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बिना एनओसी फिर शीतगृह चलाने की तैयारी
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शहर की ठंडी सड़क स्थित कोल्ड स्टोरेज।
- फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। आलू की फसल तकरीबन तैयार है। इन्हें भंडारित करने की तैयारी कर रहे शीतगृहों ने अभी तक न तो लाइसेंस का नवीनीकरण कराया और न ही अग्निशमन विभाग से एनओसी ली। बताया जाता है कि जिले के 54 शीतगृह संचालकों ने अभी तक लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया है। 40 शीतगृहों के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है।
जिले में प्रमुख रूप से आलू की खेती की जाती है। आलू भंडारण के लिए जिले में 94 शीतगृह संचालित हैं। इनमें आठ लाख 80 हजार 646 मीट्रिक टन आलू भंडारण क्षमता है। इसके अलावा इस वर्ष में एक नया शीतगृह भी चालू होने वाला है। अब जिले में 95 शीतगृहों में आलू भंडारण किया जा सकेगा।
आलू की फसल भी तैयार है। हालांकि बारिश हो जाने की वजह से अभी खोदाई नहीं हो रही है। खोदाई शुरू होते ही आलू भंडारण होने लगेगा। शीतगृहों में भी आलू भंडारण की तैयारी जा चुकी है। कुछ शीतगृहों में पूजा-पाठ के साथ भंडारण का शुभारंभ भी हो गया है, लेकिन अभी तक एक भी शीतगृह का नवीनीकरण नहीं हुआ है।
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विभागीय जानकारी के अनुसार करीब 40 शीतगृहों के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। शेष 54 शीतगृह संचालकों ने नवीनीकरण के लिए अभी आवेदन भी नहीं किया है। अधिकांश शीतगृहों में मानक के अनुसार अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगे हैं। इस कारण अग्निशमन विभाग ने इन्हें एनओसी भी जारी नहीं की है। पिछले वर्ष भी बिना एनओसी के ही शीतगृह चलते रहे। इनके खिलाफ अग्निशमन विभाग ने कोई कार्रवाई भी नहीं की है। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। शीतगृह में आग लगने से कोई अनहोनी होने पर इसका जिम्मेदार कौन होगा।
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जिले में प्रमुख रूप से आलू की खेती की जाती है। आलू भंडारण के लिए जिले में 94 शीतगृह संचालित हैं। इनमें आठ लाख 80 हजार 646 मीट्रिक टन आलू भंडारण क्षमता है। इसके अलावा इस वर्ष में एक नया शीतगृह भी चालू होने वाला है। अब जिले में 95 शीतगृहों में आलू भंडारण किया जा सकेगा।
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आलू की फसल भी तैयार है। हालांकि बारिश हो जाने की वजह से अभी खोदाई नहीं हो रही है। खोदाई शुरू होते ही आलू भंडारण होने लगेगा। शीतगृहों में भी आलू भंडारण की तैयारी जा चुकी है। कुछ शीतगृहों में पूजा-पाठ के साथ भंडारण का शुभारंभ भी हो गया है, लेकिन अभी तक एक भी शीतगृह का नवीनीकरण नहीं हुआ है।
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विभागीय जानकारी के अनुसार करीब 40 शीतगृहों के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। शेष 54 शीतगृह संचालकों ने नवीनीकरण के लिए अभी आवेदन भी नहीं किया है। अधिकांश शीतगृहों में मानक के अनुसार अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगे हैं। इस कारण अग्निशमन विभाग ने इन्हें एनओसी भी जारी नहीं की है। पिछले वर्ष भी बिना एनओसी के ही शीतगृह चलते रहे। इनके खिलाफ अग्निशमन विभाग ने कोई कार्रवाई भी नहीं की है। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। शीतगृह में आग लगने से कोई अनहोनी होने पर इसका जिम्मेदार कौन होगा।