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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Dowry Harassment Case: Husband and Brother-in-Law Sentenced to 3 Years in Prison

दहेज के लालच ने पहुंचा दिया जेल: विवाहिता का उत्पीड़न, घर से निकाल दी वो; पति और जेठ को 3 साल कारावास

Sat, 29 Aug 2026 10:35 AM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 29 Aug 2026 10:35 AM IST
सार

आगरा की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में पति श्यामजी और जेठ रामजी को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पीड़िता और अन्य गवाहों के बयानों समेत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी माना।

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Dowry Harassment Case: Husband and Brother-in-Law Sentenced to 3 Years in Prison
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में दहेज उत्पीड़न और अन्य गंभीर आरोपों के एक मामले में आगरा की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने थाना एत्माद्दौला क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी महिला के पति श्यामजी और जेठ रामजी को दोषी करार दिया है। अपर जिला जज नीरज श्रीवास्तव ने दोनों दोषियों को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है।
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थाना एत्माद्दौला में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, पीड़िता की शादी 13 नवंबर, 2013 को श्यामजी के साथ हुई थी। पीड़िता के पिता ने शादी में करीब पांच लाख रुपये खर्च किए थे। इसके बावजूद पति, सास, जेठ, जिठानी और अन्य ससुराल वाले खुश नहीं थे। उन्होंने अतिरिक्त दहेज में दो लाख रुपये और गहनों की मांग शुरू कर दी। मांग पूरी न होने पर पीड़िता को खाना नहीं दिया जाता था और उसको पीटकर उत्पीड़न किया जाता था। बाद में उसे घर से निकाल दिया गया। पिता ने एक सोने की चेन, एक अंगूठी, सोने का एक गले का सेट और चांदी की करधनी भी दी।
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पीड़िता ने दो पुत्रों को जन्म दिया, लेकिन उत्पीड़न जारी रहा। उस पर गलत काम करने का दबाव बनाया जाता था और नए लड़कों को घर में अकेले भेजा जाता था। विरोध करने पर उसकी पिटाई की गई। सात नवंबर, 2018 को पति ने पीड़िता पर गर्म चाय फेंक दी। ननदोई भी अकेला पाकर अश्लील हरकतें करता था।
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अभियोजन पक्ष ने अदालत में पीड़िता सहित चार गवाह पेश किए। इन गवाहों ने पीड़िता के साथ हुए उत्पीड़न की पुष्टि की। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार किया। इसके बाद पति और जेठ को दोषी ठहराया गया। यह फैसला दहेज उत्पीड़न के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है।


 
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