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एनजीटी को जवाब देने की तैयारी में उद्यमी

Sun, 20 Sep 2015 07:40 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Sun, 20 Sep 2015 07:40 PM IST
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entrepreneurs in preparing the reply to NGT
 सुहागनगरी में बिना अनुमति चल रही 89 इकाईयों को बंद करने की एनजीटी में 0शिकायत से उद्योग जगत में हड़कंप है। रविवार को उद्यमियों ने ट्रामा सेंटर में बैठक कर याचिका के आधार पर जवाब तैयार करने के लिए  मंथन किया।
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  सुहागनगरी के कांच उद्योग को लेकर बाहरी संगठन लगातार शिकायतें कर रहे हैं। इससे उद्यमी बेचैन हैं। सोशल एक्शन फॉर  एनवायमेंट एंड फारेस्ट (सेफ) संस्था द्वारा हाल ही में एनजीटी में पुन: याचिका दायर की गई हैं, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के बिना चल रही 89 इकाईयों को बंद करने की मांग की है। साथ ही सेफ ने यह भी कहा है कि आज भी 43 इकाईयां ऐसी हैं, जिन्होंने आजतक अनुमति के लिए  आवेदन ही नहीं किया है। दो दर्जन आवेदन पेंडिंग हैं। विभाग ने नौ आवेदन निरस्त कर दिए हैं और चार आवेदन वापस कर दिए हैं। इस प्रकार सुहागनगरी की  कुल 143 इकाईयों का मामला एनजीटी में है। इस मामले में नौ अक्टूबर  तक जवाब दाखिल करना है। जैसे-जैसे जवाब देने की तिथि नजदीक आ रही है,  उद्यमियों के साथ अफसरों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। एनजीटी के मामले में रविवार को यूपीजीएमएस, दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट के पदाधिकारियों ने ट्रामा सेंटर में बैठक कर आगे रणनीति पर विचार विमर्श  किया। यूपीजीएमएस अध्यक्ष राजकुमार मित्तल ने सभी उद्यमियों से कहा कि  एनजीटी का जवाब देने को सभी लोग मिलकर तैयारी करें। इस सभी को मिलकर 143  इकाईयों की लड़ाई लड़नी है। इसके लिए सभी अपनी-अपनी इकाईयों से संबंधित  पत्रावलियां जल्द तैयार करें, जिससे वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखा जा सके। बैठक में राजकुमार मित्तल, हनुमान प्रसाद गर्ग, प्रदीप गुप्ता,  संजय अग्रवाल, पीके झिंदल, राकेश अग्रवाल, सुरेशचंद्र अग्रवाल, मुन्ना करंट  सहित अन्य उद्यमी मौजूद रहे।
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अफसर भी ढूंढ रहे जवाब, खंगाली जा रहीं पुरानी फाइलें
एनजीटी में दायर याचिका में सेफ ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उद्योग विभाग में तैनात अफसरों ने तीन दर्जन इकाईयों को गलत रूप से प्रमाण पत्र जारी किए हैं। 72 इकाईयों द्वारा क्षमता वृद्धि किए जाने की बात कही गई है।  वहीं सूची में एक दर्जन इकाईयां ऐसी भी है, जो वर्ष 1996 में पंजीकृत ही  नहीं थीं। सात इकाइयां ऐसी दशाई गई हैं, जो वर्ष 2011 के बाद धरातल पर आईं। उद्योग विभाग के अफसर शिकायत के आधार पर जवाब ढूंढने में जुटे हैं। जवाब दाखिल करने को पुरानी फाइलें खंगाली जा रही हैं। इधर प्रदूषण न्यिंत्रण बोर्ड भी अपनी  तैयारी में जुटा है।
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