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Fatehpur News: रक्षाबंधन पर नौ करोड़ का व्यवसाय, खूब बिकीं मिठाईयां
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फतेहपुर। रक्षाबंधन में मिठाई और राखी विक्रेताओं की चांदी रही। रक्षाबंधन पर जिलेभर में करीब सजी चार हजार मिठाई की दुकानों में करीब सात करोड़ की बिक्री हुई। इसके साथ ही सोने-चांदी की राखी मिलाकर करीब दो करोड़ की राखियां बिकी। इस तरह से करीब नौ करोड़ का रक्षाबंधन पर कारोबार हुआ। उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष किशन मेहरोत्रा का दावा है कि जिले भर में करीब सात करोड़ की मिठाई की बिक्री हुई है और सोनें-चांदी का राखियां मिलाकर करीब दो करोड़ की राखियों की बिक्री हुई है। इस तरह से राखी और मिठाई मिलाकर रक्षाबंधन पर करीब नौ करोड़ का व्यवसाय हुआ है।
रक्षाबंधन भाई बहनों के अटूट प्रेम का त्योहार है। इस दिन भाई की कलाई पर बहनें राखी बांधती हैं। वहीं भाई भी उनकी जीवन भर रक्षा करने का वादा करते हैं। यूं तो भाई-बहनों के बीच नोंकझोक का सिलसिला पूरे साल रहता पर इस दिन प्रेम की लड़ाई का मजा ही कुछ अलग होता है। राखी बांधने के बाद भाई से मनमुताबिक गिफ्ट न मिलने पर बहन-भाई में एक प्यारी लड़ाई का सिलसिला चलता है। वहीं अंत में भाई भी हार मानकर बहनों की सारी ख्वाहिश पूरी कर देते हैं। भैया-बहन का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। सुबह से मिठाई और राखियों की दुकानों में महिलाओं की भीड़ रही। बहनों ने मिठाई और राखियां खरीदी। अधिकांश बहनों ने साधारण राखियां खरीदी, लेकिन कई बहनों ने चांदी और सोने की राखियां खरीदकर भाइयों की कलाई में बांधी। बहनों ने भाइयों की कलाई में राखी बांधकर दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने बहनों की आजीवन रक्षा के साथ उपहार प्रदान किया। रक्षाबंधन पर सुबह से शहर की सड़कों पर चहल पहल रही। यही स्थिति ग्रामीणांचल में भी रही।
खखरेरू प्रतिनिधि के अनुसार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। घर-घर में बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना की। बदले में भाइयों ने बहनों की रक्षा का वचन देकर उपहार भेंटकर विदा किया।
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गांवों के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। कई सामाजिक संगठनों ने अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में जाकर राखी बांधी और मिठाइयां वितरित की।
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रक्षाबंधन भाई बहनों के अटूट प्रेम का त्योहार है। इस दिन भाई की कलाई पर बहनें राखी बांधती हैं। वहीं भाई भी उनकी जीवन भर रक्षा करने का वादा करते हैं। यूं तो भाई-बहनों के बीच नोंकझोक का सिलसिला पूरे साल रहता पर इस दिन प्रेम की लड़ाई का मजा ही कुछ अलग होता है। राखी बांधने के बाद भाई से मनमुताबिक गिफ्ट न मिलने पर बहन-भाई में एक प्यारी लड़ाई का सिलसिला चलता है। वहीं अंत में भाई भी हार मानकर बहनों की सारी ख्वाहिश पूरी कर देते हैं। भैया-बहन का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। सुबह से मिठाई और राखियों की दुकानों में महिलाओं की भीड़ रही। बहनों ने मिठाई और राखियां खरीदी। अधिकांश बहनों ने साधारण राखियां खरीदी, लेकिन कई बहनों ने चांदी और सोने की राखियां खरीदकर भाइयों की कलाई में बांधी। बहनों ने भाइयों की कलाई में राखी बांधकर दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने बहनों की आजीवन रक्षा के साथ उपहार प्रदान किया। रक्षाबंधन पर सुबह से शहर की सड़कों पर चहल पहल रही। यही स्थिति ग्रामीणांचल में भी रही।
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खखरेरू प्रतिनिधि के अनुसार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। घर-घर में बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना की। बदले में भाइयों ने बहनों की रक्षा का वचन देकर उपहार भेंटकर विदा किया।
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गांवों के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। कई सामाजिक संगठनों ने अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में जाकर राखी बांधी और मिठाइयां वितरित की।