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गांव की बेटी ने निशानेबाजी में कमाया नाम
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प्रियंका दुबे। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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कायमगंज। एनसीसी की रायफल से निशानेबाजी शुरू करने वाले रशीदाबाद की बेटी ने प्रदेश और देश में सफलता के झंडे गाड़े। पारिवारिक समस्याओं के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं कर सकीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से पुलिस में सिपाही की नौकरी कर ली लेकिन दिन में बड़ी कामयाबी की हसरत अभी जिंदा है। अब जल्द ही खुद की रायफल खरीदकर फिर अभ्यास शुरू करेंगी।
कायमगंज से 10 किमी दूर बसे गांव रशीदाबाद निवासी शिक्षामित्र अरविंद दुबे की बेटी प्रियंका ने हाईस्कूल पास कर शकुंतला देवी इंटर कालेज में दाखिला लिया। वहां कोच सिलकी मिश्रा के सानिध्य में आकर एनसीसी ज्वाइन कर ली। वर्ष 2011 में शूटिंग में रुचि बढ़ने पर एनसीसी की रायफल से अभ्यास शुरू कर दिया। वर्ष 2012 में फतेहगढ़ के आर्मी स्कूल में तीन यूपी बटालियन व चार यूपी बटालियन अलीगढ़ की ओर से निशानेबाजी में मौका मिला। इसमें प्रियंका ने गोल्ड मेडल जीता। शूटिंग में बेहतर प्रदर्शन करने पर वर्ष 2015 में सीएम ने पदक दिया था। कुछ समय बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने का भी मौका मिला लेकिन पारिवारिक समस्याओं के कारण प्रतिभाग नहीं कर सकीं।
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वह पांच लाख रुपये से खुद की रायफल नहीं खरीद पाईं। अक्तूबर 2020 में पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती हो गईं। इस समय कानपुर के कल्याणपुर थाने में तैनात हैं। प्रियंका ने कहा कि शूटिंग का शौक अब भी है। जल्द ही रायफल खरीदकर फिर अभ्यास शुरू कर देंगी। प्रियंका के दो छोटे भाई पढ़ाई कर रहे हैं।
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प्रियंका साहसी बालिका टीम की भी सदस्य हैं। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान प्रशासन ने एलवाई डिग्री कालेज में स्पेशल फ्लू कैंप लगाया था। यहां रोज हजारों प्रवासी आते थे। प्रियंका ने पूरे समय वहां ड्यूटी की और कोरोना योद्धा के रूप में कार्य किया।
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कायमगंज से 10 किमी दूर बसे गांव रशीदाबाद निवासी शिक्षामित्र अरविंद दुबे की बेटी प्रियंका ने हाईस्कूल पास कर शकुंतला देवी इंटर कालेज में दाखिला लिया। वहां कोच सिलकी मिश्रा के सानिध्य में आकर एनसीसी ज्वाइन कर ली। वर्ष 2011 में शूटिंग में रुचि बढ़ने पर एनसीसी की रायफल से अभ्यास शुरू कर दिया। वर्ष 2012 में फतेहगढ़ के आर्मी स्कूल में तीन यूपी बटालियन व चार यूपी बटालियन अलीगढ़ की ओर से निशानेबाजी में मौका मिला। इसमें प्रियंका ने गोल्ड मेडल जीता। शूटिंग में बेहतर प्रदर्शन करने पर वर्ष 2015 में सीएम ने पदक दिया था। कुछ समय बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने का भी मौका मिला लेकिन पारिवारिक समस्याओं के कारण प्रतिभाग नहीं कर सकीं।
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परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वह पांच लाख रुपये से खुद की रायफल नहीं खरीद पाईं। अक्तूबर 2020 में पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती हो गईं। इस समय कानपुर के कल्याणपुर थाने में तैनात हैं। प्रियंका ने कहा कि शूटिंग का शौक अब भी है। जल्द ही रायफल खरीदकर फिर अभ्यास शुरू कर देंगी। प्रियंका के दो छोटे भाई पढ़ाई कर रहे हैं।
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प्रियंका साहसी बालिका टीम की भी सदस्य हैं। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान प्रशासन ने एलवाई डिग्री कालेज में स्पेशल फ्लू कैंप लगाया था। यहां रोज हजारों प्रवासी आते थे। प्रियंका ने पूरे समय वहां ड्यूटी की और कोरोना योद्धा के रूप में कार्य किया।