{"_id":"6a93273d40b3d650b8080143","slug":"maize-prices-have-risen-steadily-due-to-loading-activity-reaching-2350-farrukhabad-news-c-222-1-frk1007-147679-2026-08-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: लोडिंग से मक्का के दाम लगातार बढ़े, 2350 पहुंचा भाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: लोडिंग से मक्का के दाम लगातार बढ़े, 2350 पहुंचा भाव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्रुखाबाद/कमालगंज। इस साल 1900 रुपये क्विंटल से शुरू हुआ मक्का का भाव अब 2350 रुपये पहुंच गया है। दरअसल, इस बार मालगाड़ी से दक्षिण व दूरस्थ राज्यों में मक्का भेजा गया। इसके चलते निकटवर्ती राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात व हरियाणा की एथेनॉल फैक्ट्रियों में पर्याप्त मांग बनी हुई है। यही वजह है कि सीजन की शुरुआत से अब तक मक्का के दाम 450 रुपये बढ़ चुके हैं।
आलू की खेती में बड़े घाटे से घिरे किसानों को मक्का ने राहत दी। जून में फसल तैयार होने पर मक्का मंडियों में पहुंचा तो किसानों को 1900 रुपये क्विंटल के हिसाब से दाम मिले। इसके बाद भाव थोड़े-थोड़े बढ़ते रहे। ज्यादातर किसानों को 1950 से दो हजार रुपये क्विंटल का भाव मिल पाया। अब भाव 2350 रुपये पहुंच गया है। फर्रुखाबाद व नीबकरोरी रेलवे स्टेशन से व्यापारियों ने कुल 40 रैक की लोडिंग कराकर मक्का दूरस्थ राज्यों में भेजा। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा आदि राज्यों में भी रैक भेजी गई।
कमालगंज मंडी में करीब 60 ट्रक मक्का
व्यापारियों के अनुसार दूरस्थ राज्यों में रैक जाने से ट्रकों से आसपास के राज्यों में मक्का की भरपूर मांग बनी हुई है। पहले मुर्गी दाना, पशु आहार, खाद्य वस्तुओं के लिए मांग चल रही थी। फिर सबसे ज्यादा एथेनॉल फैक्ट्रियों से मांग आ गई। कमालगंज मंडी में अभी 50 से 60 ट्रक मक्का है, रोजाना कुछ ट्रकों की लोडिंग हो रही है।
विज्ञापन
आलू में एक करोड़ फंसा, घाटा निकालने की कवायद
- मक्का का रेट बढ़ने का फायदा किसानों से ज्यादा आढ़तियों को मिला है। हालांकि, कमालगंज में पिछले साल 30 दिसंबर को शुरू हुई आलू मंडी में कई आढ़तियों का पैसा मंदी से फंस गया। आढ़ती संघ के अध्यक्ष सुनील गुप्ता कहते हैं कि किसान से मक्का लेने के बाद आढ़ती अपना माल उसी समय बेचते रहे, जगह की कमी व अन्य वजहों से ज्यादा माल रोका नहीं जा सका। जिन लोगों के पास मक्का का थोड़ा-बहुत स्टॉक रह गया था, उनको बढ़े रेट का फायदा हो सकता है। आलू में आढ़तियों का एक करोड़ रुपये अब भी फंसा है। आलू के घाटे की कुछ प्रतिशत ही भरपाई हो सकती है। फर्रुखाबाद के मंडी सचिव अनूप दीक्षित का कहना है कि फर्रुखाबाद से ही करीब 20-22 रैक मक्का की लोडिंग हुई।
विज्ञापन
आलू की खेती में बड़े घाटे से घिरे किसानों को मक्का ने राहत दी। जून में फसल तैयार होने पर मक्का मंडियों में पहुंचा तो किसानों को 1900 रुपये क्विंटल के हिसाब से दाम मिले। इसके बाद भाव थोड़े-थोड़े बढ़ते रहे। ज्यादातर किसानों को 1950 से दो हजार रुपये क्विंटल का भाव मिल पाया। अब भाव 2350 रुपये पहुंच गया है। फर्रुखाबाद व नीबकरोरी रेलवे स्टेशन से व्यापारियों ने कुल 40 रैक की लोडिंग कराकर मक्का दूरस्थ राज्यों में भेजा। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा आदि राज्यों में भी रैक भेजी गई।
विज्ञापन
कमालगंज मंडी में करीब 60 ट्रक मक्का
व्यापारियों के अनुसार दूरस्थ राज्यों में रैक जाने से ट्रकों से आसपास के राज्यों में मक्का की भरपूर मांग बनी हुई है। पहले मुर्गी दाना, पशु आहार, खाद्य वस्तुओं के लिए मांग चल रही थी। फिर सबसे ज्यादा एथेनॉल फैक्ट्रियों से मांग आ गई। कमालगंज मंडी में अभी 50 से 60 ट्रक मक्का है, रोजाना कुछ ट्रकों की लोडिंग हो रही है।
विज्ञापन
आलू में एक करोड़ फंसा, घाटा निकालने की कवायद
- मक्का का रेट बढ़ने का फायदा किसानों से ज्यादा आढ़तियों को मिला है। हालांकि, कमालगंज में पिछले साल 30 दिसंबर को शुरू हुई आलू मंडी में कई आढ़तियों का पैसा मंदी से फंस गया। आढ़ती संघ के अध्यक्ष सुनील गुप्ता कहते हैं कि किसान से मक्का लेने के बाद आढ़ती अपना माल उसी समय बेचते रहे, जगह की कमी व अन्य वजहों से ज्यादा माल रोका नहीं जा सका। जिन लोगों के पास मक्का का थोड़ा-बहुत स्टॉक रह गया था, उनको बढ़े रेट का फायदा हो सकता है। आलू में आढ़तियों का एक करोड़ रुपये अब भी फंसा है। आलू के घाटे की कुछ प्रतिशत ही भरपाई हो सकती है। फर्रुखाबाद के मंडी सचिव अनूप दीक्षित का कहना है कि फर्रुखाबाद से ही करीब 20-22 रैक मक्का की लोडिंग हुई।