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फर्जीवाड़ा : मंडी से कार व बाेलेरो से ढोए गए हजारों क्विंटल आलू
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फर्रुखाबाद। सातनपुर मंडी में कार व बोलेरो से हजारों क्विंटल आलू ढोए गए। एक ही फर्म की एक लाख क्विंटल से अधिक आलू की द्वितीयक पर्ची काटकर लाखों रुपये के वारे-न्यारे कर राजस्व को क्षति पहुंचाई गई। वहीं गेट पास में कार व बोलेरो के नंबर ट्रकों के दिखाए गए।
एशिया की बड़ी मंडियों में शामिल शहर की सातनपुर आलू मंडी में फर्जीवाड़ा की हदें पार हो गईं। पिछले दिनों फर्जी फर्म के नाम पर आलू व्यापार करने की शिकायत हुई। जांच के दौरान फर्म के कागजात ही गायब कर दिए गए। शिकायतकर्ता को गुमराह कर कार्रवाई के नाम पर फर्जी फर्म का कारोबार बंद कर दिया गया।
दूसरे जिले की मंडियों से कटी 6-आर रसीद पर सातनपुर मंडी में द्वितीयक पर्ची काटकर लाखों के वारे-न्यारे कर दिए गए। अमर उजाला ने खुलासा किया तो मंडी सभापति सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल ने शिकंजा कसा। उन्होंने जांच के लिए सचिव से पत्रावली तलब की, लेकिन कई पत्राचार के बावजूद सचिव ने रिकार्ड नहीं दिया।
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मार्च में औरैया की एक फर्म के नाम द्वितीयक पर्ची काटने का खेल शुरू हुआ। एक माह में ट्रकों से करीब 35 हजार क्विंटल आलू की द्वितीय पर्ची काटी गईं, जबकि यह ट्रक मंडी में आए ही नहीं।
सिटी मजिस्ट्रेट ने इन ट्रकों के नंबरों की एआरटीओ के एम-परिवहन एप पर जांच कराई। इसमें बड़ा खुलासा हुआ। 350 से 450 क्विंटल आलू ले जाने वाले ट्रकों के नंबर कार, बोलेरो, पिकअप आदि के निकले। इससे द्वितीयक पर्ची के फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। (संवाद)
10 रुपये प्रति क्विंटल वसूली का खेल
मंडी के सूत्रों के अनुसार द्वितीयक पर्ची के नाम पर पांच से 10 रुपये प्रति क्विंटल वसूली का खेल चला। बताया जा रहा है कि औरैया की एक ही फर्म के नाम करीब एक लाख 40 हजार क्विंटल आलू की द्वितीय पर्ची काटी गईं। इससे करीब 10 लाख रुपये की वसूली की गई। वहीं, कम से कम इससे दो गुना मंडी शुल्क का नुकसान पहुंचाया गया। यह भी बताया जा रहा है कि मंडी में बिना वाहन लाए पर्ची काटने वाले कर्मचारी को 70 रुपये प्रति ट्रक खर्च दिया जाता रहा, जबकि 5 से 10 रुपये क्विंटल वसूली अधिकारी के खाते में जाती रही।
इनकी भी सुनें
कर्मचारी की लापरवाही से ट्रकों के गलत नंबर डाले गए हैं। द्वितीयक पर्ची काटने के लिए वाहन का मंडी में आना कोई जरूरी नहीं है। गेट पास पर गलत नंबर डालने के मामले में कर्मचारी से स्पष्टीकरण लिया गया है।
- रामसेवक वर्मा, मंडी सचिव
क्या कहते हैं जिम्मेदार
आलू ले जाने वाले ट्रकों के नंबरों की जांच की गई तो वह कार, बोलेरो, पिकअप आदि के निकल रहे हैं। फर्जीवाड़ा की जांच के लिए कई बार पत्र लिखने के बावजूद सचिव ने पत्रावली नहीं दी। इससे उपनिदेशक को पत्र लिखकर अभिलेख मांगे गए हैं।
- संजय कुमार बंसल, सिटी मजिस्ट्रेट
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एशिया की बड़ी मंडियों में शामिल शहर की सातनपुर आलू मंडी में फर्जीवाड़ा की हदें पार हो गईं। पिछले दिनों फर्जी फर्म के नाम पर आलू व्यापार करने की शिकायत हुई। जांच के दौरान फर्म के कागजात ही गायब कर दिए गए। शिकायतकर्ता को गुमराह कर कार्रवाई के नाम पर फर्जी फर्म का कारोबार बंद कर दिया गया।
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दूसरे जिले की मंडियों से कटी 6-आर रसीद पर सातनपुर मंडी में द्वितीयक पर्ची काटकर लाखों के वारे-न्यारे कर दिए गए। अमर उजाला ने खुलासा किया तो मंडी सभापति सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल ने शिकंजा कसा। उन्होंने जांच के लिए सचिव से पत्रावली तलब की, लेकिन कई पत्राचार के बावजूद सचिव ने रिकार्ड नहीं दिया।
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मार्च में औरैया की एक फर्म के नाम द्वितीयक पर्ची काटने का खेल शुरू हुआ। एक माह में ट्रकों से करीब 35 हजार क्विंटल आलू की द्वितीय पर्ची काटी गईं, जबकि यह ट्रक मंडी में आए ही नहीं।
सिटी मजिस्ट्रेट ने इन ट्रकों के नंबरों की एआरटीओ के एम-परिवहन एप पर जांच कराई। इसमें बड़ा खुलासा हुआ। 350 से 450 क्विंटल आलू ले जाने वाले ट्रकों के नंबर कार, बोलेरो, पिकअप आदि के निकले। इससे द्वितीयक पर्ची के फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। (संवाद)
10 रुपये प्रति क्विंटल वसूली का खेल
मंडी के सूत्रों के अनुसार द्वितीयक पर्ची के नाम पर पांच से 10 रुपये प्रति क्विंटल वसूली का खेल चला। बताया जा रहा है कि औरैया की एक ही फर्म के नाम करीब एक लाख 40 हजार क्विंटल आलू की द्वितीय पर्ची काटी गईं। इससे करीब 10 लाख रुपये की वसूली की गई। वहीं, कम से कम इससे दो गुना मंडी शुल्क का नुकसान पहुंचाया गया। यह भी बताया जा रहा है कि मंडी में बिना वाहन लाए पर्ची काटने वाले कर्मचारी को 70 रुपये प्रति ट्रक खर्च दिया जाता रहा, जबकि 5 से 10 रुपये क्विंटल वसूली अधिकारी के खाते में जाती रही।
इनकी भी सुनें
कर्मचारी की लापरवाही से ट्रकों के गलत नंबर डाले गए हैं। द्वितीयक पर्ची काटने के लिए वाहन का मंडी में आना कोई जरूरी नहीं है। गेट पास पर गलत नंबर डालने के मामले में कर्मचारी से स्पष्टीकरण लिया गया है।
- रामसेवक वर्मा, मंडी सचिव
क्या कहते हैं जिम्मेदार
आलू ले जाने वाले ट्रकों के नंबरों की जांच की गई तो वह कार, बोलेरो, पिकअप आदि के निकल रहे हैं। फर्जीवाड़ा की जांच के लिए कई बार पत्र लिखने के बावजूद सचिव ने पत्रावली नहीं दी। इससे उपनिदेशक को पत्र लिखकर अभिलेख मांगे गए हैं।
- संजय कुमार बंसल, सिटी मजिस्ट्रेट