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फतेहपुरः 4.74 करोड खर्च, फिर भी शहर ओडीएफ नहीं
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डीएम आवास के पीछे कमलेश के अधूरे सौंचालय का सेफ्टी टैंक। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। अमृत योजना के चार करोड़ 74 लाख की धनराशि खर्च होने के बावजूद शहर खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) नहीं बन पाया। नगर पालिका से दोनों किस्तों का भुगतान पाने के बाद अभी तक एक हजार शौचालय अधबने हैं। ऐसे में अधूरे शौचालय वाले लाभार्थी परिवारों को खुले में शौच जाना मजबूरी है।
शहर को ओडीएफ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 2018 में अमृत योजना शुरू की थी। नगर पालिका ने शौचालय विहीन आवास वाले लाभार्थियों से आवेदन मांगे थे। इनमें 617 कुल आवेदन नगर पालिका में जमा हुए थे। नगर पालिका ने 5300 लाभार्थियों को दो किस्तों में चार-चार हजार की आर्थिक मदद दी थी। 4300 लाभार्थियों ने ही शौचालयों का निर्माण कराया। कुछ लाभार्थियों के शौचालयों में सिर्फ टैंक बने हैं तो कुछ में टैंक के ऊपर दीवारें खड़ी हैं। निर्माणाधीन शौचालयों में लोगों ने कंडा, भूसा भर दिया है। डीएम आवास के पीछे 31 शौचालय अधबने पड़े हैं। छेदी, धुन्ना, कमलेश ने बताया कि नगर पालिका से दो किस्तों में आठ हजार रुपये शौचालय निर्माण के लिए मिले थे। यह धनराशि सीवर टैंक बनाने में ही खर्च हो गई। रोज कमाने खाने वाले हैं। पैसों की व्यवस्था होने पर शौचालय का निर्माण पूरा कराया जाएगा।
शहर में अधबने शौचालयों की जानकारी नहीं है। ऐसी कोई रिपोर्ट भी नहीं मिली है। फिर भी जांच कराई जाएगी। लाभार्थी शौचालय निर्माण कार्य पूरा करा लें। न कराने पर धनराशि की वसूली होगी।
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- मीरा सिंह, ईओ
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शहर को ओडीएफ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 2018 में अमृत योजना शुरू की थी। नगर पालिका ने शौचालय विहीन आवास वाले लाभार्थियों से आवेदन मांगे थे। इनमें 617 कुल आवेदन नगर पालिका में जमा हुए थे। नगर पालिका ने 5300 लाभार्थियों को दो किस्तों में चार-चार हजार की आर्थिक मदद दी थी। 4300 लाभार्थियों ने ही शौचालयों का निर्माण कराया। कुछ लाभार्थियों के शौचालयों में सिर्फ टैंक बने हैं तो कुछ में टैंक के ऊपर दीवारें खड़ी हैं। निर्माणाधीन शौचालयों में लोगों ने कंडा, भूसा भर दिया है। डीएम आवास के पीछे 31 शौचालय अधबने पड़े हैं। छेदी, धुन्ना, कमलेश ने बताया कि नगर पालिका से दो किस्तों में आठ हजार रुपये शौचालय निर्माण के लिए मिले थे। यह धनराशि सीवर टैंक बनाने में ही खर्च हो गई। रोज कमाने खाने वाले हैं। पैसों की व्यवस्था होने पर शौचालय का निर्माण पूरा कराया जाएगा।
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शहर में अधबने शौचालयों की जानकारी नहीं है। ऐसी कोई रिपोर्ट भी नहीं मिली है। फिर भी जांच कराई जाएगी। लाभार्थी शौचालय निर्माण कार्य पूरा करा लें। न कराने पर धनराशि की वसूली होगी।
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- मीरा सिंह, ईओ