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कोरोनाकाल में लाभ देखकर आयुर्वेद की ओर लोगों का बढ़ा रुझान
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कोरोनाकाल में लाभ देखकर आयुर्वेद की ओर लोगों का बढ़ा रुझान
जिला अस्पताल में संक्रमण से पूर्व आते थे 60 मरीज अब आ रहे 125
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। कोरोना संक्रमण काल में लोगों का आयुर्वेद की ओर रुझान बढ़ा। काढ़ा और अन्य दवाइयों के सेवन का लाभ देखकर लोगों इसे अपनी जीवन पद्धति में अपनाया। अब इस पद्धति से इलाज कराने वालों की भी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। महावीर नगर स्थित जिला आयुर्वेद अस्पताल में कोरोना काल से पहले बमुश्किल 45 से 60 मरीज रोजाना इलाज कराने पहुंचते थे। वर्तमान में यह संख्या 100 से 125 तक पहुंच रही है।
जिले में कुल 26 आयुर्वेदिक अस्पताल और दो यूनानी चिकित्सालय हैं। 12 चिकित्सकों की तैनाती के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के आयुर्वेदिक अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या कोरोना काल के बाद बढ़ी है। वैश्विक महामारी के बीच आयुष काढ़ा से लोगों को फायदा हुआ। उसके बाद मरीजों की संख्या आयुर्वेद अस्पतालों में बढ़ी है। ज्यादातर जोड़ों के दर्द से परेशान मरीज आयुर्वेदिक और होम्योपैथी चिकित्सक से इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। मधुमेह और बीपी के मरीजों की संख्या भी दिनों दिन बढ़ रही है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा की बिक्री बढ़ी
जो लोग वैक्सीन ले चुके हैं, वे भी अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दवा ले रहे हैं। कोरोनाकाल में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा का स्टाक निल हो गया था। कोरोनाकाल के बाद 20 से 30 फीसदी मरीजों की संख्या बढ़ी है। जो लोग एलोपैथी दवाओं पर विश्वास करते थे, अब उनका आयुर्वेद की दवाओं पर विश्वास बढ़ा है।
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- डॉ. सुग्रीव कुमार अशोक, आयुर्वेद अस्पताल
इसलिए बढ़ा रुझान
कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाओं का सेवन करने लगे थे। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए काढ़ा पीते थे। इन्हीं वजहों से लोगों का रुझान आयुष चिकित्सा के प्रति बढ़ा है।
यहां हैं आयुर्वेद अस्पताल
महावीर नगर में जिला स्तरीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय है। इसके अलावा शिकोहाबाद स्थित करहरा, सिरसागंज, पैगू, गढ़सान, मुहम्मदपुर, धनपुरा, जौंधरी एवं बछगांव में आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हैं।
- आयुर्वेद में असाध्य रोगों का इलाज भी है। कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग सफल रहा। आयुष विभाग ने भी आयुर्वेद दवाओं पर भरोसा जताया। सोंठ, दालचीनी, काली मिर्च, तुलसी आदि का मिश्रित काढ़ा कोरोना काल में काफी उपयोगी रहा। आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री भी बढ़ी है। जब आयुर्वेद के सहारे लोगों ने कोरोना से जंग जीती तो अन्य बीमारियों में आयुर्वेद दवाओं पर आयुर्वेद दवाओं का उपयोग करने लगे हैं।
- कल्पना गुप्ता, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी
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जिला अस्पताल में संक्रमण से पूर्व आते थे 60 मरीज अब आ रहे 125
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। कोरोना संक्रमण काल में लोगों का आयुर्वेद की ओर रुझान बढ़ा। काढ़ा और अन्य दवाइयों के सेवन का लाभ देखकर लोगों इसे अपनी जीवन पद्धति में अपनाया। अब इस पद्धति से इलाज कराने वालों की भी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। महावीर नगर स्थित जिला आयुर्वेद अस्पताल में कोरोना काल से पहले बमुश्किल 45 से 60 मरीज रोजाना इलाज कराने पहुंचते थे। वर्तमान में यह संख्या 100 से 125 तक पहुंच रही है।
जिले में कुल 26 आयुर्वेदिक अस्पताल और दो यूनानी चिकित्सालय हैं। 12 चिकित्सकों की तैनाती के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के आयुर्वेदिक अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या कोरोना काल के बाद बढ़ी है। वैश्विक महामारी के बीच आयुष काढ़ा से लोगों को फायदा हुआ। उसके बाद मरीजों की संख्या आयुर्वेद अस्पतालों में बढ़ी है। ज्यादातर जोड़ों के दर्द से परेशान मरीज आयुर्वेदिक और होम्योपैथी चिकित्सक से इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। मधुमेह और बीपी के मरीजों की संख्या भी दिनों दिन बढ़ रही है।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा की बिक्री बढ़ी
जो लोग वैक्सीन ले चुके हैं, वे भी अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दवा ले रहे हैं। कोरोनाकाल में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा का स्टाक निल हो गया था। कोरोनाकाल के बाद 20 से 30 फीसदी मरीजों की संख्या बढ़ी है। जो लोग एलोपैथी दवाओं पर विश्वास करते थे, अब उनका आयुर्वेद की दवाओं पर विश्वास बढ़ा है।
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- डॉ. सुग्रीव कुमार अशोक, आयुर्वेद अस्पताल
इसलिए बढ़ा रुझान
कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाओं का सेवन करने लगे थे। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए काढ़ा पीते थे। इन्हीं वजहों से लोगों का रुझान आयुष चिकित्सा के प्रति बढ़ा है।
यहां हैं आयुर्वेद अस्पताल
महावीर नगर में जिला स्तरीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय है। इसके अलावा शिकोहाबाद स्थित करहरा, सिरसागंज, पैगू, गढ़सान, मुहम्मदपुर, धनपुरा, जौंधरी एवं बछगांव में आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हैं।
- आयुर्वेद में असाध्य रोगों का इलाज भी है। कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग सफल रहा। आयुष विभाग ने भी आयुर्वेद दवाओं पर भरोसा जताया। सोंठ, दालचीनी, काली मिर्च, तुलसी आदि का मिश्रित काढ़ा कोरोना काल में काफी उपयोगी रहा। आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री भी बढ़ी है। जब आयुर्वेद के सहारे लोगों ने कोरोना से जंग जीती तो अन्य बीमारियों में आयुर्वेद दवाओं पर आयुर्वेद दवाओं का उपयोग करने लगे हैं।
- कल्पना गुप्ता, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी