{"_id":"36-181420","slug":"Fatehpur-181420-36","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में तो सूखा पड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में तो सूखा पड़ा
Fatehpur
Updated Sun, 11 May 2014 05:31 AM IST
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फतेहपुर। अधिकारियों के काम न करने की आदत पब्लिक पर किस तरह भारी पड़ती है, गर्मी में सार्वजनिक स्थानों पर इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। तपती दोपहरी, सूखते हलक और पीनी की तलाश। गर्मी के पूर्व बजट के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने की आदत बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर कर देती है। पब्लिक प्यास से व्याकुल होकर भटक रही है। दूर-दराज से जिला मुख्यालय आने वाली यह पब्लिक अपना जरूरी काम भूल कर पानी खोजती घूम रही है। इसके उलट अफसर और उनके मुलाजिम आरओ और वाटर फ्रीजर से गल तर किए जा रहे हैं।
कलेक्ट्रेट - मासूम को कैसे चुप कराएं
स्थान- कलेेक्ट्रेट कैंपस। समय- दोपहर पौने दो बजे। एडीएम दफ्तर के बगल में लगा फ्रीजर अर्से से खराब है। ठीक इसके सामने लगी सीमेंटेड फुटबालनुमा पानी की टंकी औधें मुंह पड़ी है। टंकी के समीप दो महिलाएं बैठी हैं। इनमें से एक के गोद में दुबका मासूम रोए जा रहा है। दूसरी महिला रोते मासूम को समझते हुए पानी के लिए पीछे मुड़ती है तो टंकी का हश्र देखकर उससे रहा नहीं जाता। वह पानी के लिए साथ लाई बोतल लेकर शिकंजी के ठेला की ओर बढ़ जाती है। जबकि कलेक्ट्रेट के कोषागार विभाग के पास अफसरों और कर्मचारियों के लिए वाटर कूलर लगा है।
तहसील - घूंट भर पानी मानो जान मिली
स्थान- तहसील कैंपस। समय- दोपहर एक बजे। अधिवक्ता के चैंबर में अधेड़ व्यक्ति बैठा है। बार बार गले में पड़े गमछे से बदन पोछ रहा है। अमुक व्यक्ति के बगल में बैठे एक युवक से रहा नहीं जाता और वह साथ में ली पानी की बोतल थमा देता है। पानी की कुछ घूंट पीने के बाद बुझे-बुझे इस अधेड़ के चेहरे में थोड़ी सी जान दौड़ने लगती है। दरअसल, यहां पर लगा वाटर फ्रीजर खराब पड़ा है। जिससे न केवल अधिवक्ता, बल्कि विभिन्न मामलों को लेकर आने वाली पब्लिक हर रोज इसी तरह से प्यास से व्याकुल होने की ताकीद कर रही है। कर्मचारी अपने अपने दफ्तर में वाटर कूलर रखे हैं।
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सदर अस्पताल - ठंडा पानी तो दूर की बात
स्थान- सदर अस्पताल। समय- दोपहर बारह बजे। ओपीडी में भीड़ जमा है। सीमेंटेड सीट पर मरीज बैठे हैं। इन्हीं में से एक महिला भी है जो शायद अकेली आई है। बगल में बैठी एक अन्य महिला से कहती है कि आधा घंटा से प्यास लगी है। इस पर पानी की बात कर रही अमुक महिला से उक्त महिला फ्रीजर लगे होने की बात करती है। जिस पर वह वाटर फ्रीजर की ओर बढ़ती है लेकिन उसे वहां ठंडा पानी तो दूर, गरम पानी तक मयस्सर नहीं होता। जिससे महिला सूखते हलक के हालात बया करते फिर बारी के इंतजार में आकर चैंबर के बाहर बैठ जाती है। वहीं, डाक्टरों के लिए चैंबर में फ्रीजर की व्यवस्थाएं हैं।
हिकमतउल्ला पार्क - मजबूरी जो न कराए
