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सेवक की जगह चरणों में: रामानुजाचार्य
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 16 Apr 2017 11:31 PM IST
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सेवक की जगह चरणों में: रामानुजाचार्य
- फोटो : अमर उजाला
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श्रीराम लीला मैदान में आयोजित श्रीराम कथा में बोलते हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य महाराज ने कहा कि मुक्त होने पर भगवान और जीव के अंदर नौ गुण बराबर होते हैं। श्रीराम ने हनुमान को गले लगाकर सबसे बड़ा उपहार दिया। सेवक की जगह हमेशा चरणों में ही होती है।
महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा लवकुश ने गाई और श्रीराम ने श्रवण किया। श्रीराम व रावण राशि वैसे तो एक ही है। जो सारे जगत को आनंद देते हैं वह श्रीराम हैं। जो सारे जगत को रुलाता है, वो रावण है। स्वामी धराचार्य महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने प्रजा को कोई कष्ट न हो, इसके लिए उन्होंने आठ गुप्तचर लगाए हुए थे। वह कहते हैं कि मनुष्य की बुद्धि बड़ी विचित्र है। वात्सल्य के कारण मां को पुत्र का अवगुण भी दिखाई नहीं पड़ता। मां जानकी ने लखन से कहा कि प्रभु श्रीराम से कहना कि प्रजा का पुत्रवत पालन करें। लखन लाल ने सुमंत्र से कहा कि धरती पर ऐसा कौन मनुष्य है, जिसको दुख स्पर्श नहीं करता। सभी सुविधाएं का प्रभु श्रीराम ने त्याग कर दिया। श्रीराम चरित मानस की आरती मुख्य यजमान नारदानंद गर्ग ने उतारी।
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महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा लवकुश ने गाई और श्रीराम ने श्रवण किया। श्रीराम व रावण राशि वैसे तो एक ही है। जो सारे जगत को आनंद देते हैं वह श्रीराम हैं। जो सारे जगत को रुलाता है, वो रावण है। स्वामी धराचार्य महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने प्रजा को कोई कष्ट न हो, इसके लिए उन्होंने आठ गुप्तचर लगाए हुए थे। वह कहते हैं कि मनुष्य की बुद्धि बड़ी विचित्र है। वात्सल्य के कारण मां को पुत्र का अवगुण भी दिखाई नहीं पड़ता। मां जानकी ने लखन से कहा कि प्रभु श्रीराम से कहना कि प्रजा का पुत्रवत पालन करें। लखन लाल ने सुमंत्र से कहा कि धरती पर ऐसा कौन मनुष्य है, जिसको दुख स्पर्श नहीं करता। सभी सुविधाएं का प्रभु श्रीराम ने त्याग कर दिया। श्रीराम चरित मानस की आरती मुख्य यजमान नारदानंद गर्ग ने उतारी।
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