{"_id":"5f84a5be8ebc3e9bcc42c6c2","slug":"children-reach-school-despite-ban-fatehpur-news-knp588105340","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिबंध के बावजूद स्कूल पहुंचे बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिबंध के बावजूद स्कूल पहुंचे बच्चे
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालय मऊ में किताबों का बैग लिए बैठे बच्चे
- फोटो : FATEHPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहपुर। अभिभावक कोरोना संक्रमण के खतरे को हल्के में ले रहे हैं। परिषदीय स्कूलों के शिक्षक भी बच्चों को कोरोना संक्रमण के खतरे में डालने में सहयोग कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण को नजरंदाज कर परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों ने बच्चों का बुलाना शुरू कर दिया है।
शासन से रोक के बावजूद परिषदीय स्कूलों में बच्चों का आना शुरू हो गया है। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय परिसर में यूनिफार्म से लैस किताबों का बैग लिए बच्चे बैठे दिखे। सुबह के 9:15 बजे शिक्षक स्कूल पहुंचे। सभी बच्चे बिना सामाजिक दूरी के मानक के विपरीत स्कूल परिसर में बैठे शिक्षकों के आने का इंतजार कर रहे थे। छात्र रामू, नीरज ने बताया कि यूनिफार्म मिलने के बाद से वह स्कूल पढ़ने आ रहे हैं। स्कूल से किताबें भी मिल गई हैं। मास्टर साहब भी किताबें पढ़ा रहे हैं। अभी दोपहर को खाना स्कूल में नहीं मिल रहा है। टिफिन घर से लाना पड़ रहा है।
खास बात तो यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना का पीक चल रहा है। रोज मिलने वाले कोरोना पॉजिटिव रोगियों में 75 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों के होते हैं। ऐसे में स्कूल आने वाले बच्चों पर कोरोना संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।
विज्ञापन
मना करने पर भी स्कूल आते हैं बच्चे
बीईओ नगर नाहिद इकबाल फारुकी ने बताया कि गांवों में शिक्षकों के मना करने के बावजूद बच्चे स्कूल आ जाते हैं। ऐसे में शिक्षक बच्चों को होमवर्क देकर घर लौटा दे रहे हैं। इसके बाद शिक्षक द्वारा अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को स्कूल न भेजने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन शिक्षकों के बार-बार मना करने के बावजूद बच्चे स्कूल आने से नहीं मान रहे हैं।
विज्ञापन
शासन से रोक के बावजूद परिषदीय स्कूलों में बच्चों का आना शुरू हो गया है। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय परिसर में यूनिफार्म से लैस किताबों का बैग लिए बच्चे बैठे दिखे। सुबह के 9:15 बजे शिक्षक स्कूल पहुंचे। सभी बच्चे बिना सामाजिक दूरी के मानक के विपरीत स्कूल परिसर में बैठे शिक्षकों के आने का इंतजार कर रहे थे। छात्र रामू, नीरज ने बताया कि यूनिफार्म मिलने के बाद से वह स्कूल पढ़ने आ रहे हैं। स्कूल से किताबें भी मिल गई हैं। मास्टर साहब भी किताबें पढ़ा रहे हैं। अभी दोपहर को खाना स्कूल में नहीं मिल रहा है। टिफिन घर से लाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
खास बात तो यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना का पीक चल रहा है। रोज मिलने वाले कोरोना पॉजिटिव रोगियों में 75 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों के होते हैं। ऐसे में स्कूल आने वाले बच्चों पर कोरोना संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।
विज्ञापन
मना करने पर भी स्कूल आते हैं बच्चे
बीईओ नगर नाहिद इकबाल फारुकी ने बताया कि गांवों में शिक्षकों के मना करने के बावजूद बच्चे स्कूल आ जाते हैं। ऐसे में शिक्षक बच्चों को होमवर्क देकर घर लौटा दे रहे हैं। इसके बाद शिक्षक द्वारा अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को स्कूल न भेजने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन शिक्षकों के बार-बार मना करने के बावजूद बच्चे स्कूल आने से नहीं मान रहे हैं।