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आलू के भाव गिरने से किसान चिंतित
Updated Sun, 14 Jan 2018 10:53 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। आलू के भाव में गिरावट से किसान चिंतित हैं। सब्जी मंडियों में अगेती आलू का भाव 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल है। इसमें खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरों का खर्च तो निकल आ रहा है, लेकिन लाभ नहीं मिल रहा है।
आलू की बंपर पैदावार ने एक बार फिर किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है। लगातार दो साल से आलू की फसल में घाटा उठा रहे किसानों को इस बार भी सही भाव मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
जनवरी में आलू का थोक भाव 450-500 रुपये है। इसमें किसानों को 15 रुपये की बोरी, मंडी तक आलू पहुंचाने में 20 से 30 रुपये प्रति बोरी का भाड़ा और खुदाई में मजदूरों का खर्च देना पड़ता है। जो आढ़ती कमीशन और यह सब खर्च जोड़कर करीब 60-70 रुपये बोरी का खर्च हो रहा है। ऐसे में 120 से 140 रुपये क्विंटल का खर्च आता है। इसके बाद आलू का बीज, खाद, बुआई और सिंचाई का खर्च जोड़ दिया जाए तो सब बराबर हो जाता है। किसानों को आलू में बचत नहीं हो रही है।
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मंडासराय गांव के किसान कल्लू सिंह ने बताया कि पंजाब प्रांत से 400 रुपये बोरी का आलू खरीद कर लाए हैं। 200 रुपये प्रति बोरी का भाड़ा लगा था। एक बीघा में दो बोरी डीएपी, पोटास, सल्फर खाद का बुआई के समय छिड़काव किए थे। एक बीघा आलू की फसल में करीब 12 से 14 हजार रुपये लागत आती है। मंडी में आलू बेचने के बाद 12-13 हजार रुपये ही मिलते हैं।
किसान हीरालाल पाल ने बताया कि दो साल से आलू की फसल में लागत नहीं निकल रही है। खाद, बीज का खर्च घर से चला जाता है। इस बार बीज सस्ता होने पर कुछ लाभ मिलने के आसार थे, लेकिन अभी से मंडी में आलू के भाव बहुत कम हो गए हैं।
खागा मंडी के आढ़ती रामू मौर्य ने बताया कि मंडी में आलू की आवक बढ़ने से भाव कम हो गए हैं। एक सप्ताह पहले 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल आलू बिक रहा था।
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फतेहपुर। आलू के भाव में गिरावट से किसान चिंतित हैं। सब्जी मंडियों में अगेती आलू का भाव 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल है। इसमें खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरों का खर्च तो निकल आ रहा है, लेकिन लाभ नहीं मिल रहा है।
आलू की बंपर पैदावार ने एक बार फिर किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है। लगातार दो साल से आलू की फसल में घाटा उठा रहे किसानों को इस बार भी सही भाव मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
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जनवरी में आलू का थोक भाव 450-500 रुपये है। इसमें किसानों को 15 रुपये की बोरी, मंडी तक आलू पहुंचाने में 20 से 30 रुपये प्रति बोरी का भाड़ा और खुदाई में मजदूरों का खर्च देना पड़ता है। जो आढ़ती कमीशन और यह सब खर्च जोड़कर करीब 60-70 रुपये बोरी का खर्च हो रहा है। ऐसे में 120 से 140 रुपये क्विंटल का खर्च आता है। इसके बाद आलू का बीज, खाद, बुआई और सिंचाई का खर्च जोड़ दिया जाए तो सब बराबर हो जाता है। किसानों को आलू में बचत नहीं हो रही है।
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मंडासराय गांव के किसान कल्लू सिंह ने बताया कि पंजाब प्रांत से 400 रुपये बोरी का आलू खरीद कर लाए हैं। 200 रुपये प्रति बोरी का भाड़ा लगा था। एक बीघा में दो बोरी डीएपी, पोटास, सल्फर खाद का बुआई के समय छिड़काव किए थे। एक बीघा आलू की फसल में करीब 12 से 14 हजार रुपये लागत आती है। मंडी में आलू बेचने के बाद 12-13 हजार रुपये ही मिलते हैं।
किसान हीरालाल पाल ने बताया कि दो साल से आलू की फसल में लागत नहीं निकल रही है। खाद, बीज का खर्च घर से चला जाता है। इस बार बीज सस्ता होने पर कुछ लाभ मिलने के आसार थे, लेकिन अभी से मंडी में आलू के भाव बहुत कम हो गए हैं।
खागा मंडी के आढ़ती रामू मौर्य ने बताया कि मंडी में आलू की आवक बढ़ने से भाव कम हो गए हैं। एक सप्ताह पहले 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल आलू बिक रहा था।