फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Three convicted former cashier

पूर्व कैशियर सहित तीन को सजा

Tue, 06 Jan 2015 11:18 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Tue, 06 Jan 2015 11:18 PM IST
विज्ञापन
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद रफी ने साइबर क्राइम से 64 लाख रुपये
विज्ञापन
हड़पने के मुकदमे के आरोपी एसबीआई के पूर्व कैशियर को गबन और सहयोगियों को धोखाधड़ी के जुर्म में दोषी करार दिया है। पूर्व कैशियर को दो साल और सहयोगियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। 1.10 लाख रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है। अभियोजन पक्ष आरोपियों पर साइबर क्राइम साबित नहीं कर सका।

वर्ष 2011 दिसंबर में भारतीय स्टेट बैंक आफ इंडिया की शाखा झांसी से इंटरनेट से फर्रुखाबाद की एसबीआई शाखा में फर्जी तरीके से मिथलेश व अरविंद के खाता संख्या 11058732243 में 65.96 लाख रुपया मंगाया गया था। यह मामला झांसी बैंक में आडिट के दौरान पकड़ में आने पर बैंक मैनेजर ने फर्रुखाबाद के बैंक मैनेजर को इसकी जानकारी दी। प्रबंधक ने जांच  की तो पता चला की आठ फर्जी चेकों से 64 लाख रुपये खाते से निकाल लिए गए।

शाखा प्रबंधक भगवानदास ने 8 दिसंबर 2011 को अनिल, कुलदीप, अजय कुमार, मिथलेश, अरविंद व अभिलाख के खिलाफ षड़यंत्र कर गबन व धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।  पुलिस ने जांच पड़ताल के दौरान फतेहगढ़ के जय नरायन वर्मा रोड निवासी अभिलाख गुप्ता को गिरफ्तार किया। इनकी निशानदेही पर 20 दिसंबर 2011 को पांच लाख रुपये बरामद किए गए।

इसके बाद आवास विकास निवासी प्रमोद कुमार शाक्य को गिरफ्तार किया गया। इसकी निशानदेही पर 21 जनवरी 2012 को 37 लाख और 23 जनवरी को 10 लाख रुपये बरामद किए। जांच में बैंक कैशियर की मिलीभगत उजागर हुई।
पुलिस ने एसबीआई के बैंक कैशियर मोहल्ला खतराना निवासी दिनेश चंद्र मेहरोत्रा, अभिलाख गुप्ता व प्रमोद शाक्य के खिलाफ अदालत में धोखाधड़ी, गबन, षड़यंत्र, माल बरामदगी और

साइबर क्राइम में आरोप पत्र दाखिल किया। इनके खिलाफ बैंक शाखा प्रबंधक ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इनमें अभिलाख के अलावा अन्य किसी को पुलिस ने आरोपी नहीं माना और जांच में निकाल दिया था। तीन के खिलाफ सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष  साइबर क्राइम का अपराध साबित नहीं कर सका। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद रफी ने आरोपी पूर्व बैंक कैशियर दिनेश चंद्र मेहरोत्रा को धारा 406 के जुर्म में दोषी करार दिया।

दो साल की सजा सुनाई और दस हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है। आरोपी अभिलाख गुप्ता व प्रमोद कुमार शाक्य को तीन- तीन साल की सजा से दंडित किया और 50-50 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।  

पुलिस की विवेचना पर कोर्ट ने उठाया सवाल
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद रफी ने मुकदमे के निर्णय में पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाया है। इसमें कहा कि दोनों विवेचकों ने प्रकरण का संपूर्ण पटाक्षेप नहीं किया। इसमें शामिल मुख्य व प्रभावशाली व्यक्तियों को आरोपी नहीं बनाया गया है। झांसी और फर्रुखाबाद के बैंक शाखा प्रबंधक की भूमिका की जांच की जानी थी लेकिन पुलिस ने इनकी जांच नहीं की।

इस प्रकरण में खाता धारक के विरुद्ध पत्रावली में सबसे स्पष्ट अधिक साक्ष्य था लेकिन खाता धारक को जानबूझकर आरोपी नहीं बनाया गया। खाताधारक को गवाह  बनाकर कोर्ट में पेश किया। उसने भी आरोपियों के विरुद्ध अभियोजन की दलीलों का खंडन करने का प्रयास किया।

प्रकरण में सीसीटीवी कैमरा व उससे संबंधित लोगों की भूमिका की जांच न कर कथित चेक से धनराशि प्राप्त करने वाले अनिल, कुलदीप व अजय को अभियोजन कहानी में एक व्यक्ति में बदल दिया गया। इस तरह पुलिस की विवेचना पर कोर्ट ने सवाल उठाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed