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Fatehpur News: विकास के करोड़ों रुपये डंप, करने होंगे सरेंडर
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फतेहपुर। जिले में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि विभागों के पास होने के बावजूद अधिकारी आधी भी खर्च नहीं कर पाए। पीडब्ल्यूडी, जल निगम, स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई समेत कई विभागों ने कई मद का एक रुपया भी नहीं खर्च किया। हालत यह है कि वित्तीय वर्ष आज से खत्म होते ही करोड़ों रुपये की राशि सरेंडर करनी पड़ेगी।
शहर में सीवर लाइन बिछाई के लिए पहले चरण में 311.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी। उसकी पहली 41 करोड़ रुपये की किश्त जारी भी कर दी गई। मामला टेंडर में अटक गया। अब यह राशि 31 मार्च को सरेंडर करनी ही पड़ेगी। अगले वित्तीय वर्ष में सीवरेज लाइन के लिए फिर से बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
इसके अलावा छोटी-बड़ी सड़कों के निर्माण, मरम्मत के लिए लगभग 76 करोड़ रुपये की धनराशि पीडब्ल्यूडी विभाग को भेजी गई। इसमें विभाग आधी रकम भी विकास कार्यों के लिए खर्च नहीं कर पाया। ऐसे ही स्वास्थ्य विभाग में मशीनरी व सीएचसी बनवाने के लिए अलग-अलग मद में करीब सवा करोड़ रुपये भेजे गए। इसमें मशीनरी खरीदी व मरम्मत के नाम पर लगभग 52.75 लाख रुपये ही खर्च किया जा सका।
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वहीं, सीएचसी निर्माण के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं खर्च की गई। इसी तरह सिंचाई विभाग ने किसानों की सुविधा पर जमकर कटौती की। विभाग को एक करोड़ की राशि सिंचाई से संबंधित कार्य के लिए भेजी गई। वहीं बड़े स्तर पर निर्माण के लिए 74 लाख से अधिक दिए गए। इसमें विभाग एक रुपये भी खर्च नहीं कर पाया। वहीं, मरम्मत व सुधार के कार्यों के लिए 2 करोड़ 61 लाख से अधिक भेजे गए। इसमें भी विभाग एक करोड़ 74 लाख रुपये ही खर्च कर पाया। ऐसे ही हालात अन्य विभागों के भी हैं। इस तरह से चार विभागों को लगभग 65 करोड़ की राशि सरेंडर करनी पड़ेगी। इससे जिले के विकास में अवरोध उत्पन्न होगा।
-- इनसेट--
विभाग बजट बची धनराशि
स्वास्थ्य विभाग 115.82 लाख 63.09 लाख
जलनिगम 41 करोड़ 41 करोड़
पीडब्ल्यूडी 73.9 करोड़ 43.26 करोड़
सिंचाई विभाग 4.35 करोड़ 2.61 करोड़
(ये धनराशि कुछ मदों की है। इसके अलावा अन्य मदों में भी धनराशि बची है।)
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शहर में सीवर लाइन बिछाई के लिए पहले चरण में 311.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी। उसकी पहली 41 करोड़ रुपये की किश्त जारी भी कर दी गई। मामला टेंडर में अटक गया। अब यह राशि 31 मार्च को सरेंडर करनी ही पड़ेगी। अगले वित्तीय वर्ष में सीवरेज लाइन के लिए फिर से बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
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इसके अलावा छोटी-बड़ी सड़कों के निर्माण, मरम्मत के लिए लगभग 76 करोड़ रुपये की धनराशि पीडब्ल्यूडी विभाग को भेजी गई। इसमें विभाग आधी रकम भी विकास कार्यों के लिए खर्च नहीं कर पाया। ऐसे ही स्वास्थ्य विभाग में मशीनरी व सीएचसी बनवाने के लिए अलग-अलग मद में करीब सवा करोड़ रुपये भेजे गए। इसमें मशीनरी खरीदी व मरम्मत के नाम पर लगभग 52.75 लाख रुपये ही खर्च किया जा सका।
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वहीं, सीएचसी निर्माण के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं खर्च की गई। इसी तरह सिंचाई विभाग ने किसानों की सुविधा पर जमकर कटौती की। विभाग को एक करोड़ की राशि सिंचाई से संबंधित कार्य के लिए भेजी गई। वहीं बड़े स्तर पर निर्माण के लिए 74 लाख से अधिक दिए गए। इसमें विभाग एक रुपये भी खर्च नहीं कर पाया। वहीं, मरम्मत व सुधार के कार्यों के लिए 2 करोड़ 61 लाख से अधिक भेजे गए। इसमें भी विभाग एक करोड़ 74 लाख रुपये ही खर्च कर पाया। ऐसे ही हालात अन्य विभागों के भी हैं। इस तरह से चार विभागों को लगभग 65 करोड़ की राशि सरेंडर करनी पड़ेगी। इससे जिले के विकास में अवरोध उत्पन्न होगा।
विभाग बजट बची धनराशि
स्वास्थ्य विभाग 115.82 लाख 63.09 लाख
जलनिगम 41 करोड़ 41 करोड़
पीडब्ल्यूडी 73.9 करोड़ 43.26 करोड़
सिंचाई विभाग 4.35 करोड़ 2.61 करोड़
(ये धनराशि कुछ मदों की है। इसके अलावा अन्य मदों में भी धनराशि बची है।)