स्थान- डिप्टी कलक्टर हिकमतउल्ला पार्क । समय- साढ़े ग्यारह बजे। बिंदकी बस स्टाप की ओर से आ रहा एक दंपति पानी की टंकी देखकर ठहर जाता है। दंपति जैसे ही नजदीक पहुंचता है तो हलक तर करने का इरादा त्याग देता है। क्योंकि पानी की टंकी के इर्द-गिर्द जमा गंदगी इसकी इजाजत नहीं देती। लेकिन तभी गरमी से लालसुर्ख चेहरा मासूम का देखकर उक्त दंपति को अपनी गलती का अहसास होता है। लेकिन तभी बच्चा का लालसुर्ख चेहरा ऐसा करने से मना करता है। जिसके बाद न दंपत्ति और मासूम इसी पानी को पीकर आगे बढ़ जाते हैं। जबकि नगर पालिका के कर्मचारियों के लिए कैंपस में वाटर फ्रीजर लगा है।
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कलेक्ट्रेट - मासूम को कैसे चुप कराएं
स्थान- कलेेक्ट्रेट कैंपस। समय- दोपहर पौने दो बजे। एडीएम दफ्तर के बगल में लगा फ्रीजर अर्से से खराब है। ठीक इसके सामने लगी सीमेंटेड फुटबालनुमा पानी की टंकी औधें मुंह पड़ी है। टंकी के समीप दो महिलाएं बैठी हैं। इनमें से एक के गोद में दुबका मासूम रोए जा रहा है। दूसरी महिला रोते मासूम को समझते हुए पानी के लिए पीछे मुड़ती है तो टंकी का हश्र देखकर उससे रहा नहीं जाता। वह पानी के लिए साथ लाई बोतल लेकर शिकंजी के ठेला की ओर बढ़ जाती है। जबकि कलेक्ट्रेट के कोषागार विभाग के पास अफसरों और कर्मचारियों के लिए वाटर कूलर लगा है।
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तहसील - घूंट भर पानी मानो जान मिली
स्थान- तहसील कैंपस। समय- दोपहर एक बजे। अधिवक्ता के चैंबर में अधेड़ व्यक्ति बैठा है। बार बार गले में पड़े गमछे से बदन पोछ रहा है। अमुक व्यक्ति के बगल में बैठे एक युवक से रहा नहीं जाता और वह साथ में ली पानी की बोतल थमा देता है। पानी की कुछ घूंट पीने के बाद बुझे-बुझे इस अधेड़ के चेहरे में थोड़ी सी जान दौड़ने लगती है। दरअसल, यहां पर लगा वाटर फ्रीजर खराब पड़ा है। जिससे न केवल अधिवक्ता, बल्कि विभिन्न मामलों को लेकर आने वाली पब्लिक हर रोज इसी तरह से प्यास से व्याकुल होने की ताकीद कर रही है। कर्मचारी अपने अपने दफ्तर में वाटर कूलर रखे हैं।
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सदर अस्पताल - ठंडा पानी तो दूर की बात
स्थान- सदर अस्पताल। समय- दोपहर बारह बजे। ओपीडी में भीड़ जमा है। सीमेंटेड सीट पर मरीज बैठे हैं। इन्हीं में से एक महिला भी है जो शायद अकेली आई है। बगल में बैठी एक अन्य महिला से कहती है कि आधा घंटा से प्यास लगी है। इस पर पानी की बात कर रही अमुक महिला से उक्त महिला फ्रीजर लगे होने की बात करती है। जिस पर वह वाटर फ्रीजर की ओर बढ़ती है लेकिन उसे वहां ठंडा पानी तो दूर, गरम पानी तक मयस्सर नहीं होता। जिससे महिला सूखते हलक के हालात बया करते फिर बारी के इंतजार में आकर चैंबर के बाहर बैठ जाती है। वहीं, डाक्टरों के लिए चैंबर में फ्रीजर की व्यवस्थाएं हैं।
हिकमतउल्ला पार्क - मजबूरी जो न कराए
स्थान- डिप्टी कलक्टर हिकमतउल्ला पार्क । समय- साढ़े ग्यारह बजे। बिंदकी बस स्टाप की ओर से आ रहा एक दंपति पानी की टंकी देखकर ठहर जाता है। दंपति जैसे ही नजदीक पहुंचता है तो हलक तर करने का इरादा त्याग देता है। क्योंकि पानी की टंकी के इर्द-गिर्द जमा गंदगी इसकी इजाजत नहीं देती। लेकिन तभी गरमी से लालसुर्ख चेहरा मासूम का देखकर उक्त दंपति को अपनी गलती का अहसास होता है। लेकिन तभी बच्चा का लालसुर्ख चेहरा ऐसा करने से मना करता है। जिसके बाद न दंपत्ति और मासूम इसी पानी को पीकर आगे बढ़ जाते हैं। जबकि नगर पालिका के कर्मचारियों के लिए कैंपस में वाटर फ्रीजर लगा है।