है। उदंती नदी के साथ मिलकर आगे बढ़ती हुई बेसो नदी मुहम्मदाबाद के डुंगरपुर और शाहपुर गांव के पास गंगा नदी में मिल जाती है। यह दोनों नदियां किसानों के लिए काफी सहायक है। किसान इनके पानी का प्रयोग करके अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। पालतू जानवरों से लेकर जंगली जानवर इन नदियों का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। गर्मी के दिनों में जगह-जगह इसके पानी को रोककर लोग अपने इस्तेमाल में लाते हैं। लगभग आठ माह तक तो यह दोनों नदियां किसानों एवं ग्रामवासियों के सुख का आधार बनती हैं, लेकिन बरसात के चार माह में इसका रूप आक्रामक हो जाता है। बरसात के पानी से उफनाई यह दोनों नदियां कई गांवों के पशु पक्षियों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों और मकानों को लील जाती हैं। इनके आगोश में हजारों एकड़ फसल समा जाती है।
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जौनपुर जिले से निकली उदंती और आजमगढ़ जिले से निकली बेसो नदी 50 किमी की दूरी तय कर जनपद के पश्चिमी छोर से सीमा में प्रवेश करती हैं। नदी अपने जल से किसानों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधे तथा वनस्पतियों की प्यास बुझाती हैं। यह पर्यावरण की दृष्टि से भी काफी उपयोगी हैं। वर्तमान में नदियों का दायरा काफी सिमट गया है और जल दोहन की वजह से इनके अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।
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जनपद में 25 किमी का सफर तय करने के बाद उदंती नदी शादियाबाद बाजार से एक किमी पहले पश्चिम तरफ सराय सदकर गांव के पास बेसो नदी में मिलती है। इस स्थान को नदियों का संगम स्थल कहा जाता है। यहां हर वर्ष विशाल मेला लगता है। उदंती नदी के साथ मिलकर आगे बढ़ती हुई बेसो नदी मुहम्मदाबाद के डुंगरपुर और शाहपुर गांव के पास गंगा नदी में मिल जाती है। यह दोनों नदियां किसानों के लिए काफी सहायक है। किसान इनके पानी का प्रयोग करके अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। पालतू जानवरों से लेकर जंगली जानवर इन नदियों का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं। गर्मी के दिनों में जगह-जगह इसके पानी को रोककर लोग अपने इस्तेमाल में लाते हैं। लगभग आठ माह तक तो यह दोनों नदियां किसानों एवं ग्रामवासियों के सुख का आधार बनती हैं, लेकिन बरसात के चार माह में इसका रूप आक्रामक हो जाता है। बरसात के पानी से उफनाई यह दोनों नदियां कई गांवों के पशु पक्षियों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों और मकानों को लील जाती हैं। इनके आगोश में हजारों एकड़ फसल समा जाती है।
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