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जिला कमेटी के समक्ष बर्खास्त शिक्षिका ने रखा पक्ष
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फिरोजाबाद। सीडीओ कार्यालय में सोमवार को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय (केजीवि) से बर्खास्त की गई शिक्षिका ने जिला कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा। इस दौरान कमेटी की ओर से दो शिक्षिकाओं को बुलाया गया था, जिसमें एक ही उपस्थित हुई, दूसरी शिक्षिका अनुपस्थित रही।
अक्तूबर 2019 में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में शासन से आई टीम ने निरीक्षण किया था। छात्राओं ने विद्यालय स्टाफ की शिकायत की थी। इसमें वार्डन अरशद परवीन, शिक्षिका मीना राजपूत, चपरासी रघुराज और कुंती देवी रसोइयां की सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। शिक्षिका मीना राजपूत ने शासन को पत्राचार किया था।
इसके बाद सीडीओ नेहा जैन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सुनवाई की। इसमें शिक्षिका का पक्ष जाना। वहीं, अन्य मामले में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की शिक्षिका नीलम सिंह की संविदा भी खत्म की थी। उनको भी सुनवाई के लिए बुलाया था, किंतु वह अनुपस्थित रहीं। बीएसए अरविंद पाठक ने बताया कि केजीवि मामले में शिक्षिका की सुनवाई थी। कमेटी ने शिक्षिका का पक्ष सुना है। कमेटी अग्रिम निर्णय लेगी।
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एक सप्ताह बाद भी नहीं लग सका अमेठी के शिक्षक का पता
फिरोजाबाद। अमेठी से शिक्षक का नाम आया था और फर्जी शिक्षक होने की आशंका जाहिर की थी। बीएसए ने एबीएसए के माध्यम से जानकारी मांगी। किंतु एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी शिक्षक के संबंध में विभाग को जानकारी नहीं हो सकी।
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अक्तूबर 2019 में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में शासन से आई टीम ने निरीक्षण किया था। छात्राओं ने विद्यालय स्टाफ की शिकायत की थी। इसमें वार्डन अरशद परवीन, शिक्षिका मीना राजपूत, चपरासी रघुराज और कुंती देवी रसोइयां की सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। शिक्षिका मीना राजपूत ने शासन को पत्राचार किया था।
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इसके बाद सीडीओ नेहा जैन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सुनवाई की। इसमें शिक्षिका का पक्ष जाना। वहीं, अन्य मामले में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की शिक्षिका नीलम सिंह की संविदा भी खत्म की थी। उनको भी सुनवाई के लिए बुलाया था, किंतु वह अनुपस्थित रहीं। बीएसए अरविंद पाठक ने बताया कि केजीवि मामले में शिक्षिका की सुनवाई थी। कमेटी ने शिक्षिका का पक्ष सुना है। कमेटी अग्रिम निर्णय लेगी।
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एक सप्ताह बाद भी नहीं लग सका अमेठी के शिक्षक का पता
फिरोजाबाद। अमेठी से शिक्षक का नाम आया था और फर्जी शिक्षक होने की आशंका जाहिर की थी। बीएसए ने एबीएसए के माध्यम से जानकारी मांगी। किंतु एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी शिक्षक के संबंध में विभाग को जानकारी नहीं हो सकी।