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सामान्य बस का टैक्स, स्लीपर बन कर दौड़ रही सड़कों पर
Updated Tue, 21 Aug 2018 11:45 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। सामान्य बसों का टैक्स देकर स्लीपर बस बनाकर दिल्ली और जयपुर मार्ग पर दौड़ाई जा रही हैं। इनके खिलाफ शुरू हुआ अभियान विभागीय अधिकारियों की अनेदखी से ठप हो गया है। परिवहन कार्यालय में करीब पांच बसें स्लीपर में दर्ज हैं। जबकि शहर में से दूसरे राज्यों में जाने वाली करीब 70 से 80 बसें हैं। जो शाम होते ही शहर में नजर आने लगती हैं।
मैनपुरी में स्लीपर बस पलटने से 18 की मौत होने और 25 से अधिक घायल होने पर प्रशासन ने इनके खिलाफ अभियान शुरू किया था। इसके लिए टीम का गठन किया गया। टीम ने छापेमारी की। करीब एक माह तक छापेमारी चलने पर 20 बसों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इससे स्लीपर बसों का संचालन कम हो गया था। अभियान का ट्रैवल्स माफिया पर कोई असर नहीं पड़ा। किसी ने भी स्लीपर बस का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण नहीं कराया। इससे पंजीकृत स्लीपर बसों की संख्या पांच से अधिक नहीं हो सकी। अभियान बंद होने के बाद स्लीपर बसों का संचालन फिर शुरू हो गया। जो स्लीपर बसें चल रही हैं, वह सामान्य बसों में दर्ज हैं। टैक्स भी सामान्य बसों का जमा करते हैं। विभाग को हजारों रुपये का हर माह चूना लगता है, लेकिन वह इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते है।
एआरटीओ मोहम्मद हसीब ने बताया कि बसों की चेकिंग कराई जा रही है। जो स्लीपर बस पकड़ी जाती है, उसका अभिलेखों से मिलान किया जाता है। अभिलेख में सामान्य बस के मिलने पर उस पर स्लीपर बस की सीटों के अनुसार टैक्स लगाकर वसूल किया जा रहा है।
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फर्रुखाबाद। सामान्य बसों का टैक्स देकर स्लीपर बस बनाकर दिल्ली और जयपुर मार्ग पर दौड़ाई जा रही हैं। इनके खिलाफ शुरू हुआ अभियान विभागीय अधिकारियों की अनेदखी से ठप हो गया है। परिवहन कार्यालय में करीब पांच बसें स्लीपर में दर्ज हैं। जबकि शहर में से दूसरे राज्यों में जाने वाली करीब 70 से 80 बसें हैं। जो शाम होते ही शहर में नजर आने लगती हैं।
मैनपुरी में स्लीपर बस पलटने से 18 की मौत होने और 25 से अधिक घायल होने पर प्रशासन ने इनके खिलाफ अभियान शुरू किया था। इसके लिए टीम का गठन किया गया। टीम ने छापेमारी की। करीब एक माह तक छापेमारी चलने पर 20 बसों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इससे स्लीपर बसों का संचालन कम हो गया था। अभियान का ट्रैवल्स माफिया पर कोई असर नहीं पड़ा। किसी ने भी स्लीपर बस का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण नहीं कराया। इससे पंजीकृत स्लीपर बसों की संख्या पांच से अधिक नहीं हो सकी। अभियान बंद होने के बाद स्लीपर बसों का संचालन फिर शुरू हो गया। जो स्लीपर बसें चल रही हैं, वह सामान्य बसों में दर्ज हैं। टैक्स भी सामान्य बसों का जमा करते हैं। विभाग को हजारों रुपये का हर माह चूना लगता है, लेकिन वह इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते है।
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एआरटीओ मोहम्मद हसीब ने बताया कि बसों की चेकिंग कराई जा रही है। जो स्लीपर बस पकड़ी जाती है, उसका अभिलेखों से मिलान किया जाता है। अभिलेख में सामान्य बस के मिलने पर उस पर स्लीपर बस की सीटों के अनुसार टैक्स लगाकर वसूल किया जा रहा है।
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