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लॉकडाउन में नहीं मिल रहा इलाज, बीमारी का दर्द लिए भटक रहे मरीज 1
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पिता को उपचार दिलाने के लिए पैदल ले जाती युवती
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। लॉकडाउन में मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद है। ऐसे में कोई अपने नवजात बेटे का उपचार कराने के लिए भटक रहा है तो कोई दवा के लिए मेडिकल स्टोर के चक्कर लगाने को विवश है। उपचार के अभाव में लोग मायूस होकर लौटने को विवश है। बीमारी के दर्द में चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा की जाने वाली पूछताछ और दंडात्मक कार्रवाई से लोग परेशान है।
सरकारी ट्रॉमा सेंटर पर आए रामनगर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि वह बेलदारी करते हैं। नवजात बेटे की तबियत विगत तीन दिन से खराब है। बुखार आ रहा है। सरकारी ट्रॉमा सेंटर लेकर आए लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। अब इतना पैसा नहीं है कि बेटे का उपचार किसी निजी चिकित्सक के यहां कराएं। ऐसे में बेटे का बिना उपचार कराए घर जा रहे हैं।
पुराना रसूलपुर गली नंबर एक निवासी शाहेबे आलम ने बताया कि उनकी मां का उपचार प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। विगत चार दिन से दवा के लिए पैदल भटक रहे है। बाइक से जाओ तो पुलिस परेशान करती है। चालान कर दिया जाता है। ऐसे में क्या करें? कुछ समझ नहीं आ रहा। यदि दवा नहीं मिली तो दिक्कत और बढ़ जाएगी। दवा न मिलने के कारण मां को परेशानी होने लगी है।
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आसफाबाद शांति नगर निवासी रश्मी देवी ने बताया कि उनकी सास मार्गश्री की होली के बाद से तबियत खराब है। क्षेत्र में रहने वाले चिकित्सक से उपचार कराया लेकिन फायदा नहीं मिला। हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। पुलिस ने आज भी अस्पताल आने से रोका था लेकिन जबरदस्ती लेकर आए। यहां भी चिकित्सक नहीं मिले। ऐसे में क्या करें? समझ नहीं आ रहा है।
प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर के बाहर मौजूद जेहलपुर निवासी सुनीता देवी के हाथ में विगत 15 दिन से दिक्कत है। दवा का असर रहने तक आराम रहता है और इसके बाद फिर से दर्द शुरू हो जाता है। जैसे-तैसे घर से निकल कर अस्पताल तक पहुंची लेकिन यहां कोई चिकित्सक नहीं है। कोई प्राइवेट चिकित्सक भी नहीं मिला। उसने कहा कि हाथ के कारण घर पर भी कोई काम नहीं कर पा रही है।
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सरकारी ट्रॉमा सेंटर पर आए रामनगर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि वह बेलदारी करते हैं। नवजात बेटे की तबियत विगत तीन दिन से खराब है। बुखार आ रहा है। सरकारी ट्रॉमा सेंटर लेकर आए लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। अब इतना पैसा नहीं है कि बेटे का उपचार किसी निजी चिकित्सक के यहां कराएं। ऐसे में बेटे का बिना उपचार कराए घर जा रहे हैं।
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पुराना रसूलपुर गली नंबर एक निवासी शाहेबे आलम ने बताया कि उनकी मां का उपचार प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। विगत चार दिन से दवा के लिए पैदल भटक रहे है। बाइक से जाओ तो पुलिस परेशान करती है। चालान कर दिया जाता है। ऐसे में क्या करें? कुछ समझ नहीं आ रहा। यदि दवा नहीं मिली तो दिक्कत और बढ़ जाएगी। दवा न मिलने के कारण मां को परेशानी होने लगी है।
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आसफाबाद शांति नगर निवासी रश्मी देवी ने बताया कि उनकी सास मार्गश्री की होली के बाद से तबियत खराब है। क्षेत्र में रहने वाले चिकित्सक से उपचार कराया लेकिन फायदा नहीं मिला। हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। पुलिस ने आज भी अस्पताल आने से रोका था लेकिन जबरदस्ती लेकर आए। यहां भी चिकित्सक नहीं मिले। ऐसे में क्या करें? समझ नहीं आ रहा है।
प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर के बाहर मौजूद जेहलपुर निवासी सुनीता देवी के हाथ में विगत 15 दिन से दिक्कत है। दवा का असर रहने तक आराम रहता है और इसके बाद फिर से दर्द शुरू हो जाता है। जैसे-तैसे घर से निकल कर अस्पताल तक पहुंची लेकिन यहां कोई चिकित्सक नहीं है। कोई प्राइवेट चिकित्सक भी नहीं मिला। उसने कहा कि हाथ के कारण घर पर भी कोई काम नहीं कर पा रही है।