{"_id":"5a5ce8294f1c1b89268b48cb","slug":"131516038185-fatehpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमडीएम के लिए एनजीओ करेंगे राशन की सप्लाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमडीएम के लिए एनजीओ करेंगे राशन की सप्लाई
Updated Mon, 15 Jan 2018 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर।
अब सरकारी स्कूल में एमडीएम के लिए स्वयं सहायता समूह राशन की सप्लाई करेंगे। जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों को इस नई व्यवस्था के तहत काम देना शुरू भी कर दिया है। सरकारी योजनाओं को सरकारी काम से सीधे जोड़कर समूह में जुड़े लोगों को लाभ देना इसका उद्देश्य है। फिलहाल यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ परिषदीय स्कूलों में शुरू होगी।
स्वयं सहायता समूह के जरिए दूध, सब्जी, जेली, मसाले आदि होते हैं। स्थानीय प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों को और भी स्वावलंबी बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए यह नई जिम्मेदारी सौंपी है। उपायुक्त स्वत: रोजगार ने इसका खाका तैयार किया है। सब कुछ ठीक रहा तो सभी स्कूलों में इसे लागू कर दिया जाएगा। इस व्यवस्था को शिक्षक समाज बेहतर मान रहा है। उसका मानना है कि स्वयं सहायता समूह से सामान की आपूर्ति होने से गुणवत्ता भी बेहतर होगी। हरी सब्जी, ताजे फल और दूध की उपलब्धता हो सकेगी।
कस्तूरबा में शुरू कर दिया गया काम
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में स्वयं सहायता समूह के अनाज की सप्लाई शुरू कर दी है। मलवां ब्लाक के कुंवरपुर, हसवा के थरियांव, भिटौरा, हथगाम और असोथर के स्कूल में यह संचालित हैं।
विज्ञापन
सभी ब्लाकों में खुल चुकी हैं कैंटीन
स्वयं सहायता समूह के जरिए सभी ब्लाक मुख्यालयों में कैंटीन संचालित कराई जा रही हैं। उपायुक्त सुखराज बंधु का कहना है कि फतेहपुर पहला जिला है, जिसे यह सुविधा मिली है। अधिकारी का मानना है कि इस कैंटीन से न केवल ब्लाक मुख्यालय के कर्मचारियों को फायदा हो रहा बल्कि इनके 24 घंटे काम करने से सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए भी खाने पीने का इंतजाम हो रहा है।
विज्ञापन
फतेहपुर।
अब सरकारी स्कूल में एमडीएम के लिए स्वयं सहायता समूह राशन की सप्लाई करेंगे। जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों को इस नई व्यवस्था के तहत काम देना शुरू भी कर दिया है। सरकारी योजनाओं को सरकारी काम से सीधे जोड़कर समूह में जुड़े लोगों को लाभ देना इसका उद्देश्य है। फिलहाल यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ परिषदीय स्कूलों में शुरू होगी।
स्वयं सहायता समूह के जरिए दूध, सब्जी, जेली, मसाले आदि होते हैं। स्थानीय प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों को और भी स्वावलंबी बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए यह नई जिम्मेदारी सौंपी है। उपायुक्त स्वत: रोजगार ने इसका खाका तैयार किया है। सब कुछ ठीक रहा तो सभी स्कूलों में इसे लागू कर दिया जाएगा। इस व्यवस्था को शिक्षक समाज बेहतर मान रहा है। उसका मानना है कि स्वयं सहायता समूह से सामान की आपूर्ति होने से गुणवत्ता भी बेहतर होगी। हरी सब्जी, ताजे फल और दूध की उपलब्धता हो सकेगी।
विज्ञापन
कस्तूरबा में शुरू कर दिया गया काम
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में स्वयं सहायता समूह के अनाज की सप्लाई शुरू कर दी है। मलवां ब्लाक के कुंवरपुर, हसवा के थरियांव, भिटौरा, हथगाम और असोथर के स्कूल में यह संचालित हैं।
विज्ञापन
सभी ब्लाकों में खुल चुकी हैं कैंटीन
स्वयं सहायता समूह के जरिए सभी ब्लाक मुख्यालयों में कैंटीन संचालित कराई जा रही हैं। उपायुक्त सुखराज बंधु का कहना है कि फतेहपुर पहला जिला है, जिसे यह सुविधा मिली है। अधिकारी का मानना है कि इस कैंटीन से न केवल ब्लाक मुख्यालय के कर्मचारियों को फायदा हो रहा बल्कि इनके 24 घंटे काम करने से सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए भी खाने पीने का इंतजाम हो रहा है।