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मुसीबतें लेकर आई है बेमौसम की बारिश

Sun, 04 Jan 2015 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sun, 04 Jan 2015 12:09 AM IST
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unseasonal rain brought lot of trouble to people

बेमौसम की बारिश से शीतलहर सर्द हो गई है। तीन दिन से लगातार पड़ रही रिमझिम फुहारें किसानों के लिए मुसीबत बनी हैं। यह बारिश आलू, मटर, एवं तिलहन की फसल को नुकसान पहुंचाएगी। गेहूं के लिए बारिश को फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन यह तभी संभव है जब एक दो दिन में धूप हो जाए।

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धूप नहीं हुई तो गेहूं को भी यह पानी नुकसान करेगा। दूसरी तरफ यह बारिश सर्दी के तेवर को तीखा कर रहा है। अलाव से तापने और कंबल ओढ़कर सर्दी से बचने के सारे जतन नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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मौसम के जानकारों का कहा है कि अभी दो दिन तक सर्दी से निजात मिलने की उम्मीद नहीं है।
 
मौसम की मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार चार दिन से फुहारें बढ़ने की वजह से फसलों में रोग का असर दिखभने लगा है। कोहरे से दलहनी, तिलहनी, आलू, मटर, केला और टमाटर की फसलों में तरह-तरह के रोग लगने लगे हैं। ऐसे में फसलों के बचाव में दवा का भी छिड़काव भी नहीं हो पा रहा है।
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सर्दी के मौसम में होने वाली बारिश गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन कृषि विशेषत्रों का कहना है कि बारिश के बाद धूप हो जाए तो इसका ज्यादा फायदा मिलता है।

यदि बारिश का दौर दो तीन दिन तक बना रहा तो यह पानी आलू व अन्य सब्जियों की तरह ही गेहूं के लिए भी नुकसानदायक साबित होगा। वहीं आलू, मटर, टमाटर एवं दलहन व तिलहन के फसल में  लगातार कोहरा एवं बारिश होने से रोग लगने लगे हैँ।

सातों गांव के किसान सुमेर सिंह ने बताया कि आलू की फसल में पाला व शीतलहर से मुर्रा रोग लग गया है। इससे आलू की पैदावार कम होगी, जिससे बीज की लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है।


जिले में बोई गई फसलों का रकबा (हेक्टेयर में)
राई/सरसाें            17747
अरहर            19473
आलू                9000
केला                1450
मटर                5000
टमाटर            7000

क्या कहते हैं अधिकारी
फतेहपुर। उद्यान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक आरएस दीक्षित ने बताया कि ठंड के साथ शीतलहर में आलू की फसल में 25 से 30 फीसदी झुलसा रोग से प्रभावित हो सकती है। मटर की फसल पत गलन रोग से 50 फीसदी नुकसान होने की संभावना है। टमाटर की फसल में मुजैक नामक रोग से 25 फीसदी असर आ सकता है। बारिश के मौसम में रोग बचाव का कोई उपाय नहीं है। इस समय किसी प्रकार की दवा असर नहीं करेगी।  
यूं बचाए फसल
 बारिश के मौसम में किसान फसलों में दवा का छिड़काव न करें। जब बारिश खत्म हो जाए तो कीटनाशक व रोग के रोकथाम के लिए दवा डाले। इसके लिए कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर कीटनाशक व दवा को खरीदें।’
- वीके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी


अस्पताल में पसरा सन्नाटा
फतेहपुर। मौसम की खराबी के कारण जिला अस्पताल में शनिवार को सन्नाटा रहा। अस्तपताल पहुंचे गिने चुने डाक्टरों ने आपसी बाताकहनी में ही समय बिताया। दवा खिड़की और पैथालाजी में भी रोगियों का टोटा रहा।
 जिला अस्पताल में  शनिवार को सिर्फ 20 रोगियों ने पंजीयन कराया। जबकि प्रतिदिन रोगियों के पंजीयन का औसत 600 से 800 के बीच है। अस्थि रोग विभाग में सिर्फ 18 रोगी दिखाने पहुंचे।

फिजीशियन कक्ष में 38 रोगी पहुंचे। नाक कान गला रोग कक्ष में ताला बंदी रही। एक अन्य फिजीशियन कक्ष में  अवकाश मे जाने की स्लिप चस्पा रही। आयुष डाक्टरों के कक्ष में पूरी तरह से सन्नटा रहा। एक्सरे लैब के सामने दो चार रोगी बैठे दिखाई पड़े। पैथालाजी में सिर्फ दो दर्जन जांच के लिए नमूने आए।


वाड़ोर् में भती होने वाले रोगियों की संख्या नगण्य रही। पूरे अस्पताल की फर्श गीली होने के कारण तीमारदारों को बैठने के लिए सूखा स्थान खोजे नहीं मिला। कार्यवाहक सीएमएस डा. ओपी द्विवेदी ने बताया कि मौसम खराब होने के कारण अस्पताल बहुत ही कम रोगी पहुंचे हैं। अस्पताल पहुंचे सभी रोगियों को परामर्श के साथ चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराई गई है।


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